Tuesday, October 6, 2026
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Verification Process: देश की अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे करीब 35 से 40 प्रतिशत वकीलों की डिग्रियां फर्जी… BCI अध्यक्ष के दावे यहां पढ़े

Verification Process: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है।

समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि देश की अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे करीब 35 से 40 प्रतिशत वकीलों (Advocates) की डिग्रियां फर्जी हैं या उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वकालत का लाइसेंस हासिल किया है। यह बयान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा कोर्ट रूम में की गई एक तल्ख टिप्पणी और उसके बाद सोशल मीडिया पर चले एक मूवमेंट के संदर्भ में आया है।

BCI अध्यक्ष के बयान की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 40% वकीलों ने नहीं भरा वेरिफिकेशन फॉर्म: मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वकीलों की डिग्रियों के सत्यापन (Verification Process) की प्रक्रिया शुरू की, तो लगभग 40% वकीलों ने वेरिफिकेशन फॉर्म ही नहीं भरा। BCI को अंदेशा है कि फॉर्म न भरने वाले ये सभी लोग फर्जी डिग्री के सहारे अदालतों में काले कोट और बैंड पहनकर घूम रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के संज्ञान में भी लाई है।
  • “खरीदी या खुद बनाई डिग्रियां”: BCI अध्यक्ष ने सीधे तौर पर कहा कि इन लोगों ने डिग्रियां या तो कहीं से खरीदी हैं या खुद फर्जी तरीके से मैन्युफैक्चर (तैयार) की हैं। BCI इस पूरी समस्या से वाकिफ है और इसे दूर करने के लिए कड़े कदम उठाने की प्रक्रिया में है।

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चीफ जस्टिस की टिप्पणी और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद

  • यह पूरा मामला पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ा है, जहां चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन (वरिष्ठ वकील के दर्जे) से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराजगी जाहिर की थी।
  • CJI की तल्ख टिप्पणी: सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कई वकीलों की कानून की डिग्रियों (Law Degrees) की प्रामाणिकता पर गहरा संदेह जताया था। उन्होंने यहां तक कहा था कि उन्हें इस मामले में BCI से कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, इसलिए वे इस पूरे फर्जी डिग्री रैकेट की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने पर विचार कर रहे हैं।
  • “कॉकरोच” शब्द पर विवाद: सीजेआई ने टिप्पणी की थी कि कुछ बेरोजगार युवा “कॉकरोच” (तिलचट्टों) की तरह हैं जो एक्टिविज्म (सक्रियता) की आड़ में हर कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था पर हमला करते हैं।
  • सोशल मीडिया मूवमेंट और स्पष्टीकरण: चीफ जस्टिस की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक मूवमेंट शुरू हो गया। हालांकि, बाद में चीफ जस्टिस ने खुद साफ किया कि उनका इशारा देश के ईमानदार या युवा वकीलों की तरफ नहीं, बल्कि केवल उन लोगों की तरफ था जो फर्जी डिग्री लेकर वकालत के पेशे को बदनाम कर रहे हैं। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने भी सीजेआई के इस स्पष्टीकरण का पुरजोर समर्थन किया है।

मामले का संक्षिप्त विवरण (Fast Facts)

मुख्य बिंदुविवरण और दावे
दावा करने वालेमनन कुमार मिश्रा (अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ इंडिया)।
आंकड़ाअदालतों में मौजूद लगभग 35% से 40% वकील संदिग्ध या फर्जी हैं।
मुख्य कारणBCI की डिग्री वेरिफिकेशन प्रक्रिया का वकीलों के एक बड़े धड़े द्वारा बहिष्कार करना।
सुप्रीम कोर्ट का रुखचीफ जस्टिस सूर्य कांत वकीलों की डिग्रियों की जांच CBI से कराने पर विचार कर रहे हैं।

निष्कर्ष (Takeaway)

कानूनी बिरादरी (Legal Fraternity) के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इतने बड़े पैमाने पर फर्जी वकीलों की मौजूदगी की बात स्वीकार करना भारतीय न्याय प्रणाली की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। यदि अदालतों में पैरवी करने वाले 40% लोग कानूनी रूप से योग्य ही नहीं हैं, तो यह सीधे तौर पर मुवक्किलों (Litigants) के अधिकारों और न्याय की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ है। सुप्रीम कोर्ट (CJI) और बीसीआई (BCI) का इस मामले में सख्त रुख दिखाना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में देश भर के वकीलों के दस्तावेजों की एक व्यापक और कड़क फॉरेंसिक जांच देखने को मिल सकती है।

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