Ayodhya Ram Mandir: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने श्रीराम मंदिर में दान चोरी को लेकर देश में जड़े जमा चुके भ्रष्टाचार और गिरते नैतिक मूल्यों पर यह बेहद तल्ख टिप्पणी की।
हाईकोर्ट के जस्टिस ने कहा, श्रीराम मंदिर में दान की चोरी से जुड़ी हालिया घटना ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका साबित हुई है। जो लोग राम मंदिर जैसी जगह पर हुई चोरी से भी बेअसर और बेपरवाह रहते हैं, उन्हें कोई चीज शर्मसार नहीं कर सकती। यह भारतीय चरित्र और ईमानदारी के न्यूनतम स्तर (Nadir of Indian’s integrity) को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु: फैकल्टी और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
भ्रष्टाचार की वैधानिकता और राम मंदिर चोरी का ज़िक्र
जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि औसत भारतीय ने भ्रष्टाचार को इतना सामान्य बना लिया है कि जब तक कोई पकड़ा न जाए, तब तक वह इसे गलत ही नहीं मानता। उन्होंने ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2025’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 182 देशों में भारत का 91वां स्थान होना भी हमें शर्मसार नहीं करता।
अनधिकृत निर्माण में राज्य स्वयं ‘सह-अपराधी’ (Particeps Criminis)
न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी मकान या अवैध निर्माण रातों-रात खड़ा नहीं होता। जब ऐसी इमारतें बनती हैं, तब भ्रष्ट अधिकारी और राजनीतिक तंत्र रिश्वत लेकर अपनी आंखें मूंद लेते हैं। बाद में इन्हीं अवैध ढांचागत निर्माणों को बिजली, पानी जैसी सरकारी सुविधाएं दी जाती हैं। दशकों बाद जब बुलडोजर चलाया जाता है, तो नुकसान उन खरीदारों को भुगतना पड़ता है। इसलिए इस पूरे खेल में राज्य खुद एक सह-अपराधी है।
केस मैट्रिक्स: बुलडोजर जस्टिस एवं भ्रष्टाचार केस
| प्रक्रियात्मक पहलू | विवरण / अदालत की स्थिति |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस अतुल श्रीधरन (खंडित फैसले में दूसरे जज: जस्टिस सिद्धार्थ नंदन) |
| मुख्य विषय | बुलडोजर कार्रवाई की वैधता एवं प्रशासनिक व सामाजिक भ्रष्टाचार |
| याचिकाकर्ता के वकील | वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एफ.ए. नकवी, अधिवक्ता शम्सुद्दीन खान, सैयद अहमद फैजान, जहीर असगर |
| राज्य/उत्तरदाता के वकील | अपर महाधिवक्ता (AAG) अनूप त्रिवेदी, सी.एस.सी., अधिवक्ता दिलीप कुमार श्रीवास्तव, संत राम शर्मा |
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में दान राशि/चढ़ावे में हेराफेरी एवं चोरी के मामले में पुलिस और अदालत (विशेष रूप से उच्चतम न्यायालय) स्तर पर हुई प्रमुख कार्रवाइ
पुलिस और प्रारंभिक एसआईटी (SIT) की कार्रवाई
आरोपियों की गिरफ्तारी: मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 8 मुख्य आरोपियों (जिनमें कैश गिनती के पूर्व इंचार्ज सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला आदि शामिल हैं) को गिरफ्तार किया है।
बरामदगी: आरोपियों के पास और ठिकानों से पुलिस ने अब तक ₹79.83 लाख नकद, सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा बरामद की है।
पूछताछ और हिरासत: स्थानीय अदालत द्वारा पुलिस रिमांड मिलने के बाद सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की गई और फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का रुख और आदेश
नई एसआईटी (SIT) का गठन: उच्चतम न्यायालय (मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ) ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारी की अगुवाई में एक नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने और जांच की निगरानी खुद करने का निर्देश दिया है।
राजनीति न करने की हिदायत: सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर अपराध का मामला है, इसलिए इस मुद्दे पर राजनीति न की जाए।
रेकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश: कोर्ट ने ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को दान, नकद, सोने-चांदी व अन्य चढ़ावे से जुड़े सभी रसीद और दस्तावेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
ट्रस्ट और दान-गणना व्यवस्था में बदलाव
गिनती की जिम्मेदारी SBI के पास: गबन का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने दान की राशि की गिनती की पूरी प्रक्रिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की देखरेख में दो शिफ्टों में शुरू करा दी है।
निगरानी का नया ढांचा: गिनती प्रक्रिया की दैनिक निगरानी के लिए पूर्व सैन्य अधिकारियों को सुपरवाइज़र और सीनियर इंचार्ज नियुक्त किया गया है।

