Tuesday, October 27, 2026
HomeLaworder HindiFake Newspaper Clipping: क्या फर्जी न्यूज क्लिपिंग केवल फॉरवर्ड करना IPC की...

Fake Newspaper Clipping: क्या फर्जी न्यूज क्लिपिंग केवल फॉरवर्ड करना IPC की धारा 469 (Forgery) के तहत अपराध है? पढ़िए मामला

Fake Newspaper Clipping: गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस पी. एम. रावल ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) और चार्जशीट को रद्द करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

संदेश भेजनेवाले को जाली काम में शामिल होना साबित करें

अदालत ने कहा, व्हाट्सएप (WhatsApp) या सोशल मीडिया पर केवल किसी फर्जी अखबार की कतरन (Fake Newspaper Clipping) को फॉरवर्ड कर देना तब तक जालसाजी (Forgery) का अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो कि संदेश भेजने वाले ने खुद उस कतरन को बनाया या जाली रूप में तैयार किया था।

मामला क्या था?: बहुजन समाज पार्टी के नेता की शिकायत

मूल विवाद: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक सदस्य और पब्लिक नोटरी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उन्हें और उनकी राजनीतिक पार्टी को बदनाम करने के लिए व्हाट्सएप पर एक फर्जी अखबार की कतरन प्रसारित की।

याचिकाकर्ता की भूमिका: आरोपी (कौशलभाई जगदीशभाई असोदिया) पर आरोप था कि उसने यह मैसेज एक अन्य व्यक्ति को फॉरवर्ड किया था, जिसने बाद में इसे शिकायतकर्ता को भेजा।

दर्ज धाराएं: पुलिस ने आईपीसी की धारा 469 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जालसाजी), 500 (मानहानि), 501 (मानहानिकारक सामग्री छापना), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और 114 (उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया था।

हाई कोर्ट की मुख्य विधिक टिप्पणियां

“फॉरवर्ड करने मात्र से जालसाजी (Forgery) सिद्ध नहीं होती”

अदालत ने पुलिस जांच के दस्तावेजों का गहन अवलोकन करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने इस फर्जी खबर को खुद नहीं बनाया था।

अदालत का मुख्य अवलोकन: भले ही एफआईआर के आरोपों को ज्यों का त्यों स्वीकार कर लिया जाए, फिर भी आईपीसी की धारा 469 के तहत अपराध नहीं बनता। जांच के दौरान ऐसा एक भी सबूत नहीं मिला है, न ही एफआईआर या चार्जशीट में ऐसा कोई उल्लेख है जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता ने स्वयं उस समाचार कतरन को जाली (Forge) बनाया था।

प्रकाशक/संपादक को आरोपी न बनाना

अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि जिस समाचार पत्र की कतरन बताई जा रही थी, उसके प्रकाशक (Publisher) या संपादक (Editor) को पुलिस ने इस एफआईआर या चार्जशीट में आरोपी ही नहीं बनाया था।

मानहानि और आपराधिक षड्यंत्र का अभाव

हाई कोर्ट ने कहा कि जांच पत्रों में कहीं भी यह नहीं दर्शाया गया है कि याचिकाकर्ता के इस फॉरवर्ड से शिकायतकर्ता या उसकी पार्टी की साख को कैसे नुकसान पहुंचा। इसलिए मानहानि (धारा 500), आपराधिक षड्यंत्र (120B) या अबेटमेंट (114) का कोई भी मामला नहीं बनता है।

सुप्रीम कोर्ट की ‘भजन लाल’ नजीर का हवाला

कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम भजन लाल (State of Haryana v. Bhajan Lal) का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि अगर इस मुकदमे को आगे चलने दिया गया, तो यह कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग (Abuse of Process of Law) होगा।

FIR रद्द: अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी अदालती कार्यवाहियों को पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया।

केस मैट्रिक्स: Gujarat High Court Judgment

प्रक्रियात्मक और विधिक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतगुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस पी. एम. रावल
केस का नामकौशलभाई जगदीशभाई असोदिया बनाम गुजरात राज्य एवं अन्य
मुख्य विधिक मुद्दाक्या फर्जी न्यूज क्लिपिंग केवल फॉरवर्ड करना IPC की धारा 469 (Forgery) के तहत अपराध है?
लागू धाराएंIPC की धारा 469, 500, 501, 120B, और 114
अदालत का निर्णयनहीं; बिना निर्माण/जालसाजी के सबूत के केवल फॉरवर्ड करना जालसाजी नहीं है। FIR और चार्जशीट रद्द।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
scattered clouds
20.2 ° C
20.2 °
20.2 °
82 %
1.6kmh
49 %
Tue
32 °
Wed
30 °
Thu
22 °
Fri
22 °
Sat
29 °

Recent Comments