Thursday, May 14, 2026
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CCTVs in police stations: कोई भी कोना छूटना नहीं चाहिए, एक साल का बैकअप अनिवार्य रूप से रखें…यह मामला पढ़ें

CCTVs in police stations: देश के थानों में CCTV कैमरे लगाने की दिशा में अधिकांश राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UTs) सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इस संबंध में “काफी काम” किया जा चुका है।

स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेकर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ इस मामले की स्वत: संज्ञान’ (Suo Motu) लेकर सुनवाई कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्यों द्वारा CCTV लगाने के लिए फंड (पूंजी) जारी करने के अनुरोधों पर विचार करेगी। थानों में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से CCTV इंस्टॉलेशन की निगरानी कर रहा है।

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फंड शेयरिंग का फॉर्मूला (Funding Pattern)

  • एमिकस क्यूरी (अदालत के सहायक) सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि राज्यों और केंद्र के बीच फंड का बंटवारा किस प्रकार होता है।
  • केंद्र शासित प्रदेश (UTs): केंद्र सरकार 100% फंड देती है।
  • पहाड़ी राज्य: केंद्र 90% और राज्य 10% खर्च वहन करते हैं।
  • अन्य राज्य: केंद्र 60% और संबंधित राज्य 40% खर्च उठाते हैं।

2020 के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों की याद

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों (दिसंबर 2020) के तहत थानों के लिए कुछ कड़े मानक तय किए हैं, जिनका पालन होना अनिवार्य है।
  • कवरेज एरिया: थाने का हर प्रवेश और निकास द्वार, मुख्य गेट, लॉक-अप, गलियारे, लॉबी, रिसेप्शन और लॉक-अप के बाहर का क्षेत्र। कोई भी हिस्सा बिना कवरेज के नहीं रहना चाहिए।
  • तकनीकी मानक: कैमरों में नाइट विजन (Night Vision) के साथ-साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी होनी चाहिए।
  • डेटा स्टोरेज: केंद्र और राज्यों के लिए यह अनिवार्य है कि वे ऐसा सिस्टम खरीदें जिसमें कम से कम एक साल (1 year) का फुटेज स्टोर करने की क्षमता हो।

जांच एजेंसियों के दफ्तर भी रडार पर

  • कोर्ट ने केवल थानों ही नहीं, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्यालयों में भी CCTV और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने के निर्देश दिए हैं।
  • इसमें CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और NIA जैसे महत्वपूर्ण संस्थान शामिल हैं।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणअपडेट / स्थिति
वर्तमान स्थितिअधिकांश राज्यों में “substantial work” (ठोस काम) पूरा हो चुका है।
अगली सुनवाई22 जुलाई, 2026 को तय की गई है।
मुख्य उद्देश्यपुलिस कस्टडी में मानवाधिकारों के उल्लंघन और टॉर्चर को रोकना।
अगला कदमएमिकस क्यूरी जून-जुलाई में अधिकारियों के साथ फंड उपयोग पर बैठक करेंगे।

पारदर्शिता की ओर बढ़ते कदम

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि न्यायपालिका पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए प्रतिबद्ध है। थानों में ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग और लंबी अवधि के डेटा स्टोरेज से न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि झूठे आरोपों से पुलिसकर्मियों का भी बचाव होगा। एक सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड (Centralised Dashboard) के निर्माण पर भी विचार किया जा रहा है जिससे इन कैमरों की कार्यक्षमता की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सके।

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