Saturday, August 15, 2026
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She Is A Woman: पति से ज्यादा आत्मनिर्भर पत्नी की कमाई, फिर भी मांग रही गुजारा भत्ता…क्या सोचती है कि वह महिला है, यहां ऐसा न होगा, केस पढ़ें

She Is A Woman: कर्नाटक हाई कोर्ट ने पति से ज्यादा कमाने वाली आत्मनिर्भर पत्नी सिर्फ ‘महिला’ होने के नाते गुजारे भत्ते की हकदार नहीं है।

वैवाहिक विवादों में भरण-पोषण के कानून पर व्यावहारिक फैसला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में भरण-पोषण के कानून को लेकर एक बेहद संतुलित और व्यावहारिक फैसला सुनाया है। कहा, जब पत्नी आर्थिक रूप से पूरी तरह सुदृढ़ हो, उसकी आय पति से अधिक हो और उस पर बच्चों की देखरेख जैसी कोई अन्य विधिक जिम्मेदारी न हो, तो अदालतों को केवल इस लैंगिक धारणा (Gendered Assumption) के आधार पर भरण-पोषण (Maintenance) का आदेश नहीं देना चाहिए कि पुरुषों को महिलाओं का खर्च उठाना ही है।

She Is A Woman: पत्नी को ₹20,000 प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को किया रद्द

अदालत ने निचली अदालत (Trial Court) के उस आदेश को पूरी तरह रद्द (Set aside) कर दिया, जिसमें पति को अपनी पत्नी को ₹20,000 प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) देने का निर्देश दिया गया था। यह ऐतिहासिक फैसला जस्टिस डॉ. चिलाकुर सुमालता की एकल पीठ ने सुनाया है। कोर्ट को यह याद रखना चाहिए कि गुजारा भत्ता तभी दिया जाना चाहिए जब यह साबित हो कि पत्नी के पास पति के स्तर के अनुसार खुद को बनाए रखने के लिए वित्तीय स्रोत नहीं हैं।

मामला क्या है?: ₹1 लाख कमाने वाली पत्नी की ₹1.13 लाख की मांग

इस मामले के तथ्य और आंकड़े दोनों पक्षों की वित्तीय स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

संक्षिप्त वैवाहिक जीवन: याचिकाकर्ता (पति) और प्रतिवादी (पत्नी) का विवाह साल 2024 में हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों अलग हो गए। इसके बाद पत्नी ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (DV Act) के तहत मुकदमा दर्ज कराया और साथ ही ₹1,13,515 प्रति माह के अंतरिम गुजारे भत्ते की मांग की।

निचली अदालत का आदेश: ट्रायल कोर्ट ने दोनों पक्षों की आय का पूरी तरह विश्लेषण किए बिना, पति को ₹20,000 प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दे दिया। पति ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

आय का बड़ा अंतर: हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पति की मासिक आय ₹60,646 है, जबकि उसकी पत्नी की स्वीकृत (Admitted) मासिक आय ₹1,00,000 से अधिक है।

कर्ज का हवाई दावा: पत्नी ने कोर्ट में दलील दी कि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान है और उसने अपनी शादी के लिए भारी कर्ज लिया था, जिसकी EMI उसे चुकानी है। हालांकि, उसने अपनी वित्तीय संपत्ति और देनदारियों के हलफनामे (Affidavit) में इस कर्ज, बैंक लोन या EMI से जुड़ा कोई भी दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया।

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हाई कोर्ट का रुख: “केवल याचिका दायर करने से भरण-पोषण का अधिकार नहीं मिलता”

जस्टिस चिलाकुर सुमालता ने निचली अदालत के फैसले को कानूनन टिकाऊ न मानते हुए कई महत्वपूर्ण विधिक टिप्पणियां कीं:

रूढ़िवादी धारणाओं से ऊपर उठें कोर्ट: हाई कोर्ट ने पारिवारिक अदालतों को सचेत करते हुए कहा कि केवल इसलिए कि कोई महिला घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act), हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) या CrPC/BNSS की धाराओं के तहत कोर्ट पहुंचती है, अदालतें सीधे पति पर जुर्माना या भरण-पोषण नहीं थोप सकतीं।

आत्मनिर्भरता बनाम विधिक दायित्व: कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट लिखा, वर्तमान मामले में, प्रतिवादी (पत्नी) की आय याचिकाकर्ता (पति) से अधिक है। अपनी ₹1,00,000 की स्वीकृत आय के साथ वह खुद का भरण-पोषण बहुत अच्छे से कर सकती है। इसलिए, ट्रायल कोर्ट द्वारा पति को अपनी ₹60,646 की कमाई में से ₹20,000 प्रति माह देने का आदेश देने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

परिस्थितियों में बदलाव की छूट: हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल वर्तमान ‘अंतरिम’ व्यवस्था पर लागू होता है। यदि भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं (जैसे पत्नी की नौकरी जाना या कोई बड़ी विधिक जिम्मेदारी आना), तो पत्नी दोबारा नए तथ्यों के साथ अंतरिम या स्थायी भरण-पोषण के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र होगी, और निचली अदालत इस आदेश से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र फैसला ले सकेगी।

She Is A Woman: वित्तीय तुलना (Income & Claim Breakdown)

वित्तीय श्रेणियांवास्तविक आंकड़े (रुपये में)
पति की मासिक आय₹60,646 / माह
पत्नी की मासिक आय₹1,00,000 / माह (पति से लगभग 65% अधिक)
पत्नी द्वारा मांगी गई राशि₹1,13,515 / माह
ट्रायल कोर्ट द्वारा तय राशि₹20,000 / माह (जिसे हाई कोर्ट ने रद्द किया)
हाई कोर्ट का अंतिम फैसला₹0 (शून्य)। पत्नी खुद का खर्च उठाने में पूरी तरह सक्षम है।

केस मैट्रिक्स: कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांकर्नाटक उच्च न्यायालय की विधिक व्यवस्था (२०२६)
संबंधित अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय (बेंगलुरु पीठ)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस डॉ. चिलाकुर सुमालता (एकल पीठ)
साइटेशन2026 LiveLaw (Kar) 222
पति के विधिक वकीलएडवोकेट देवराज एम.
पत्नी के विधिक वकीलएडवोकेट सोमार्जुना वी.एम.
मुख्य विधिक सिद्धांतभरण-पोषण का कानून महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए है, न कि आर्थिक रूप से मजबूत पत्नी द्वारा पति को दंडित करने के लिए।
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