Exam Paper Leak: दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2024 की यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा के पेपर लीक मामले की जांच बंद करने पर CBI को कड़ी फटकार लगाई है।
जांच बंद करने की रिपोर्ट पर सवाल उठाया
नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर देश में मचे घमासान के बीच राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) नीतू नागर ने सीबीआई से इस बात पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है कि एजेंसी ने अपने ही जांच निष्कर्षों में गड़बड़ी की बात स्वीकार करने के बावजूद जनवरी 2025 में इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट (जांच बंद करने की रिपोर्ट) क्यों दायर की।
सीबीआई का दावा- लीक के सबूत फर्जी थे
यह मामला जून 2024 में आयोजित हुई यूजीसी-नेट परीक्षा से जुड़ा है, जिसे पेपर लीक की आशंका के चलते केंद्र सरकार ने परीक्षा के अगले ही दिन रद्द कर दिया था। सीबीआई ने बाद में दावा किया था कि लीक के सबूत ‘फर्जी’ थे, लेकिन अब कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के विरोधाभासों को पकड़ लिया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “अपराध साफ दिख रहा है, फिर भी जांच क्यों बंद की?”
- मजिस्ट्रेट नीतू नागर ने 15 मई के अपने आदेश में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के पैरा संख्या 16.30 का हवाला देते हुए एजेंसी को घेरा।
- सीबीआई की रिपोर्ट में क्या था? सीबीआई के जांच अधिकारी (IO) ने खुद अपनी रिपोर्ट के पैरा 16.30 में लिखा था कि “निखिल सोनी नामक एक संदिग्ध ने यूजीसी-नेट 2024 के उम्मीदवारों को परीक्षा का पेपर देने/लीक करने का लालच देकर उनसे पैसे वसूले थे।”
- अदालत का सवाल: जज ने कहा, “यह पूरी तरह स्पष्ट (Manifest) है कि रिपोर्ट के कंटेंट के अनुसार अपराध हुआ है। इसके बावजूद जांच अधिकारी ने इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी, जिसके कारण वही बेहतर जान सकते हैं।”
- अदालत की इस फटकार के बाद, सीबीआई के जांच अधिकारी ने लिखित स्पष्टीकरण दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 मई 2026 के लिए तय कर दी है।
क्या था यूजीसी-नेट 2024 का पूरा विवाद? (The Background)
- जून 2024 में परीक्षा: 18 जून 2024 को देश के 317 शहरों में 9 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजित की गई थी।
- अचानक परीक्षा रद्द: परीक्षा के अगले ही दिन (19 जून), केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिले इनपुट के आधार पर परीक्षा रद्द कर दी। इनपुट में कहा गया था कि परीक्षा की शुचिता से समझौता हुआ है।
- टेलीग्राम का स्क्रीनशॉट: दरअसल, परीक्षा के दिन दोपहर करीब 2 बजे एक टेलीग्राम चैनल पर प्रश्नपत्र का स्क्रीनशॉट साझा किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह पेपर पहली पाली की परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था। इसके बाद 23 जून 2024 को सीबीआई ने इस जांच को हाथ में लिया था।
सीबीआई की ‘डॉक्टर्ड/फर्जी सबूत’ वाली थ्योरी
- सीबीआई ने जनवरी 2025 में अदालत के सामने क्लोजर रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया था कि देश में कोई पेपर लीक नहीं हुआ था।
- छात्र ने बनाया था फर्जी स्क्रीनशॉट: सीबीआई का कहना था कि फोरेंसिक विशेषज्ञों की जांच के अनुसार, टेलीग्राम पर वायरल स्क्रीनशॉट पूरी तरह फर्जी (Fabricated) था। इसे एक स्कूली छात्र ने एक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके इस तरह से मैनिपुलेट किया था ताकि यह आभास हो सके कि पेपर परीक्षा से पहले ही उपलब्ध था।
- विरोधाभास: हालांकि, सीबीआई की इसी रिपोर्ट में पैसे के लेनदेन और उम्मीदवारों को लालच देने की बात भी दर्ज थी, जिसे लेकर अब दिल्ली की अदालत ने एजेंसी को कटघरे में खड़ा किया है।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| मुख्य विवरण | वर्तमान कानूनी स्थिति |
| संबंधित अदालत | राउज़ एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली (ACJM नीतू नागर) |
| आदेश की तिथि | 15 मई 2026 |
| सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट | जनवरी 2025 में दाखिल (सीबीआई ने कहा था पेपर लीक नहीं हुआ)। |
| अदालत का मुख्य आपत्ति बिंदु | जब रिपोर्ट में दर्ज है कि संदिग्ध ‘निखिल सोनी’ ने पेपर लीक के नाम पर पैसे वसूले, तो केस बंद क्यों किया गया? |
| अगली सुनवाई की तारीख | 21 मई 2026 (सीबीआई को लिखित जवाब देना है)। |
नीट विवाद के बीच इस फैसले के मायने
चूंकि देश में इस समय नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर पहले से ही भारी राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश है, ऐसे में दिल्ली कोर्ट द्वारा यूजीसी-नेट मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। यह आदेश दर्शाता है कि अदालतें राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच को बिना पुख्ता तार्किक निष्कर्ष के बंद करने की अनुमति नहीं देंगी।

