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Noida Bar: नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) बार एसोसिएशन पर सुप्रीम नाराजगी… जानें कैसे हो रहा दिसंबर 2024 के प्रतिबंध का हो रहा उल्लंघन

Noida Bar: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार की जा रही हड़तालों पर कड़ा रुख अपनाया है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
संबंधित बारगौतम बुद्ध नगर बार एसोसिएशन (नोएडा/ग्रेटर नोएडा)।
सुप्रीम कोर्ट बेंचCJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची।
मुख्य मुद्दावकीलों द्वारा बार-बार काम का बहिष्कार और अदालती आदेशों की अवहेलना।
अगली कार्रवाईजिला जज की रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट की कमेटी लेगी कड़ा फैसला।

हड़ताल से न्यायिक कार्य हो रहा प्रभावित

सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इन हड़तालों के कारण न्यायिक कार्य में हो रही बाधा पर ‘तत्काल कार्रवाई’ (Immediate Action) करे। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) की जिला अदालतों में वकीलों द्वारा बार-बार काम के बहिष्कार (Boycott) की खबरों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष निगरानी तंत्र (Mechanism) तैयार किया है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश (The Mechanism)

  • अदालत ने अव्यवस्था को रोकने के लिए कई कदम उठाने को कहा है।
  • डेटा संकलन: गौतम बुद्ध नगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District & Sessions Judge) को उन सभी दिनों की सूची तैयार कर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का निर्देश दिया गया है, जब बार सदस्यों ने काम बंद रखने का प्रस्ताव (Resolution) पारित किया था।
  • इलाहाबाद HC की भूमिका: इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक तीन सदस्यीय समिति इस रिपोर्ट की जांच करेगी और दोषी वकीलों/एसोसिएशन के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी।
  • जवाबदेही: कोर्ट ने विशेष रूप से जीबी नगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा पारित बार-बार के प्रस्तावों पर नाराजगी जताई।

दिसंबर 2024 का ऐतिहासिक फैसला

  • CJI सूर्यकांत ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही वकीलों की हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका है।
  • दिसंबर 2024 का फैसला: इस ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जिला बार एसोसिएशनों को काम से अनुपस्थित रहने या अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करने से स्पष्ट रूप से रोक दिया था।
  • संवैधानिक मर्यादा: कोर्ट ने दोहराया है कि वकील सामूहिक रूप से कोर्ट की कार्यवाही का बहिष्कार नहीं कर सकते, क्योंकि इससे न्याय पाने के आम आदमी के मौलिक अधिकार का हनन होता है।

हड़ताल का जनजीवन और न्याय पर असर

  • नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हाल के वर्षों में स्थानीय प्रशासनिक और पेशेवर मुद्दों को लेकर अक्सर हड़ताल होती रही है।
  • वादियों (Litigants) की परेशानी: हड़ताल के कारण निर्धारित तारीखों पर सुनवाई नहीं हो पाती, जिससे केस लंबित होते जाते हैं और लोगों को समय पर राहत नहीं मिलती।
  • रजिस्ट्री का काम ठप: कोर्ट रूम के अलावा रजिस्ट्री और फाइलिंग का काम भी इन हड़तालों की वजह से पूरी तरह रुक जाता है, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित होता है।

न्यायपालिका बनाम हड़ताल की संस्कृति

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश केवल नोएडा के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की बार एसोसिएशनों के लिए एक चेतावनी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘एडवोकेसी’ (वकालत) का मतलब अदालती काम को रोकना नहीं है। यदि वकीलों की अपनी कोई समस्या है, तो उसके समाधान के लिए अन्य वैधानिक रास्ते अपनाने होंगे, न कि अदालतों पर ताला लगाकर वादियों के हितों की बलि देनी होगी।

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