Monday, September 7, 2026
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Counting On: बार काउंसिल ऑफ दिल्ली चुनाव…दोबारा मतदान अब नहीं होगा, गड़बड़ी वाले मतपत्रों को अलग करें, गिनती जारी रहेगी, पढ़ें निर्देश

Counting On: दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (Bar Council of Delhi – BCD) के चुनावों को लेकर चल रहे बड़े कानूनी विवाद पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

कड़े सुरक्षा घेरे में दोबारा शुरू करने की हरी झंडी

हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस तेजस कारिया की विशेष डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाया कि सिर्फ इसलिए कि मतगणना (Counting) के दौरान कुछ हेरफेर किए गए मतपत्र (Manipulated Ballots) मिले हैं, पूरे चुनाव को रद्द कर नए सिरे से मतदान कराना सही नहीं होगा। कोर्ट ने रुकी हुई मतगणना को कड़े सुरक्षा घेरे में दोबारा शुरू करने की हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने चुनाव में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों के बावजूद दोबारा मतदान (Re-polling) कराने से साफ इनकार कर दिया है।

संदिग्ध वोटों का फैसला अब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) करेंगे

खारिज: अदालत ने दोबारा चुनाव कराने की मांग को खारिज करते हुए गड़बड़ी वाले मतपत्रों से निपटने के लिए एक व्यावहारिक और पारदर्शी रास्ता निकाला है।

‘Doubtful Ballots’ की छंटनी: जिन भी मतपत्रों (Ballots) पर कुछ मिटाया गया हो (Erasures), ओवरराइटिंग हो, सुधार या कोई भी संदिग्ध बदलाव दिखे, उन्हें तुरंत मुख्य गिनती से अलग कर सील कर दिया जाएगा। इन्हें “संदेहास्पद मतपत्र” माना जाएगा।

ASG का फैसला होगा अंतिम: इन सभी संदिग्ध मतपत्रों (जिनमें २७ विशेष रूप से चिन्हित बैलेट शामिल हैं) को देश के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) के सामने पेश किया जाएगा। ASG प्रत्येक मतपत्र की जांच करेंगे, उसे गिनना है या नहीं इस पर संक्षिप्त कारण दर्ज करेंगे और उनका फैसला ही अंतिम (Final) माना जाएगा।

फर्स्ट प्रेफरेंस की दोबारा गिनती नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कथित हेरफेर से ‘फर्स्ट-प्रेफरेंस’ (प्रथम वरीयता) के वोटों पर कोई असर नहीं पड़ा है, इसलिए शुरुआती वोटों की दोबारा गिनती (Recounting) की कोई आवश्यकता नहीं है। मतगणना वहीं से शुरू होगी जहां इसे रोका गया था।

सीसीटीवी, लाइव-स्ट्रीमिंग और लॉकर्स: मतगणना केंद्र अब ‘किले’ में तब्दील होगा

चुनाव की शुचिता बनाए रखने और भविष्य में किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकने के लिए हाई कोर्ट ने मतगणना प्रक्रिया को लेकर बेहद कड़े और अभूतपूर्व सुरक्षा निर्देश (Enhanced Safeguards) जारी किए हैं। इनमें मतपत्रों को रखने के लिए डिजिटल या मजबूत तालों वाले लॉकेबल स्टोरेज का इस्तेमाल होगा, पूरे मतगणना केंद्र पर हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और लगातार सीसीटीवी (CCTV) मॉनिटरिंग होगी और पूरी काउंटिंग प्रक्रिया की लाइव-स्ट्रीमिंग (Live-streaming) की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे। मतगणना स्टाफ का सख्त वेरिफिकेशन होगा और बिना अनुमति किसी को भी प्रवेश नहीं मिलेगा।

विवादों और निलंबनों से घिरा रहा है यह चुनाव (बैकग्राउंड)

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के ये चुनाव इसी साल फरवरी (2026) में आयोजित किए गए थे, जिसकी कमान दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस तलवंत सिंह (रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में) संभाल रहे थे। हालांकि, यह पूरा चुनाव शुरू से ही विवादों और वकीलों के बीच आपसी टकराव का केंद्र बना रहा।

आचार संहिता का उल्लंघन (MCC Violations): फरवरी में बड़े पैमाने पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में 2 सीनियर वकीलों सहित 67 उम्मीदवारों को सस्पेंड कर दिया गया था। कुल 79 वकीलों को नोटिस थमाए गए थे।

रिटायर्ड जज से बदसलूकी: चुनाव के दौरान कुछ वकीलों द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस तलवंत सिंह के साथ धक्का-मुक्की, नारेबाजी और बदसलूकी करने के गंभीर आरोप लगे। इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला और 9 अन्य वकीलों को बार काउंसिल के रोस्टर (Rolls) से निलंबित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक: मतपत्रों में छेड़छाड़ की शिकायतों के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। 18 मई को चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मतगणना पर अंतरिम रोक लगाते हुए इस मामले की तुरंत सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट को एक ‘विशेष बेंच’ (Special Bench) गठित करने का निर्देश दिया था।

विश्लेषण: हाई कोर्ट के फैसले के मायने और वकीलों के लिए संदेश

कानूनी पहलूकोर्ट का स्टैंड और इसका दीर्घकालिक प्रभाव
वकीलों के आत्मसम्मान को झटकाकानून के रखवाले कहे जाने वाले वकीलों के अपने ही चुनाव में इस स्तर की धांधली, लाइव-स्ट्रीमिंग और ASG की निगरानी में काउंटिंग होना बार की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
रुके हुए नतीजों का रास्ता साफदोबारा चुनाव न कराने के फैसले से उन सैकड़ों उम्मीदवारों और हजारों वोटर वकीलों को राहत मिली है जो महीनों से नतीजों का इंतजार कर रहे थे।
इलेक्शन पिटीशन का अधिकार सुरक्षितकोर्ट ने साफ किया है कि नतीजे घोषित होने के बाद भी यदि किसी याचिकाकर्ता को कोई आपत्ति है, तो वह तय कानूनी प्रक्रिया के तहत ‘इलेक्शन पिटीशन’ (चुनाव याचिका) दायर कर सकता है।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

दिल्ली हाई कोर्ट की विशेष बेंच का यह फैसला चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह ठप होने से बचाने और गंदे खेल खेलने वाले तत्वों को रोकने के बीच एक बेहतरीन संतुलन है। हाई कोर्ट ने साफ संदेश दे दिया है कि कुछ शरारती तत्वों की वजह से पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बंधक नहीं बनाया जा सकता। अब सख्त कैमरों और देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी (ASG) की सीधी निगरानी में दिल्ली बार काउंसिल को उसके नए नुमाइंदे मिलेंगे।

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