Sunday, September 20, 2026
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MCC Violations: वोटों की गिनती जारी रहेगी, लेकिन बिना अनुमति के नतीजे घोषित नहीं होंगे…यहां पढ़ें बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनाव

MCC Violations: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के चुनावों में कथित अनियमितताओं और मतपत्रों (Ballot Papers) में हेराफेरी के आरोपों को लेकर एक महत्वपूर्ण विधिक संतुलन स्थापित किया है।

अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका

सुप्रीम कोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश (Vacation Bench) के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। देश की सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया है कि बार काउंसिल चुनाव के लिए पड़े वोटों की गिनती का काम बिना रुके जारी रह सकता है, लेकिन अदालत की अग्रिम अनुमति (Permission) के बिना अंतिम चुनाव परिणामों की घोषणा नहीं की जाएगी।

अदालत के दोबारा खुलने पर केस को सूचिबद्ध किया जाएगा

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया कि इस मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद अदालत के दोबारा खुलने (Reopening) पर सूचीबद्ध किया जाए। अंतरिम तौर पर यह निर्देश दिया जाता है कि मतपत्रों की गिनती का काम जारी रहेगा, लेकिन इस अदालत की अनुमति के बिना किसी भी परिणाम (Result) की घोषणा नहीं की जाएगी।

पृष्ठभूमि: मतपत्रों में हेराफेरी से लेकर वकीलों के निलंबन तक का पूरा विवाद

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के चुनाव इस वर्ष फरवरी में आयोजित किए गए थे, जिसके चुनाव अधिकारी (Returning Officer) दिल्ली हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस तलवंत सिंह थे। हालांकि, शुरुआत से ही यह चुनाव भारी विधिक और अनुशासनात्मक विवादों में घिरा रहा।

आचार संहिता का उल्लंघन (MCC Violations): चुनाव के दौरान 22 फरवरी को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट और इलेक्शन रूल्स, 2023 के बड़े पैमाने पर उल्लंघन के आरोप में 2 सीनियर वकीलों सहित 67 उम्मीदवारों को समरी सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया था। लगभग 79 वकीलों को नोटिस दिए गए थे, जिनमें से 63 के नोटिस स्पष्टीकरण के बाद वापस लिए गए।

रिटर्निंग ऑफिसर से बदसलूकी और हंगामा: चुनाव के दौरान पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के अध्यक्ष राजीव खोसला और 9 अन्य वकीलों को चुनाव अधिकारियों और जस्टिस तलवंत सिंह के साथ ‘हाथापाई, धक्का-मुक्की और गाली-गलौज’ करने के आरोप में बार काउंसिल से सस्पेंड कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का पिछला स्टे: 18 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को इस मामले की त्वरित सुनवाई का जिम्मा सौंपा था। मतपत्रों में हेराफेरी और छेड़छाड़ की शिकायतों के बाद, सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आने तक वोटों की गिनती पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी थी।

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट का नया रुख

दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ (जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस तेजस कारिया) ने अपना फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दोबारा चुनाव (Repolling) कराने की मांग को खारिज कर दिया था।

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य विधिक निष्कर्ष (6 जून 2026 का आदेश)

दोबारा चुनाव की जरूरत नहीं: हाई कोर्ट ने माना था कि केवल कुछ मतपत्रों में हेराफेरी (Manipulated Ballots) पाए जाने के कारण पूरे दिल्ली बार काउंसिल के चुनाव को रद्द कर नए सिरे से मतदान कराना विधिक रूप से सही नहीं है।

प्रथम वरीयता के वोट सुरक्षित: अदालत ने पाया कि कथित हेराफेरी से प्रथम वरीयता के वोटों (First-preference ballots) पर कोई असर नहीं पड़ा है, इसलिए वोटों की गिनती वहीं से शुरू की जाए जहां रोकी गई थी।

कड़े सुरक्षा उपाय: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाई कोर्ट ने सीसीटीवी (CCTV) निगरानी, हाई-resolution कैमरे, लाइव-स्ट्रीमिंग और मतपत्रों के लिए लॉकेबल स्टोरेज का आदेश दिया था। इसके अलावा, 27 संदिग्ध मतपत्रों की जांच का अंतिम जिम्मा एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) को सौंपा गया था।

विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)

विधिक बिंदुउच्चतम न्यायालय का अंतरिम निर्देश (18 जून 2026)
याचिकाकर्ताएडवोकेट रुद्र विक्रम सिंह (विशेष अनुमति याचिकाकर्ता)।
निकाय चुनावबार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनाव – फरवरी 2026।
पीठ (Coram)भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना।
विवाद का मुख्य कारणमतपत्रों में कथित हेरफेर, फर्जीवाड़ा और वकीलों का हिंसक आचरण।
हाई कोर्ट का स्टैंडदोबारा मतदान (Repolling) से इनकार, कड़ी सुरक्षा के बीच गिनती जारी रखने की अनुमति।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम विधिक मोड़गिनती जारी रहेगी ताकि प्रक्रिया पूरी हो, लेकिन नतीजे पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के अधीन (Frozen) रहेंगे।
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