Friday, June 5, 2026
HomeLaworder HindiStaff Shortage: फॉरेंसिक लैब्स की बदहाली से जमानत पा रहे रेप और...

Staff Shortage: फॉरेंसिक लैब्स की बदहाली से जमानत पा रहे रेप और मर्डर के आरोपी…सीएम योगी आदित्यनाथ से दखल की मांग, यह है मामला

Staff Shortage: उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक साइंस लैब्स (FSL) में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और आधुनिक मशीनों की भारी कमी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद तल्ख और गंभीर टिप्पणी की है।

लैब्स की बदहाली और लचर वैज्ञानिक साक्ष्य है वजह

हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने मनोज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में आदेश पारित करते हुए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की उम्मीद जताई है। कोर्ट ने मुख्य सचिव (Chief Secretary) के माध्यम से इस आदेश की एक प्रति मुख्यमंत्री को भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा है कि लैब्स की बदहाली और लचर वैज्ञानिक साक्ष्यों के कारण बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के आरोपियों को भी जमानत (Bail) मिल रही है।

भारी मन और गहरे दर्द के साथ दे रहा हूं जमानत: हाई कोर्ट

अदालत ने एक ऐसे ही मामले में आरोपी मनोज को जमानत देते हुए बेहद भावुक लेकिन कड़ा रुख अपनाया। कहा, यह अदालत ऐसे कई मामलों से रूबरू हो चुकी है, विशेषकर जहां महिला की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई हो। इन मामलों में पीड़िता के वेजाइनल स्वैब (Vaginal Swab) और आरोपी का डीएनए सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजा जाता है, लेकिन अधिकांश मामलों में FSL रिपोर्ट यह दिखाती है कि डीएनए प्रोफाइल पूरी तरह जेनरेट न हो पाने (Incomplete Generation) के कारण स्रोत का पता नहीं लगाया जा सका। वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में यह अदालत आरोपी को जमानत पर रिहा करने के लिए मजबूर है, हालांकि मैं ऐसा बेहद भारी मन और गहरे दर्द (Heavy Heart and Great Pain) के साथ कर रहा हूं।

राज्य सरकार पर फोड़ा ठीकरा: इसके लिए सिर्फ सरकार जिम्मेदार

हाई कोर्ट ने फॉरेंसिक लैब्स की इस दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा।

पुरानी मशीनें और अधूरी सुविधाएं: “इस मामले में FSL की पुरानी मशीनें और अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ही डीएनए प्रोफाइल न बन पाने का मुख्य कारण है। इसके लिए राज्य सरकार के अलावा किसी और को दोष नहीं दिया जा सकता, जिसके पास विचार करने के लिए कई अन्य मुद्दे तो हैं, लेकिन FSL को बुनियादी ढांचा देने का समय नहीं है।”

स्टाफ की भारी कमी: कोर्ट ने उल्लेख किया कि हाल ही में यूपी फॉरेंसिक लैब के निदेशक (Director) ने खुद अदालत को अवगत कराया था कि राज्य की अधिकांश फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं गंभीर स्टाफ संकट (Acute Staff Shortage) और संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं।

क्या था वर्तमान मामला? (नदी किनारे मिला था महिला का शव)

यह पूरा मामला नवंबर 2025 का है, जब उत्तर प्रदेश में एक महिला लापता हो गई थी और बाद में उसका शव एक नदी के पास मिला था।

आरोप और गिरफ्तारी: पुलिस ने एक गवाह के बयान के आधार पर मनोज नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जिसने आरोपी को नदी की तरफ जाते देखा था। आरोपी 21 नवंबर 2025 से जेल में था।

वकील की दलील: आरोपी के वकील नारायण सिंह (कुशवाहा) ने अदालत में दलील दी कि FSL रिपोर्ट में उसके मुवक्किल का डीएनए पीड़िता के सैंपल से मैच नहीं हुआ है, जिससे उसकी बेगुनाही साबित होती है। इसके अलावा पुलिस के पास कोई अन्य पुख्ता सबूत नहीं है।

सिस्टम का लूपहोल: कोर्ट ने नोट किया कि डीएनए मैच न होने का कारण आरोपी का निर्दोष होना नहीं, बल्कि लैब द्वारा अधूरा डीएनए प्रोफाइल तैयार करना है। तकनीकी भाषा में इसे जांच प्रणाली की “सबसे बड़ी विसंगति” (Biggest Anomaly) कहा गया। चूंकि मेडिकल एविडेंस फेल हो गया, इसलिए कानूनन कोर्ट को आरोपी को बेल देनी पड़ी।

विश्लेषण: जांच व्यवस्था में तकनीक की कमी के गंभीर परिणाम

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (Criminal Justice System) में वैज्ञानिक जांच के महत्व को रेखांकित करता है।

विफलता का क्षेत्रवर्तमान स्थितिन्याय प्रणाली पर इसका असर
डीएनए प्रोफाइलिंगपुरानी और आउटडेटेड मशीनों के कारण सैंपल का पूरा डेटा (Profile) प्रोसेस नहीं हो पाता।कोर्ट आरोपी को ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) देने पर मजबूर होता है, जिससे पीड़िता को न्याय नहीं मिलता।
प्रशासनिक इच्छाशक्तिलॉ एंड ऑर्डर के बड़े-बड़े दावों के बीच फॉरेंसिक लैब्स को बजट और मैनपावर की कमी।केस की वैज्ञानिक कड़ियां कमजोर होने से अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं और पुलिस की चार्जशीट कमजोर हो जाती है।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

यह आदेश उत्तर प्रदेश प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल (Alarm) है। हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अपराध मुक्त समाज का दावा तब तक खोखला है जब तक देश की अदालतों को आधुनिक और अचूक फॉरेंसिक सपोर्ट नहीं मिलता। यदि समय रहते यूपी की फॉरेंसिक लैब्स को हाई-एंड मशीनें और पर्याप्त स्टाफ नहीं मिला, तो वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में कई जघन्य अपराधी तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर जेलों से बाहर आ जाएंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
42.6 ° C
42.6 °
42.6 °
19 %
1.4kmh
0 %
Fri
44 °
Sat
42 °
Sun
44 °
Mon
45 °
Tue
44 °

Recent Comments