Paper Leak Protest: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने पृथक बयान जारी कर 20 जुलाई 2026 को सीजेपी आंदोलनकारी बच्चों पर पुलिसिया बल प्रयोग की निंदा की है।
आंदोलन में कानूनी बिरादरी के कई सदस्य व वकील भी हुए थे घायल
सार्वजनिक परीक्षाओं (विशेषकर NEET-UG पेपर लीक प्रकरण) में अनियमितताओं के विरोध में संसद मार्च निकाल रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के प्रयोग को लेकर देश की शीर्ष कानूनी संस्थाओं ने कड़ा ऐतराज जताया है। इस मामले की समयबद्ध व निष्पक्ष स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस पुलिसिया कार्रवाई में छात्रों के साथ-साथ प्रदर्शन में शामिल कानूनी बिरादरी (Legal Fraternity) के कई सदस्य और वकील भी घायल हुए हैं।
मुख्य बिंदु: शीर्ष बार निकायों का रुख
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) का प्रस्ताव
SCBA ने अपने आधिकारिक प्रस्ताव में शांतिपूर्ण छात्रों और वकीलों पर अत्यधिक और आनुपातिकता से परे बल प्रयोग (Excessive and Disproportionate Force) को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
SCBA का कड़ा संदेश: “निर्दोष छात्रों पर किए गए क्रूर लाठीचार्ज की SCBA कड़ी निंदा करता है, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस घटना में लीगल बिरादरी के सदस्य भी चोटिल हुए हैं। लोकतांत्रिक समाज में शांतिपूर्ण छात्रों और वकीलों के खिलाफ ऐसा अत्यधिक बल प्रयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है। SCBA ने अधिकारियों से मांग की है कि घटना की तत्काल, निष्पक्ष और समयबद्ध (Time-bound) जांच कराई जाए। दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई हो। सभी घायल छात्रों और वकीलों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
SCAORA का संवैधानिक अधिकारों पर जोर
SCAORA ने अपने वक्तव्य में याद दिलाया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 19(1)(b) (शांतिपूर्ण सम्मेलन का अधिकार) के तहत विरोध दर्ज कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। SCAORA ने सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक नज़ीरों ‘हिम्मत लाल के. शाह बनाम पुलिस आयुक्त, अहमदाबाद’ और ‘रामलीला मैदान मामला’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के राज्य के अधिकार पर भी वैधानिकता, आवश्यकता और आनुपातिकता (Legality, Necessity and Proportionality) की सीमाएं लागू होती हैं।
SCAORA का दृष्टिकोण: “संवैधानिक लोकतंत्र में शांतिपूर्ण असहमति कोई अवज्ञा नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों का प्रयोग है। किसी गणराज्य की ताकत असहमति को दबाने में नहीं, बल्कि उसे संविधान के दायरे में सुरक्षा प्रदान करने में निहित है। संवैधानिक शासन का सही मानदंड यह है कि राज्य शांतिपूर्ण असहमति पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।”
विरोध प्रदर्शन का पृष्ठभूमि संदर्भ
संसद मार्च (Chalo Sansad): NEET-UG परीक्षा लीक और अन्य भर्ती धांधलियों के विरोध में हजारों छात्र और युवा कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए थे और मानसून सत्र के दौरान संसद की ओर मार्च कर रहे थे।
प्रमुख मांगें: प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे।
पुलिस कार्रवाई: दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग पर बैरिकेड्स लगाकर छात्रों को रोका और भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र, प्रदर्शनकारी और वकील घायल हो गए।
संस्थागत प्रतिक्रिया मैट्रिक्स
| बार निकाय / संस्था | मुख्य मांगें एवं संवैधानिक तर्क |
| SCBA (Supreme Court Bar Association) | बर्बर लाठीचार्ज की निंदा, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध स्वतंत्र जांच और घायलों का मुफ्त इलाज। |
| SCAORA (Supreme Court Advocates-on-Record Association) | अनुच्छेद 19(1)(a) व 19(1)(b) का हवाला; पुलिस कार्रवाई में ‘आनुपातिकता का सिद्धांत’ लागू करने तथा संवाद की नीति अपनाने की अपील। |

