Saturday, August 15, 2026
HomeHigh CourtPublic Interest Litigation: स्कूल की बिल्डिंग असुरक्षित होने पर उसे बंद करना...

Public Interest Litigation: स्कूल की बिल्डिंग असुरक्षित होने पर उसे बंद करना समाधान नहीं…कमियों को ठीक करें, किस स्कूल का है मामला, पढ़ें

Public Interest Litigation: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाओं (PIL) के मूल उद्देश्य को रेखांकित करते हुए यह बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक फैसला सुनाया है।

समाज के हित में व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए PIL दायर करें: अदालत

हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा, यदि कोई स्कूल किसी गांव या ग्राम पंचायत का एकमात्र शैक्षणिक संस्थान है, तो बुनियादी ढांचे में कमी या असुरक्षित भवन के आधार पर उसकी मान्यता रद्द कर उसे बंद नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से वहां के स्थानीय बच्चों का शैक्षणिक भविष्य सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगा। समाधान स्कूल को बंद करना नहीं, बल्कि सभी हितधारकों (Stakeholders) द्वारा मिलकर उसकी कमियों को दूर करना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका का इस्तेमाल केवल दंडात्मक कार्रवाई (Punitive Action) के लिए नहीं, बल्कि समाज के हित में व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए किया जाना चाहिए।

मामला क्या है?: सरपंच-उपसरपंच ने ही मांगी थी स्कूल की बंदी

यह कानूनी मामला मध्य प्रदेश के उमरिया जिले की कोटारी ग्राम पंचायत से जुड़ा हुआ है।

सरपंच द्वारा याचिका: कोटारी पंचायत के सरपंच और उपसरपंच (मांगी बाई कोले व अन्य) ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। इसमें मांग की गई थी कि गांव में चल रहे एकमात्र प्राइवेट स्कूल ‘देवर्षि हाई स्कूल’ (Devarsi High School) की मान्यता रद्द कर उसे तुरंत बंद कर दिया जाए, क्योंकि इसमें बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

जांच समिति की खौफनाक रिपोर्ट: जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित निरीक्षण समिति और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में स्कूल की जो कमियां गिनाई गईं, वे वाकई चिंताजनक थीं। स्कूल एक फूस (थैच्ड) की छत वाली इमारत में चल रहा था, जिसकी लकड़ी की कड़ियों में दीमक लगी हुई थी और वे कभी भी गिर सकती थीं। क्लासरूम बेहद भीड़भाड़ वाले थे, ब्लैकबोर्ड खराब थे और रोशनी व बिजली की व्यवस्था असुरक्षित थी। शौचालय (Toilets) अस्थायी और अनुपयुक्त थे। पीने के पानी के लिए बच्चों को परिसर से बाहर सार्वजनिक हैंडपंप पर जाना पड़ता था। स्कूल में न तो खेल का मैदान था, न पार्किंग और न ही विषयवार पर्याप्त शिक्षक थे। यहां तक कि शिक्षकों को नकद (Cash) भुगतान किया जा रहा था।

हाई कोर्ट का रुख: “आप खुद सरपंच हैं, शिकायत करने के बजाय सुधार की जिम्मेदारी लें”

हाई कोर्ट ने माना कि स्कूल की स्थिति खराब है, लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं (सरपंच और उपसरपंच) को उनकी प्रशासनिक और सामाजिक जिम्मेदारी याद दिलाते हुए अनोखा निर्देश दिया।

बच्चों का भविष्य दांव पर: खंडपीठ ने कहा, “चूंकि देवर्षि हाई स्कूल इस ग्राम पंचायत के भीतर चालू एकमात्र स्कूल है और कोई वैकल्पिक सरकारी स्कूल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे बंद करने से स्थानीय बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। सार्वजनिक हित में रचनात्मक और समन्वित प्रयासों के माध्यम से इन कमियों को व्यवस्थित रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।”

नेताओं को विधिक फटकार: कोर्ट ने नोट किया कि याचिकाकर्ता खुद गांव के निर्वाचित प्रतिनिधि (सरपंच और उपसरपंच) हैं। अदालत ने टिप्पणी की, याचिकाकर्ता, ग्राम पंचायत कोटारी के सरपंच और उपसरपंच होने के नाते, ग्रामीणों और उनके बच्चों के लिए शिक्षा की सुविधा प्रदान करने और बेहतर नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करने का सार्वजनिक कर्तव्य (Public Duty) निभाते हैं।

PIL का रचनात्मक दृष्टिकोण: कोर्ट ने साफ कहा कि जनहित याचिका सुनते समय हाई कोर्ट रचनात्मक दृष्टिकोण अपना सकता है और शिकायतकर्ता को खुद जनहित में काम करने का निर्देश दे सकता है।

कोर्ट का अंतिम निर्देश: अब आगे क्या होगा?

हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका को पूरी तरह बंद (Dispose) करते हुए निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए हैं।

पंचायत की जनरल बॉडी मीटिंग: सरपंच और उपसरपंच को आदेश दिया गया है कि वे तुरंत ग्राम पंचायत की आमसभा (General Body Meeting) बुलाएं।

प्रस्ताव पास करने का आदेश: इस बैठक में एक औपचारिक प्रस्ताव (Resolution) पास किया जाए, जिसमें यह खाका तैयार हो कि स्थानीय निवासियों और उपलब्ध संसाधनों की सक्रिय भागीदारी से इस एकमात्र स्कूल की बुनियादी कमियों (शौचालय, पानी, भवन मरम्मत) को कैसे दूर किया जाएगा।

अदालत में रिपोर्ट: कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे स्कूल को ठीक करने के लिए उठाए गए कदमों की एक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) हलफनामे (Affidavit) के साथ कोर्ट में दाखिल करें।

केस मैट्रिक्स: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का आदेश (जून 2026)
संबंधित अदालतमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर पीठ)
माननीय खंडपीठकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल
केस का नाममांगी बाई कोले व अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य
प्रभावित संस्थानदेवर्षि हाई स्कूल, कोटारी पंचायत, उमरिया जिला (MP)
मुख्य कानूनी सिद्धांतबुनियादी ढांचे की कमी के आधार पर गांव का एकमात्र स्कूल बंद नहीं हो सकता; सुधार अनिवार्य है।
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्वअधिवक्ता मुनेंद्र सिंह और विनीता सोनी
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
79 %
4.1kmh
100 %
Sat
35 °
Sun
36 °
Mon
30 °
Tue
31 °
Wed
35 °