केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | कानूनी ब्योरा |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी एवं जस्टिस आरती साठे |
| संबंधित कानून | महाराष्ट्र विलेज पंचायत इलेक्शन रूल्स, 1964 (Rule 2A) & महाराष्ट्र विलेज पंचायत एक्ट, 1958 |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | रोटेशन का नियम अनिवार्य है; लगातार दो कार्यकाल के लिए महिला आरक्षण अमान्य है। |
| अदालत का निर्देश | पिछले आदेशों को रद्द कर 6 सप्ताह में ओपन श्रेणी के तहत नई आरक्षण सूची जारी की जाए। |
Reservation Of Sarpanch Post: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि किसी ग्राम पंचायत में सरपंच का पद ठीक पिछले कार्यकाल (Term) में महिला श्रेणी (Women Category) के लिए आरक्षित था, तो चक्रानुक्रम/रोटेशन (Rotation) के वैधानिक सिद्धांत के तहत अगले कार्यकाल में वह पद सामान्य (Open) वर्ग के लिए होना चाहिए।
यह फैसला जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी (Justice G.S. Kulkarni) और जस्टिस आरती साठे (Justice Aarti Sathe) की खंडपीठ ने 2025-2030 के कार्यकाल के लिए सरपंच पद के आरक्षण को चुनौती देने वाली दो रिट याचिकाओं पर सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि रोटेशन का पालन करने से महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का वैधानिक जनादेश कम या कमजोर नहीं होता, बल्कि यह केवल यह विनियमित करता है कि successive टर्म में आरक्षण को किस प्रकार लागू किया जाए।
मामला और पक्षों के तर्क
- याचिकाकर्ताओं का तर्क: याचिकाकर्ताओं ने उप-विभागीय अधिकारियों (SDOs) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत 2025-2030 के कार्यकाल के लिए सरपंच का पद पुनः महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह पद 2020-2025 के कार्यकाल में पहले से ही महिलाओं के लिए आरक्षित था। महाराष्ट्र विलेज पंचायत (सरपंच और उप-सरपंच) इलेक्शन रूल्स, 1964 के नियम 2A(4) के दूसरे प्रावधान के अनुसार, अगले कार्यकाल में इसे ओपन/जनरल श्रेणी के लिए रखा जाना चाहिए था।
- राज्य सरकार का पक्ष: राज्य ने तर्क दिया कि SDO द्वारा निकाली गई ड्रा ऑफ लॉट्स (Draw of Lots) प्रक्रिया वैध थी और महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की कुल वैधानिक आवश्यकता को बनाए रखने के लिए आवश्यक थी। राज्य ने सर्वोच्च न्यायालय के संजय रामदास पाटिल बनाम संजय (2021) फैसले का भी सहारा लिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट का कानूनी विश्लेषण
महाराष्ट्र ग्राम पंचायत सरपंच आरक्षण नियम
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नियम 2A(4) - रोटेशन (चक्रानुक्रम) का सिद्धांत 50% महिला आरक्षण के साथ सामंजस्य
• जिस पंचायत में पिछली बार महिला आरक्षण था, • धारा 30(4)(c) और नियम 2A(4) को मिलाकर पढ़ा जाए।
उसे अगली बार रोटेशन से बाहर रखना अनिवार्य है। • रोटेशन से 50% आरक्षण का नियम प्रभावित नहीं होता।
नियम 2A(4) का विधायी इरादा स्पष्ट है
हाई कोर्ट ने नियम 2A(4) और उसके प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद कहा कि कानून की भाषा पूरी तरह स्पष्ट है। नियम का दूसरा प्रावधान यह अनिवार्य करता है कि जिन ग्राम पंचायतों में सरपंच का पद पिछले चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षित था, उन्हें तब तक अगले रोटेशन से बाहर रखा जाए जब तक कि अन्य सभी पंचायतों को रोटेशन द्वारा ऐसा अवसर न मिल जाए।
सुप्रीम कोर्ट के संजय रामदास पाटिल फैसले की अप्रासंगिकता
राज्य सरकार द्वारा पेश की गई सुप्रीम कोर्ट की नजीर को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि वह मामला मेयर के पद के आरक्षण से संबंधित था और उसमें सरपंच के चुनाव को विनियमित करने वाले नियम 2A(4) की व्याख्या शामिल नहीं थी।
6 सप्ताह में नए सिरे से आरक्षण तय करने का आदेश
अदालत ने SDO द्वारा जारी विवादित आरक्षण आदेशों को रद्द (Quash) कर दिया और कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे 6 सप्ताह के भीतर नियम 2A(4) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए विवादित सरपंच पदों को ओपन (जनरल) श्रेणी में मानते हुए नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया पूरी करें।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय निकायों में आरक्षण लागू करते समय रोटेशन (चक्रानुक्रम) के नियम का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। महिलाओं के 50% कोटे को बनाए रखने के नाम पर किसी एक ही सीट को लगातार महिला श्रेणी के लिए आरक्षित रखना कानूनी रूप से अनुचित है।

