Wednesday, September 30, 2026
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Cyber Fraud: SIM Swap फ्रॉड में ग्राहक की गलती नहीं…तो बैंक को लौटाना होगा पूरा पैसा, पढ़ें ताजा निर्देश

Cyber Fraud: ऑनलाइन बैंकिंग और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने आम नागरिकों और कंपनियों के हक में एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है।

जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने Bank of Baroda को आदेश दिया है कि वह एक कंपनी के खाते से उड़े ₹1.24 करोड़ की रकम 6% ब्याज के साथ वापस करे। कोर्ट ने कहा है कि अगर SIM Swapping जैसे थर्ड-पार्टी ब्रीच की वजह से आपके खाते से पैसे चोरी होते हैं और इसमें आपकी कोई लापरवाही नहीं है, तो आप ‘Zero Liability’ (शून्य देयता) के हकदार हैं।

क्या था मामला? (The SIM Swap Scam)

  • पीएनपी पॉलीटेक्स (PNP Polytex) नामक कंपनी का बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता था। कंपनी ने बैंकिंग OTP के लिए एक समर्पित मोबाइल नंबर रखा था, जो सुरक्षित लॉकर में रहता था।
  • धोखाधड़ी: जालसाजों ने टेलीकॉम कंपनी से मिलीभगत या फर्जीवाड़े के जरिए उस नंबर का Duplicate SIM निकलवा लिया।
  • ट्रांजैक्शन: असली सिम बंद होते ही जालसाजों ने डुप्लीकेट सिम पर OTP मंगाकर ₹1.24 करोड़ अलग-अलग शहरों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
  • त्वरित रिपोर्ट: कंपनी ने जैसे ही फ्रॉड पकड़ा, तुरंत बैंक को सूचना दी, FIR दर्ज कराई और साइबर पोर्टल पर शिकायत की।

RBI का ‘Zero Liability’ नियम क्या है?

  • अदालत ने RBI के 6 जुलाई 2017 के सर्कुलर का हवाला दिया।
  • अगर अनधिकृत ट्रांजैक्शन किसी थर्ड-पार्टी की गलती या सिस्टम में सेंधमारी की वजह से होता है। और ग्राहक 3 वर्किंग डेज के भीतर इसकी रिपोर्ट बैंक को कर देता है। तो ऐसी स्थिति में ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य (Zero) होती है। पूरा नुकसान बैंक को उठाना होगा।

कोर्ट की बैंक और टेलीकॉम कंपनी को फटकार

  • सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुछ कड़े ऑब्जर्वेशन दिए।
  • सबूत का बोझ बैंक पर: कोर्ट ने कहा कि यह साबित करना बैंक का काम है कि ग्राहक ने लापरवाही की थी। केवल ‘OTP का इस्तेमाल हुआ’ कहकर बैंक अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
  • संदेहास्पद ट्रांजैक्शन: फ्रॉड के ट्रांजैक्शन रविवार और सोमवार तड़के किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि बैंक को कंपनी के पिछले रिकॉर्ड और बड़ी रकम को देखते हुए इन पर शक करना चाहिए था।
  • पुलिस क्लीन चिट: पुलिस की चार्जशीट में साफ था कि यह फ्रॉड बाहरी गैंग ने किया है और कंपनी की इसमें कोई मिलीभगत या लापरवाही नहीं पाई गई।

अदालत का अंतिम आदेश

हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा की दलीलों को खारिज करते हुए निर्देश दिया। बैंक ₹1.24 करोड़ की पूरी राशि कंपनी के खाते में वापस क्रेडिट करे। शिकायत की तारीख से अब तक का 6% सालाना ब्याज भी दिया जाए। यह पूरी प्रक्रिया 8 हफ्तों के भीतर पूरी होनी चाहिए।

कोर्ट के आदेश से यह मिलती है सीख

अगर आपके साथ कोई बैंकिंग फ्रॉड होता है, तो बिना देरी किए (3 दिन के भीतर) बैंक और पुलिस को सूचित करें। अगर आपकी गलती नहीं है, तो RBI के नियम आपकी पूरी सुरक्षा करते हैं।

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