Tuesday, August 18, 2026
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White House: दिल्ली के 7, जंतर-मंतर रोड स्थित मुख्यालय भवन का मालिकाना हक…कांग्रेस पार्टी के ताजा दावे वाले रोचक केस को यहां पढ़ें

White House: दिल्ली हाई कोर्ट ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की अपने मुख्यालय को लेकर दायर याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को एक नोटिस जारी किया है।

छह दशक पहले ही किया था भुगतान

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने 7, जंतर-मंतर रोड स्थित बंगले के लिए सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित करने का निर्देश देने की मांग की है।
यह बंगला कभी कांग्रेस का मुख्य शक्ति केंद्र था और इसका इतिहास 1946 से जुड़ा है। कांग्रेस पार्टी (INC) इस ऐतिहासिक संपत्ति के मालिकाना हक के लिए अब कानूनी लड़ाई लड़ रही है। पार्टी का दावा है कि उन्होंने छह दशक पहले ही इसके लिए भुगतान कर दिया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भुगतान का दावा

  • याचिका के अनुसार, इस संपत्ति का इतिहास भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ा है।
  • 1946 से कब्जा: कांग्रेस 1946 से इस संपत्ति पर काबिज है। आजादी के बाद इलाहाबाद (प्रयागराज) से हटकर इसे ही पार्टी का मुख्यालय बनाया गया था।
  • 1959 का भुगतान: कांग्रेस का दावा है कि उन्होंने 1959 में भारत सरकार को इस संपत्ति की खरीद के लिए ₹6.10 लाख का भुगतान किया था।
  • विभाजन और विवाद: 1969 में कांग्रेस के विभाजन (इंदिरा गांधी बनाम मोरारजी देसाई) के बाद, यह संपत्ति देसाई गुट के पास चली गई और बाद में जनता दल का मुख्यालय बन गई।

सुप्रीम कोर्ट का 2014 का फैसला

  • इस संपत्ति पर मालिकाना हक की कानूनी स्थिति 2014 में स्पष्ट हुई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट का आदेश: शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था कि 1969 के विभाजन से पहले की कांग्रेस की सभी संपत्तियां और फंड इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (AICC) के पास रहेंगे।
  • 2017 की मांग: इस फैसले के आधार पर, कांग्रेस ने 2017 में दिल्ली सरकार के भूमि और भवन विभाग को पत्र लिखकर सेल डीड निष्पादित करने का अनुरोध किया, लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

हाई कोर्ट की कार्यवाही और ‘मेंटेनेबिलिटी’ पर सवाल

  • जस्टिस पुरुशेंद्र कौरव के समक्ष सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।
  • अंतरिम राहत की मांग: सिंघवी ने मांग की कि जब तक मामला लंबित है, यह संपत्ति किसी और को आवंटित न की जाए।
  • कोर्ट का संदेह: जस्टिस कौरव ने याचिका की ‘मेंटेनेबिलिटी’ (स्वीकार्यता) पर संदेह जताया। उन्होंने मौखिक रूप से कहा कि इस तरह के संपत्ति विवाद के लिए ‘रिट याचिका’ के बजाय ‘सिविल सूट’ (दीवानी मुकदमा) दायर किया जाना चाहिए था।
  • लिमिटेशन का मुद्दा: कोर्ट ने टिप्पणी की कि शायद ‘समय सीमा’ (Limitation aspect) की बाधा से बचने के लिए सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।

केंद्र ने याचिका की स्वीकार्यता पर जताया विरोध

केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने भी याचिका की स्वीकार्यता पर विरोध जताया। हालांकि, अदालत ने विस्तृत सुनवाई के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर, 2026 के लिए तय की है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणमुख्य तथ्य
संपत्ति7, जंतर-मंतर रोड, नई दिल्ली।
मुख्य मांग1959 में किए गए ₹6.10 लाख के भुगतान के आधार पर सेल डीड।
कांग्रेस का तर्क2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संपत्ति पर उनका कानूनी हक है।
कोर्ट का रुखनोटिस जारी, लेकिन ‘रिट याचिका’ के रूप में सुनवाई पर संदेह।

कानूनी तकनीकी पेच में फंसी ऐतिहासिक कोठी

जहाँ कांग्रेस अपनी पुरानी विरासत को वापस पाने के लिए 1959 के दस्तावेजों का सहारा ले रही है, वहीं अदालत का प्राथमिक रुख यह है कि संपत्ति के हस्तांतरण और सेल डीड से जुड़े मामले लंबी कानूनी प्रक्रिया (Civil Trial) का हिस्सा होने चाहिए। अब 14 सितंबर को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या यह मामला हाई कोर्ट में जारी रहेगा या कांग्रेस को निचली अदालत में मुकदमा लड़ना होगा। जंतर-मंतर रोड की यह ‘सफेद कोठी’ जिसने कभी देश की किस्मत बदलने वाले फैसले देखे थे, आज एक बुजुर्ग महिला की रहस्यमयी मौत के न्याय का इंतजार कर रही है।

जानिए, 7, जंतर-मंतर रोड स्थित ‘व्हाइट हाउस’ (White House) के बारे में

भारतीय राजनीति का शक्ति केंद्र यह व्हाइट हाउस

7, जंतर-मंतर रोड स्थित ‘व्हाइट हाउस’ (White House), जो कभी भारतीय राजनीति का शक्ति केंद्र हुआ करता था, इन दिनों एक संदिग्ध हत्या के मामले को लेकर चर्चा में है। 85 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक पॉलीन क्राउदर (Pauline Crowther) की मौत ने इस ऐतिहासिक इमारत के गलियारों में फिर से हलचल पैदा कर दी है। यह इमारत केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के उतार-चढ़ाव की गवाह रही है।

राजनीतिक विरासत: कांग्रेस का मुख्यालय

  • इलाहाबाद से दिल्ली: स्वतंत्रता के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने अपना आधार इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से हटाकर इसी ‘व्हाइट हाउस’ में स्थानांतरित किया था।
  • नेहरू का आना-जाना: 1960 और 70 के दशक में यह राजनीतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र था। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अक्सर यहाँ आया करते थे।
  • कांग्रेस का विभाजन (1969): जब इंदिरा गांधी और मोरारजी देसाई के बीच सत्ता संघर्ष के कारण कांग्रेस विभाजित हुई, तो यह इमारत देसाई के नेतृत्व वाली कांग्रेस (O) का मुख्यालय बनी।
  • जनता दल का कब्जा: 1977 में जनता दल के गठन के बाद, यह उसका मुख्यालय बना और वर्तमान में इसके परिसर का एक हिस्सा जनता दल यूनाइटेड (JD-U) के कार्यालय के रूप में उपयोग किया जाता है।

पॉलीन क्राउदर: व्हाइट हाउस के पीछे रिहायशी क्वार्टर की कहानी

  • इस ऐतिहासिक परिसर के पीछे बने रिहायशी क्वार्टरों में लगभग 30 परिवार रहते हैं। इन्हीं में से एक में पॉलीन क्राउदर अपने बेटे दलजीत और बहू के साथ रह रही थीं।
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: पॉलीन ने 1950 के दशक में यूके में महेंद्र सिंह (एक जमींदार परिवार से) से शादी की थी। महेंद्र सिंह के परिवार के कांग्रेस से जुड़ाव के कारण उन्हें 1960 के दशक में यह घर आवंटित किया गया था।
  • रहस्यमयी मौत: 30 जुलाई को पॉलीन अपने कमरे में मृत पाई गईं। उनके बिस्तर के पास खून फैला हुआ था।
  • दुर्घटना या हत्या?: शुरुआत में पुलिस ने इसे बिस्तर से गिरने के कारण हुई मौत माना था। लेकिन हाल ही में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को पलट दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सिर पर लगी चोटें प्राकृतिक नहीं थीं।

वर्तमान स्थिति और जांच

  • दिल्ली पुलिस ने अब इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
  • कोई ठोस मकसद नहीं: पुलिस के अनुसार, पॉलीन का अपने पड़ोसियों या नौकरों के साथ कोई विवाद नहीं था। लूटपाट के कोई संकेत नहीं मिले हैं और उनके नाम पर कोई बड़ी संपत्ति भी नहीं थी।
  • फोरेंसिक जांच: पुलिस अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) का इंतजार कर रही है।
  • पारिवारिक बयान: पॉलीन की बेटी अमेरिका से लौट रही हैं, जिसके बाद पुलिस को और अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।

मुख्य हाइलाइट्स

श्रेणीविवरण
ऐतिहासिक महत्वकांग्रेस और जनता दल का पूर्व मुख्यालय।
महत्वपूर्ण हस्तियाँजवाहरलाल नेहरू, मोरारजी देसाई।
पीड़ितापॉलीन क्राउदर (85 वर्षीय, यूके की नागरिक)।
जांच की स्थितिधारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज; पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘अप्राकृतिक मौत’ की पुष्टि।
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