Tuesday, October 27, 2026
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No Sympathy: पढ़ने आए हो या मारपीट करने?…AMU में पढ़नेवाले छात्र के निलंबन को बरकरार रखते हुए कोर्ट की तीखी टिप्पणी

No Sympathy: सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के एक लॉ छात्र को राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसे साथी छात्र के साथ मारपीट करने के आरोप में निलंबित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच कोर्ट अहमद जरयाब बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ता AMU के बी.ए. एलएल.बी (B.A. LL.B) का अंतिम वर्ष का छात्र है। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि कैंपस के भीतर शारीरिक हिंसा करने वाले छात्रों के प्रति न्यायपालिका में कोई सहानुभूति नहीं है।

मामला क्या था? (The Assault Incident)

  • हिंसा: अहमद जरयाब और एक अन्य छात्र पर शिकायतकर्ता के कमरे में घुसकर हमला करने का आरोप है।
  • सबूत: सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में याचिकाकर्ता को पीड़ित पर डंडे से हमला करते हुए कैद किया गया था।
  • सजा: यूनिवर्सिटी ने उसे शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए निलंबित कर दिया है। साथ ही, उसकी डिग्री पूरी होने के बाद उसे AMU के किसी भी अन्य कोर्स में प्रवेश लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: नो सिम्पैथी

  • सुनवाई के दौरान बेंच ने छात्र के आचरण पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की।
  • स्पष्ट संदेश: जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “हमें उन छात्रों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है जो कैंपस में ऐसी हरकतें कर रहे हैं। एक-दूसरे पर शारीरिक हमला करने वाले छात्रों के प्रति कोई नरम रुख नहीं अपनाया जा सकता।”
  • अनुशासन सर्वोपरि: कोर्ट ने माना कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन बनाए रखना अनिवार्य है और हिंसा करने वाले छात्रों को कानूनी तकनीकी का सहारा लेकर बचने नहीं दिया जा सकता।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का पिछला रुख

  • इससे पहले, छात्र ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ उसने ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) का तर्क दिया था।
  • छात्र का दावा: उसे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और न ही उसे कोई लिखित आरोप पत्र (Charge-sheet) दिया गया।
  • हाई कोर्ट का आदेश (13 अप्रैल): हाई कोर्ट ने यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा था कि क्या सजा उचित है और क्या चार्जशीट न देने से छात्र के अधिकारों का हनन हुआ है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्ताअहमद जरयाब (AMU का अंतिम वर्ष का लॉ छात्र)।
अदालतसुप्रीम कोर्ट (जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता)।
मुख्य आरोपसाथी छात्र पर डंडे से हमला करना (CCTV में कैद)।
सजा का प्रभाव2025-26 के लिए निलंबन और भविष्य के प्रवेश पर रोक।
अदालती रुखयाचिका खारिज; हिंसा के प्रति “जीरो टॉलरेंस”।

छात्रों के लिए एक कड़ा सबक

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश भर के छात्रों, विशेषकर कानून के छात्रों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कानून के रखवाले (भविष्य के वकील) ही कैंपस में कानून हाथ में लेंगे और हिंसा करेंगे, तो उन्हें अदालत से कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी। सीसीटीवी साक्ष्य (Digital Evidence) होने की स्थिति में प्रक्रियात्मक कमियों (जैसे चार्जशीट की तकनीकी देरी) के आधार पर राहत पाना अब मुश्किल है।

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