Lawyers’ Protest: कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू की प्रशासनिक उदासीनता और अदालतों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का आरोप लगाते हुए एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु (AAB) ने बुधवार को मोर्चा खोल दिया।
‘गोल्डन जुबली गेट’ के बाहर धरना प्रदर्शन किया
एसोसिएशन के सदस्यों ने कर्नाटक हाई कोर्ट के ‘गोल्डन जुबली गेट’ के बाहर धरना प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि बेंगलुरु की निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट तक की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इस विरोध प्रदर्शन में एसोसिएशन के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व पदाधिकारियों और बार काउंसिल ऑफ कर्नाटक के सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
विरोध प्रदर्शन के मुख्य कारण और वकीलों के गंभीर आरोप
प्रशासनिक अव्यवस्था और स्टाफ का हस्तक्षेप
वकीलों का आरोप है कि अदालतों के कामकाज में भारी अराजकता फैली हुई है।
मेमो स्वीकार न होना: कई अदालतों में वकीलों द्वारा दाखिल किए जाने वाले मेमो स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं और मामलों की लिस्टिंग में भारी देरी हो रही है।
याचिकाएं फेंकने का आरोप: वकीलों ने आरोप लगाया कि कुछ जज अदालतों में वकीलों के ऊपर याचिकाएं वापस फेंक देते हैं।
स्टाफ का दबदबा: आरोप लगाया गया कि बेंच क्लर्क और कोर्ट स्टाफ ने अदालतों के प्रशासनिक कामकाज पर कब्जा कर लिया है। मुकदमों की जांच (Scrutiny) नॉन-लॉ ग्रेजुएट कर्मचारियों से कराई जा रही है, जबकि इसके लिए कानून की डिग्री वाले योग्य कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए।
बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता का संकट
प्रदर्शनकारी महिला वकीलों ने अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) में शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं की खस्ताहाली पर भारी नाराजगी व्यक्त की।
साझा शौचालय: कुछ कोर्ट परिसरों में महिला और पुरुष वकीलों के लिए एक ही शौचालय है, जिससे महिला वकीलों को पुरुषों के बाहर निकलने का इंतजार करना पड़ता है।
सिटी सिविल कोर्ट व मेयो हॉल: सिटी सिविल कोर्ट, मजिस्ट्रेट कोर्ट और मेयो हॉल कोर्ट परिसरों में बुनियादी ढांचे की स्थिति अत्यंत दयनीय है।
संवादहीनता और जवाबदेही की कमी
AAB अध्यक्ष विवेक सुब्बा रेड्डी और महासचिव एच. वी. प्रवीण गौड़ा ने कहा कि वकीलों की समस्याओं को लेकर मुख्य न्यायाधीश को बार-बार ज्ञापन (Representations) दिए गए, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
प्रदर्शनकारी वकीलों का मुख्य वक्तव्य: “न्याय वितरण प्रणाली में आज कोई जवाबदेही नहीं बची है। दूसरे राज्यों से आए न्यायाधीश हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जो लोग जिम्मेदारियों को निभाने के लिए बैठे हैं, वे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं। अगर इन मुद्दों का तुरंत समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।”
आगे का रुख
सांकेतिक प्रदर्शन: एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बुधवार का धरना केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन (Symbolic Protest) था।
उग्र आंदोलन की चेतावनी: यदि मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय प्रशासन ने वकीलों व महिला अधिवक्ताओं की बुनियादी समस्याओं और प्रशासनिक खामियों को दूर करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तो पूरे राज्य में काम का बहिष्कार और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
केस/घटना मैट्रिक्स: Bengaluru Lawyers’ Protest
| पहलू | विवरण |
| आयोजक | एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु (AAB) |
| प्रदर्शन स्थल | गोल्डन जुबली गेट, कर्नाटक उच्च न्यायालय, बेंगलुरु |
| किसके खिलाफ विरोध | कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू |
| मुख्य मांगें | बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, महिला वकीलों के लिए पृथक शौचालय, मामलों की समयबद्ध लिस्टिंग और स्क्रूटनी विभाग में कानून के स्नातकों की नियुक्ति। |
| प्रमुख चेहरा | विवेक सुब्बा रेड्डी (अध्यक्ष, AAB), एच. वी. प्रवीण गौड़ा (महासचिव, AAB) |

