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Monuments’ Protection: 300 साल पुरानी झलारें चोरी हो गईं, पुलिस क्या कर रही थी?…एक के बाद पुलिस से दिल्ली हेरिटेज पर पूछे सवाल, पढ़ें पूरा केस

Monuments’ Protection: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों और विरासत स्थलों की बदहाली पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए दिल्ली पुलिस और नगर निकायों को कड़ी फटकार लगाई है।

कोर्ट के मुख्य निर्देश और आगामी कार्रवाई

विवरणआदेश/टिप्पणी
NDMC चेयरमैनअगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण दें।
पुलिस कार्रवाईअतिक्रमण या चोरी होने पर SHO का निलंबन तय।
निजी संस्थाएंदिल्ली गोल्फ क्लब और पंचशील स्कूल में स्मारकों की स्थिति की समीक्षा।
कोर्ट कमिश्नरवरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और डॉ. स्वप्ना लिडल को सर्वेक्षण का जिम्मा।

प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. स्वप्ना लिडल की हालिया रिपोर्ट और तस्वीरों पर गौर किया

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने इस बात पर “आश्चर्य और हैरानी” जताई कि दिल्ली के प्राचीन स्मारकों को दिल्ली गोल्फ क्लब (DGC) और पंचशील पब्लिक स्कूल जैसी निजी संस्थाओं को लीज पर दे दिया गया है, जहाँ रखरखाव के नाम पर “घोर लापरवाही” बरती जा रही है। यह मामला दिल्ली की विरासत संरचनाओं के संरक्षण से जुड़ी एक लंबी लंबित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. स्वप्ना लिडल की हालिया रिपोर्ट और तस्वीरों पर गौर किया।

दिल्ली गोल्फ क्लब (DGC) और NDMC पर कड़े सवाल

  • कोर्ट ने पाया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के तहत आने वाले कई स्मारक दिल्ली गोल्फ क्लब को लीज पर दिए गए हैं, लेकिन वहां उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय है।
  • चोरी और तोड़फोड़: जस्टिस अमानुल्लाह ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा, “300-400 साल पुरानी झलारें और कलाकृतियाँ हटा दी गई हैं! आपका पुलिस स्टेशन क्या कर रहा है? वे जरूर इसमें मिले हुए होंगे। शायद वे चीजें किसी अधिकारी के निजी घर की शोभा बढ़ा रही होंगी।”
  • NDMC की लापरवाही: कोर्ट ने कहा कि NDMC ने लीज पर दी गई संपत्तियों की निगरानी न करके अपने कर्तव्यों का परित्याग (Abdication) किया है और आंखें मूंद ली हैं।

पुलिस कमिश्नर को निर्देश: SHO होंगे जिम्मेदार

  • धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है।
  • सस्पेंशन की चेतावनी: दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया गया है कि वे सभी स्थानीय SHOs को सूचित करें कि यदि किसी संरक्षित या ऐतिहासिक स्मारक में अतिक्रमण, चोरी, या तोड़फोड़ होती है, तो संबंधित SHO को तुरंत निलंबित (Suspend) कर दिया जाएगा।
  • DCP की व्यक्तिगत जवाबदेही: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो पुलिस कमिश्नर और संबंधित क्षेत्र के DCP व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे।

‘खरबूजे का गुंबद’ और पंचशील स्कूल का मामला

अदालत ने दिल्ली सरकार (NCT) से जवाब माँगा है कि वर्ष 1397 के ऐतिहासिक ‘खरबूजे का गुंबद’ (शेख सराय) को किस आधार पर एक निजी स्कूल (पंचशील पब्लिक स्कूल) के परिसर में रहने दिया गया? क्या इस प्राचीन संरचना के रखरखाव के लिए कोई शर्तें तय की गई थीं? कोर्ट ने तस्वीरों का हवाला देते हुए पूछा कि यदि स्मारक खराब स्थिति में है, तो अधिकारियों ने अब तक कदम क्यों नहीं उठाए?

राष्ट्रीय विरासत बनाम निजी स्वार्थ

सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख दर्शाता है कि विकास या मनोरंजन (जैसे गोल्फ क्लब) के नाम पर देश की सदियों पुरानी विरासत की बलि नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐतिहासिक महत्व के स्थल सार्वजनिक संपत्ति हैं और उनकी सुरक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।

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