Wednesday, September 9, 2026
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Uttar Pradesh court: अवैध हिरासत और फर्जी पुलिस रिकॉर्ड…एक थानेदार के खिलाफ उसी के थाने में FIR दर्ज होगी, यह है पूरा केस

Uttar Pradesh court: उत्तर प्रदेश में खाकी की धमक और पुलिसिया उत्पीड़न पर कड़ा प्रहार करते हुए कासगंज की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने एक बेहद कड़ा और मिसाल बनने वाला फैसला सुनाया है।

एक नागरिक को दो दिनों से अधिक समय अवैध रूप से थाना में रखा

अदालत ने पाया कि SHO ने एक नागरिक को दो दिनों से अधिक समय तक अवैध रूप से थाने में बंद रखा और अपनी चमड़ी बचाने के लिए सरकारी दस्तावेज यानी जनरल डायरी (GD) में फर्जी एंट्री (रिकॉर्ड) दर्ज कर दी। अदालत ने एक थाना प्रभारी (SHO) के खिलाफ उसी के पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। CJM खान जीशान मसूद ने अपने आदेश में पुलिस की ‘सरकारी ड्यूटी’ वाली ढाल को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, SHO का कोई भी कृत्य ‘कर्तव्य के निर्वहन में किए गए कार्य’ के दायरे में नहीं आता है। कानून के किसी भी अधिकार के बिना किसी को अवैध हिरासत में रखना और झूठी व काल्पनिक जीडी प्रविष्टियां (GD Entries) करना, कभी भी ऑन-ड्यूटी कार्य नहीं कहा जा सकता।

क्या है पूरा मामला? (CCTV फुटेज ने खोली पुलिस की पोल)

यह मामला संजय यादव नामक व्यक्ति की शिकायत पर सामने आया। संजय यादव के वकील रजत यादव ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को 28 अप्रैल 2026 की दोपहर से बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के थाने में बैठाकर रखा गया था। उन्हें अपने वकील से मिलने तक की इजाजत नहीं दी गई।

अदालत ने जब मामले की गहराई से जांच की, तो पुलिसिया कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई

CCTV ने उगली सच्चाई: कोर्ट ने जब पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, तो पाया कि संजय यादव 28 अप्रैल की दोपहर से लेकर 29 अप्रैल की देर रात तक लगातार लॉक-अप के बाहर बैठे हुए दिखाई दे रहे थे।

कप्तान (SP) की रिपोर्ट में भी पुलिस दोषी: कासगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा सौंपी गई एक जांच रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो गई कि संजय यादव थाने के अंदर ही मौजूद थे।

फर्जी कहानी का भंडाफोड़: SHO गोविंद बल्लभ ने खुद को बचाने के लिए ३० अप्रैल की जनरल डायरी (GD) में एक झूठी कहानी लिखी कि ‘संजय यादव थाने के बाहर हंगामा खड़ा कर रहे थे, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।’ लेकिन जब सीसीटीवी ने दिखा दिया कि वे पहले से ही थाने के अंदर थे, तो यह साफ हो गया कि रिकॉर्ड पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत (Fabricated) था।

छोटी धाराओं में नोटिस क्यों नहीं दिया? नए कानून (BNSS) पर कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने इस बात पर गंभीर नाराजगी जताई कि संजय यादव के खिलाफ जो मामले दर्ज थे (जैसे पारिवारिक क्रूरता, मारपीट, शांति भंग करना और आपराधिक धमकी), वे नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की ऐसी धाराएं थीं जिनमें तुरंत गिरफ्तारी की कोई जरूरत नहीं होती।

कानून का नियम: नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) (जो पहले CrPC की धारा 41A थी) के तहत कम गंभीर अपराधों में पुलिस को आरोपी को पहले ‘थाने में पेश होने का नोटिस’ देना अनिवार्य है। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 38 के तहत आरोपी को अपने कानूनी सलाहकार (वकील) से परामर्श करने का मौलिक अधिकार है, जिससे पुलिस ने उसे वंचित रखा।

विश्लेषण: SHO गोविंद बल्लभ के खिलाफ दर्ज होने वाली धाराएं

CJM कोर्ट ने माना कि थाना प्रभारी (साहवर थाना) प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत और जालसाजी के दोषी हैं। कोर्ट ने निम्नलिखित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराअपराध का विवरण
धारा 127(2) BNSलोक सेवक (Public Servant) द्वारा किसी व्यक्ति को अवैध रूप से बंधक या गलत तरीके से नजरबंद रखना।
धारा 336, 337 और 344 BNSसरकारी दस्तावेजों में हेरफेर, धोखाधड़ी और फर्जी रिकॉर्ड तैयार करना (जालसाजी)।
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