Friday, July 31, 2026
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Redressal Commission: लेजर ट्रीटमेंट से 24 साल की युवती का चेहरा खराब हुआ… जानिए इस स्किन क्लिनिक पर कितना लगा जुर्माना

Redressal Commission: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कन्याकुमारी ने कॉस्मेटिक और स्किन ट्रीटमेंट के नाम पर होने वाली लापरवाही पर एक बड़ा फैसला सुनाया है।

इलाज की पूरी रकम रिफंड करने, 2 लाख रुपये का हर्जाना लगाया

आयोग के अध्यक्ष वाई. ग्लैडस्टोन ब्लेस्ड टैगोर और सदस्य एस. नागेंद्रन की पीठ ने क्लिनिक की घोर लापरवाही को रेखांकित करते हुए उसे पीड़िता को इलाज की पूरी रकम रिफंड करने, 2 लाख रुपये का हर्जाना और कानूनी खर्च देने का आदेश दिया है। फोरम ने हाइपरपिग्मेंटेशन (झाइयों) के एक बिगड़े हुए लेजर ट्रीटमेंट के मामले में स्किन क्लिनिक को पूरी तरह उत्तरदायी ठहराया है। इस गलत ट्रीटमेंट के कारण एक 24 वर्षीय युवती का चेहरा गंभीर रूप से मुंहासों (Acne) और दाग-धब्बों से खराब हो गया था।

उपभोक्ता फोरम ने युवती के मानसिक दर्द को समझते हुए बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की

शिकायतकर्ता (24 वर्षीय युवती) ने यह पूरी तरह साबित कर दिया है कि विपक्षी दल (स्किन क्लिनिक) ने सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) की है। इस घटना ने शिकायतकर्ता को अत्यधिक मानसिक तनाव और पीड़ा दी होगी। क्लिनिक की लापरवाही के कारण इलाज के दौरान और बाद में युवती को गंभीर एक्ने और पिंपल्स का दर्द झेलना पड़ा। इसलिए, क्लिनिक को इलाज के लिए ली गई पूरी राशि वापस करनी होगी।”

मामला क्या था? (हॉट वाटर मास्क और चेहरे पर रिएक्शन)

गलत प्रक्रिया का आरोप: पीड़िता ने फरवरी 2025 में इस स्किन क्लिनिक में हाइपरपिग्मेंटेशन के इलाज के लिए ₹52,689 का भुगतान किया था। महिला का आरोप था कि ‘क्यू-स्विच लेजर’ (Q-switch laser) ट्रीटमेंट के तुरंत बाद क्लिनिक के स्टाफ ने उसके चेहरे पर गर्म पानी में भीगा हुआ ‘रोज मास्क’ (Rose Mask) लगा दिया। इसके तुरंत बाद उसके चेहरे पर तेज जलन और गंभीर रूप से पिंपल्स फूट पड़े, जिससे चेहरा खराब हो गया और उसे दूसरी जगह सुधारात्मक इलाज कराना पड़ा।

क्लिनिक का बचाव: क्लिनिक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उन्होंने मानक प्रक्रिया का पालन किया था और मास्क लगाने से पहले चेहरे पर एलोवेरा जेल लगाया था। क्लिनिक का तर्क था कि युवती का चेहरा इसलिए खराब हुआ क्योंकि उसने बीच में ही इलाज छोड़ दिया और बताए गए होम-केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बंद कर दिया।

फोरम का निष्कर्ष: एक 24 साल की लड़की झूठा केस क्यों करेगी?

दोनों पक्षों के व्हाट्सएप चैट, तस्वीरों और मेडिकल बिलों की जांच करने के बाद फोरम ने पीड़िता के दावों को बिल्कुल सच्चा और विश्वसनीय माना। फोरम ने क्लिनिक के कुतर्कों को खारिज करते हुए कहा, शिकायतकर्ता महज 24 वर्ष की एक युवा लड़की है। मुंहासों और पिंपल्स ने उसके चेहरे को बदसूरत बना दिया। ऐसी स्थिति में उस लड़की के पास स्किन क्लिनिक के खिलाफ कोई भी झूठा मामला दर्ज कराने की कोई वजह नहीं है। अदालत ने पाया कि लेजर प्रोसीजर के बाद त्वचा को गंभीर नुकसान हुआ था और युवती को अपना चेहरा ठीक कराने के लिए दूसरे अस्पताल में अलग से पैसे खर्च करने पड़े थे।

विश्लेषण: उपभोक्ता फोरम का मुआवजा मैट्रिक्स

कंज्यूमर फोरम ने क्लिनिक को आदेश दिया है कि वह एक महीने (30 दिन) के भीतर पीड़िता को निम्नलिखित भुगतानों का निपटारा करे।

मुआवजा मद (Heads of Compensation)स्वीकृत राशि और ब्याज दर (The Liability Matrix)
मूल चिकित्सा शुल्क का रिफंड₹52,689 (शिकायत दर्ज करने की तारीख से लेकर निपटारे तक 6.5% वार्षिक ब्याज के साथ)।
मानसिक क्रूरता व वित्तीय नुकसान का हर्जाना₹2,00,000 (लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना के लिए समेकित मुआवजा)।
मुकदमेबाजी का खर्च (Litigation Costs)₹10,000 (कानूनी लड़ाई में हुए खर्च के एवज में)।
डिफॉल्ट क्लॉज (पेनल्टी)यदि क्लिनिक एक महीने के भीतर इस राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो पूरी राशि पर 9% प्रति वर्ष की दर से दंडात्मक ब्याज लागू होगा।
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