Wednesday, September 30, 2026
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Digital Revolution: सु-सहायक एआई चैटबॉट व एकीकृत डेटा सिस्टम लॉन्च…जानिए हर केस की जानकारी एक क्लिक पर होगी, सभी के लिए जरूरी

Digital Revolution: सुप्रीम कोर्ट ने दो बड़े तकनीकी सुधार एकीकृत केस मैनेजमेंट सिस्टम (Integrated Case Management System) और एआई-पावर्ड चैटबॉट ‘सु-सहायक’ (Su-Sahayak) पेश किए।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

नई पहलविवरण
सिस्टम का नामएकीकृत केस मैनेजमेंट मॉड्यूल।
एआई चैटबॉट‘सु-सहायक’ (Su-Sahayak)।
मुख्य विशेषतासुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, जिला और तालुका कोर्ट का डेटा एक साथ।
विकसित कियानेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) और रजिस्ट्री ने।
उद्देश्यमुकदमों की रफ़्तार बढ़ाना और ई-सेवाओं को सरल बनाना।

कानूनी सेवाओं को आम जनता के लिए सुलभ और तेज बनाना अहम उद्देश्य

भारत की न्याय प्रणाली को डिजिटल युग में पूरी तरह से समाहित करने के उद्देश्य से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इन पहलों को लॉन्च करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट से लेकर तालुका स्तर की अदालतों तक का डेटा एक साझा मंच पर उपलब्ध होगा। यह पहल नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के सहयोग से विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य कानूनी सेवाओं को आम जनता के लिए सुलभ और तेज बनाना है।

बहु-स्तरीय एकीकरण (Multi-level Integration)

  • इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यापक नेटवर्क है।
  • तालुका से सुप्रीम कोर्ट तक: अब सुप्रीम कोर्ट में बैठे न्यायाधीश जिला और तालुका अदालतों के केस का पूरा विवरण देख सकेंगे। इसी तरह, छोटी अदालतों को भी उच्च स्तर के डेटा तक पहुंच मिलेगी।
  • स्वचालित डेटा रिट्रीवल: नया मॉड्यूल विभिन्न अदालतों के डेटाबेस से जानकारी अपने आप प्राप्त (Automate) कर लेगा। इससे मैन्युअल वेरिफिकेशन में लगने वाला समय बचेगा और अदालती कार्यवाही की गति बढ़ेगी।
  • सरकारी विभागों के साथ समन्वय: हाई कोर्ट और सरकारी विभागों को भी आवश्यकतानुसार इस डेटा तक ‘रेसिप्रोकल एक्सेस’ (Reciprocal Access) दी जाएगी, जिससे मुकदमों में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी।

सु-सहायक (Su-Sahayak): आपका डिजिटल कानूनी सहायक

  • आम नागरिकों को कोर्ट की वेबसाइट पर भटकना न पड़े, इसके लिए एआई चैटबॉट ‘सु-सहायक’ को पेश किया गया है।
  • सरल इंटरफेस: यह चैटबॉट नागरिकों को ई-सर्विसेज (जैसे केस स्टेटस देखना, ई-फाइलिंग आदि) का उपयोग करने में स्टेप-बाय-स्टेप मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
  • त्वरित सहायता: उपयोगकर्ता अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और चैटबॉट उन्हें सही लिंक या प्रक्रिया की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराएगा।
  • हितधारकों को लाभ: यह टूल न केवल जनता के लिए बल्कि वकीलों (Bar members) के लिए भी तकनीकी बाधाओं को दूर करने में मददगार साबित होगा।

डेटा अखंडता और पारदर्शिता (Data Integrity)

  • मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि इस तकनीक से डेटा के साथ छेड़छाड़ की संभावना खत्म होगी।
  • सटीक जानकारी: अदालतों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान अब कागज रहित और रीयल-टाइम होगा।
  • पारदर्शिता: सरकारी विभागों और उच्च अदालतों के बीच डेटा साझा होने से मुकदमों के निपटारे में होने वाली अनावश्यक देरी को पहचाना और दूर किया जा सकेगा।

डिजिटल जस्टिस का भविष्य

सुप्रीम कोर्ट की यह पहल दर्शाती है कि भारतीय न्यायपालिका अब “फिजिकल” से “डिजिटल” की ओर तेजी से बढ़ रही है। ‘सु-सहायक’ जैसा एआई टूल आम आदमी और कोर्ट के बीच की दूरी को कम करेगा, जबकि एकीकृत डेटा सिस्टम जजों को बेहतर निर्णय लेने और प्रशासनिक देरी को खत्म करने में मदद करेगा।

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