Wednesday, September 30, 2026
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Aadhaar Mismatch: सिस्टम की गलती से आम आदमी परेशान न हो…UIDAI को नसीहत- मानवीय रुख अपनाए

Aadhaar Mismatch: बॉम्बे हाई कोर्ट ने आधार कार्ड (Aadhaar Card) में बायोमेट्रिक मिसमैच और तकनीकी खामियों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

हाई कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि सरकारी अथॉरिटीज को बायोमेट्रिक दिक्कतों से जूझ रहे नागरिकों की मदद के लिए एक Humane Approach (मानवीय नजरिया) अपनाना चाहिए। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल प्रशासनिक पेचीदगियों की वजह से किसी असली निवासी (Genuine Resident) को उसकी पहचान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला? (The Twins’ Struggle)

  • यह मामला दो जुड़वा भाइयों की याचिका पर सामने आया। बचपन में जब उनका आधार बना था, तब उनके बायोमेट्रिक्स अलग थे। बड़े होने पर जब उन्होंने अपना डेटा अपडेट कराना चाहा, तो सिस्टम ने ‘Biometric Mismatch’ दिखाकर रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर दी।
  • चक्कर पर चक्कर: भाइयों को कभी रिकॉर्ड डिलीट करने को कहा गया, तो कभी नया आवेदन देने को।
  • नुकसान: आधार अपडेट न होने की वजह से उनकी हायर एजुकेशन के एडमिशन और इंश्योरेंस जैसे जरूरी काम रुक गए।
  • अदालत का दरवाजा: थक-हारकर उन्होंने आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट का रुख किया।

हाई कोर्ट की UIDAI को दो टूक

जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस हितेश एस. वेनेगावकर की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, डेटाबेस की शुद्धता और सुरक्षा जरूरी है ताकि कोई धोखाधड़ी न हो, लेकिन जहां फ्रॉड का कोई आरोप नहीं है, वहां अथॉरिटीज को लोगों की मदद करनी चाहिए। स्टूडेंट्स, मजदूर और बुजुर्गों को एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस के चक्कर लगवाना गलत है।

कोर्ट के बड़े निर्देश (Key Takeaways)

  • रास्ता दिखाए अथॉरिटी: अगर किसी का बायोमेट्रिक फेल होता है या रिकॉर्ड सस्पेंड होता है, तो UIDAI की जिम्मेदारी है कि वो उसे सुधारने का स्पष्ट रास्ता (Rectification Pathway) बताए।
  • लिखित में दें जवाब: कोर्ट ने गाइडलाइन दी है कि अगर कोई नागरिक शिकायत लेकर आता है, तो उसे लिखित में या आधिकारिक ईमेल के जरिए सही कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
  • स्पेशल हेल्प डेस्क: रीजनल ऑफिस और आधार सेवा केंद्रों पर ऐसी दिक्कतों के लिए ‘Facilitation Mechanism’ (सुविधा केंद्र) बनाया जाए ताकि तकनीकी खामियों को समय पर सुलझाया जा सके।

फैसला: अब क्या होगा?

अदालत ने याचिकाकर्ता भाइयों को निर्देश दिया है कि वे नए सिरे से बायोमेट्रिक्स और डॉक्यूमेंट्स के साथ आवेदन करें। साथ ही, UIDAI को आदेश दिया है कि पिछले ‘मिसमैच’ के आधार पर उनका आवेदन रिजेक्ट न किया जाए, बल्कि उसे कानून के दायरे में रहकर जल्द से जल्द प्रोसेस किया जाए।

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