Wednesday, October 28, 2026
HomeLaworder HindiSelf-Acquired Property: आपके और हमारे घरों का एक ही विवाद…पिता को विरासत...

Self-Acquired Property: आपके और हमारे घरों का एक ही विवाद…पिता को विरासत में मिली हर संपत्ति पैतृक होगी या नहीं, जानिए यहां जवाब

Self-Acquired Property: यदि आपको लगता है कि दादा की संपत्ति में आपका जन्मसिद्ध अधिकार है, तो कानून की स्थिति इससे भिन्न है।

अमेरिका (इलिनॉय) में रहने वाली एक बेटी ने अपने पिता और परिवार के खिलाफ दायर की याचिका

कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पिता को अपने पिता (दादा) की स्व-अर्जित (Self-Acquired) संपत्ति से पारिवारिक बंटवारे या उत्तराधिकार के रूप में जो हिस्सा मिला है, वह पिता की अपनी व्यक्तिगत संपत्ति (Separate Property) रहती है। इसमें बच्चों का जन्म से कोई स्वाधिकार (Coparcenary Right) नहीं बनता। जस्टिस डी.के. सिंह और जस्टिस टी.एम. नदाफ की पीठ ने अमेरिका (इलिनॉय) में रहने वाली एक बेटी द्वारा अपने पिता और परिवार के खिलाफ दायर श्रीमती उषा एन. स्वामी बनाम श्री एम. वेंकटस्वामी एवं अन्य (Smt. Usha N. Swamy v. Sri M. Venkataswamy & Ors.) विभाजन याचिका (Partition Suit) को खारिज करते हुए यह कानूनी सिद्धांत दोहराया।

मामला क्या था?: बेटी का दावा बनाम पिता का रुख

दावा (Smt. Usha N. Swamy v. Sri M. Venkataswamy): उषा एन. स्वामी ने अपने पिता एम. वेंकटस्वामी और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ बेंगलुरु सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। उन्होंने दावा किया कि जो जमीन और अन्य संपत्तियां उनके पिता को दादा से मिली हैं, वे पैतृक (Ancestral) हैं; इसलिए हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत एक सह-दायाद (Coparcener) के रूप में उनका उसमें बराबर का हिस्सा बनता है।

पिता का पक्ष: पिता ने तर्क दिया कि ये संपत्तियां उनके पिता (दादा मुनियप्पा) की खुद की कमाई (Self-Acquired) से खरीदी गई थीं, जो बाद में पारिवारिक व्यवस्था/बंटवारे के तहत उन्हें मिली थीं। इसलिए यह उनकी व्यक्तिगत संपत्ति है, पैतृक संपत्ति नहीं।

हाई कोर्ट का निर्णय: अदालत ने माना कि चूंकि मूल रूप से संपत्तियां दादा द्वारा स्व-अर्जित की गई थीं, इसलिए पिता को मिला हिस्सा उनकी पृथक संपत्ति बनी रही। बेटी इसमें जन्मसिद्ध अधिकार का दावा नहीं कर सकती।

हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं

“पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण से संपत्ति ‘पैतृक’ नहीं बन जाती”

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संपत्ति का जाना ही उसे कानूनन पैतृक नहीं बना देता।

पीठ की मुख्य टिप्पणी: “यदि संपत्ति परिवार के किसी सदस्य की स्व-अर्जित (Self-Acquired) संपत्ति है, तो उसे संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति नहीं माना जाएगा। जब स्व-अर्जित संपत्ति को मालिक द्वारा अपने बच्चों में बांट दिया जाता है, तो प्राप्तकर्ताओं के पास वह व्यक्तिगत संपत्ति के रूप में ही रहती है, जब तक कि उसे संयुक्त परिवार के सामान्य पूल में न मिलाया गया हो।”

धारा 6 और विनीता शर्मा फैसले की सीमाएं

2005 के संशोधन के बाद बेटियों को बेटों के समान सह-दायाद (Coparcener) का अधिकार मिला है। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह संशोधन केवल पहले से मौजूद पैतृक या सह-दायिकी (Coparcenary) संपत्तियों पर लागू होता है। यह संशोधन पिता की व्यक्तिगत या स्व-अर्जित संपत्ति में बच्चों के लिए कोई नया जन्मसिद्ध अधिकार पैदा नहीं करता।

क्या 2005 का संशोधन स्व-अर्जित संपत्ति पर लागू होता है?

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 (Hindu Succession Amendment Act, 2005) बेटियों को बेटों के समान कोपार्टनर का अधिकार देता है।

कानूनी विशेषज्ञों (जैसे ट्राइलीगल के पार्टनर तन्मय पटनायक) के अनुसार

“2005 का संशोधन बेटियों को केवल तभी समान अधिकार देता है जब संपत्ति पहले से ही ‘Coparcener’ या ‘पैतृक’ हो। यह संशोधन पिता की स्व-अर्जित संपत्ति में कोई नया जन्मसिद्ध अधिकार उत्पन्न नहीं करता।”

स्व-अर्जित संपत्ति कब पैतृक बन सकती है?

कोई स्व-अर्जित संपत्ति केवल दो स्थितियों में पैतृक का रूप ले सकती है-

  • यदि मालिक उसे स्वेच्छा से हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के साझा पूल में मिला दे (Blending)।
  • यदि वह चार पीढ़ियों तक बिना किसी बंटवारे के संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति के रूप में बनी रहे।

बच्चे पिता की स्व-अर्जित संपत्ति का दावा कब कर सकते हैं?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पिता के जीवित रहते बच्चे उनकी स्व-अर्जित संपत्ति में किसी हिस्से की मांग नहीं कर सकते। बच्चे ऐसी संपत्ति केवल दो स्थितियों में प्राप्त कर सकते हैं-

बिना वसीयत मृत्यु (Intestate Death): यदि पिता बिना कोई वसीयत (Will) बनाए गुजर जाते हैं, तो सभी कानूनी वारिसों (Class-I Heirs) को हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत समान हिस्सा मिलता है।

वसीयत के माध्यम से (Through Will): यदि पिता अपनी वसीयत में स्पष्ट रूप से बच्चों को हिस्सा देते हैं। (यदि पिता चाहें तो वे अपनी स्व-अर्जित संपत्ति किसी तीसरे पक्ष को भी दे सकते हैं)।

    तुलना: पैतृक संपत्ति बनाम स्व-अर्जित संपत्ति

    कानूनी पहलूपैतृक संपत्ति (Ancestral Property)स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired Property)
    प्राप्ति का स्रोतलगातार चार पीढ़ियों से चली आ रही अविभाजित संपत्ति।अपनी कमाई, खरीद, उपहार या वसीयत से अर्जित।
    जन्मसिद्ध अधिकारबच्चे/बेटियां जन्म लेते ही हिस्सेदार (Coparcener) बन जाते हैं।जीवनकाल के दौरान बच्चों का कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं होता।
    पिता का अधिकारपिता इसे अपनी मर्जी से अकेले नहीं बेच या दान कर सकता।पिता के पास संपत्ति को बेचने, दान करने या वसीयत लिखने का पूर्ण अधिकार होता है।
    बच्चों को हक कब मिलता है?जन्म से ही अधिकार उपलब्ध।केवल तब जब पिता बिना वसीयत (Intestate) के गुजर जाएं, या वसीयत में हिस्सा दें।

    फैसले के मुख्य कानूनी बिंदु (Key Legal Takeaways)

                                                           संपत्ति के दो मुख्य प्रकार
                                                                   │
             ┌──────────────────────────┴──────────────────────────┐
             ▼                                                                                                          ▼
    स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired)                                          पैतृक संपत्ति (Ancestral Property)
    • खुद की कमाई/खरीद, वसीयत या उपहार                                     • 4 पीढ़ियों से अविभाजित चली आ रही
    • बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार **नहीं**                                       • बच्चों का जन्म से ही समान अधिकार (Coparcenary Right)
    • पिता अपनी मर्जी से किसी को भी दे सकता है                                 • हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 लागू

    कानूनी अंतर तालिका (Comparison Table)

    कानूनी पहलूस्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired Property)पैतृक संपत्ति (Ancestral Property)
    जन्मसिद्ध अधिकार❌ नहीं होता।➔ हाँ, जन्म से ही प्राप्त होता है।
    मालिक का अधिकारपूर्ण अधिकार (खरीददार जिसे चाहे दे सकता है)।सीमित (परिवार के सभी कोपार्टनर का हिस्सा होता है)।
    बेटियों का अधिकारपिता की मृत्यु के बाद (वसीयत न होने पर)।बेटों के समान जन्म से ही कोपार्टनर का अधिकार।
    बिक्री/हस्तांतरणपिता बिना बच्चों की सहमति के बेच सकते हैं।सभी कोपार्टनर्स की सहमति अनिवार्य है।

    कर्नाटक हाई कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि संपत्ति का स्रोत (Source of Acquisition) ही उसका कानूनी स्वरूप तय करता है। यदि दादाजी ने संपत्ति स्वयं खरीदी थी, तो पोते-पोतियों का उसमें जन्म से कोई कानूनी दावा नहीं बनता।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Patna
    overcast clouds
    29 ° C
    29 °
    29 °
    46 %
    1.2kmh
    100 %
    Wed
    29 °
    Thu
    22 °
    Fri
    21 °
    Sat
    28 °
    Sun
    29 °

    Recent Comments