CAT Adjournment : दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालतों में बढ़ते मुकदमों के बोझ और सामान्य अंतरवर्ती आदेशों (Interlocutory Orders) के खिलाफ ऊपरी अदालतों में अपील करने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है।
CAT Adjournment की ये निरर्थक याचिकाएं दैनिक बोर्ड को अनावश्यक प्रभावित करती हैं: अदालत
हाईकोर्ट के जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि ऐसी निरर्थक याचिकाएं अदालत के दैनिक बोर्ड (Docket) को अनावश्यक रूप से प्रभावित करती हैं, जिससे गंभीर मामलों की सुनवाई में बाधा आती है। अदालत ने ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (NIELIT) द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के महज एक स्थगन (Adjournment) आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करना न्यायिक समय की बर्बादी है।
विधिक पृष्ठभूमि: तबादला विवाद और तारीखों का फेरबदल
यह पूरा प्रशासनिक और कानूनी विवाद एनआईईएलआईटी (NIELIT) के एक कर्मचारी के स्थानांतरण (Transfer) से जुड़ा है।
तबादले को चुनौती: संस्थान के एक कर्मचारी, राज कुमार त्रिपाठी ने दिल्ली से औरंगाबाद (महाराष्ट्र) किए गए अपने ट्रांसफर ऑर्डर को कैट (CAT) के समक्ष चुनौती दी थी। कर्मचारी का आरोप था कि यह तबादला दुर्भावना (Mala fides) से प्रेरित है और तय समय-सीमा से पहले ही उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया।
कैट का यथास्थिति (Status Quo) आदेश: कैट ने 2 अप्रैल 2026 को इस मामले में अंतरिम राहत देते हुए दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट का पिछला निर्देश: इससे पहले यह मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा था, तब अदालत ने अधिकरण (Tribunal) से अनुरोध किया था कि वह 18 मई 2026 को अंतिम सुनवाई करे और दोनों पक्षों को निर्देश दिया था कि वे कोई स्थगन (तारीख) न मांगें। इसके बावजूद, कैट ने अंतरिम राहत को बरकरार रखते हुए मामले को 30 जून 2026 के लिए स्थगित कर दिया, जिससे नाराज होकर संस्थान (NIELIT) ने फिर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी।
CAT Adjournment को लेकर हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: जब 30 जून 2026 की तारीख तय है, तो कोर्ट क्यों आए?
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता के आचरण पर गंभीर विधिक टिप्पणियां कीं।
न्यायिक समय को व्यर्थ करने का प्रयास
डिवीजन बेंच ने तीखे शब्दों में कहा, हम यह समझने में पूरी तरह असमर्थ हैं कि जब ट्रिब्यूनल ने मामले को विशेष रूप से 30 जून 2026 के लिए सूचीबद्ध (List) किया है, और यह स्पष्ट निर्देश भी दिया है कि उस तारीख को मामला स्थगित नहीं किया जाएगा तथा अंतरिम राहत केवल उसी दिन तक जारी रहेगी, तो याचिकाकर्ता ने इस अदालत का रुख क्यों किया? ऐसी याचिकाएं, हम यह कहने के लिए मजबूर हैं, इस अदालत के डॉकेट (लंबित मुकदमों) पर बोझ डालती हैं और हमारे लिए दैनिक बोर्ड को पूरा करना कठिन बना देती हैं।
आदेश के बावजूद स्थगन मांगने पर आपत्ति
हाई कोर्ट ने इस बात पर भी नाखुशी जताई कि उसके पिछले स्पष्ट आदेश के बावजूद 20 मई 2026 को अधिकरण के समक्ष स्थगन मांगा गया था। कोर्ट ने कहा कि अदालत के निर्देशों के विपरीत जाकर तारीख मांगना पूरी तरह से ‘अनुचित’ (Improper) था।
रोस्टर और पीठ (Bench) का अधिकार क्षेत्र स्पष्ट किया
ट्रायल के दौरान यह बात सामने आई कि 18 मई को सुनवाई करने वाली पीठ ने मामले को किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित कर दिया था। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने कभी किसी विशिष्ट बेंच को सुनवाई का निर्देश नहीं दिया था। मामला नियमों के अनुसार ट्रिब्यूनल के माननीय अध्यक्ष द्वारा तय रोस्टर या असाइन की गई बेंच द्वारा ही सुना जाना चाहिए।
हाई कोर्ट का अंतिम विधिक निर्देश
हाई कोर्ट ने कैट (CAT) के आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, क्योंकि मामला पहले से ही 30 जून 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए नियत है। हालांकि, अदालत ने ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया और दोनों पक्षों को सख्त विधिक निर्देश दिए: 30 जून 2026 को अंतिम सुनवाई: अधिकरण इस तिथि को मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करे।
स्थगन पर पूर्ण रोक: किसी भी पक्ष द्वारा किसी भी आधार पर कोई स्थगन (Adjournment) नहीं मांगा जाएगा।
पास-ओवर की अनुमति नहीं: सुनवाई के दौरान मामले को आगे बढ़ाने या पास-ओवर (Pass-over) करने के किसी भी अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
CAT Adjournment : केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | दिल्ली उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (जून 2026) |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (डिवीजन बेंच) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला |
| याचिकाकर्ता संस्थान | राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) |
| मूल विवाद | सेवा विवाद / कर्मचारी स्थानांतरण (Transfer Dispute) |
| मुख्य कानूनी आपत्ति | कैट द्वारा मामले को केवल आगे स्थगित करने और अंतरिम राहत जारी रखने के खिलाफ रिट याचिका दायर करना। |
| अदालत का विधिक स्टैंड | सामान्य और अंतरवर्ती स्थगन आदेशों के खिलाफ हाई कोर्ट आना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। यह उच्च न्यायालयों का समय बर्बाद करता है। |
| अंतिम न्यायिक परिणाम | रिट याचिका का निस्तारण (Disposed); हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कैट को 30 जून 2026 को बिना किसी स्थगन के अंतिम फैसला करने का निर्देश। |

