Monday, August 17, 2026
HomeLaworder HindiElection Process: ट्रस्ट चुनाव शुरू होने के बाद चैरिटी कमिश्नर को हस्तक्षेप...

Election Process: ट्रस्ट चुनाव शुरू होने के बाद चैरिटी कमिश्नर को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं…धारा 41A के तहत चुनावी नोटिस रद्द मामले में यहां पढ़िए

Election Process: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने सार्वजनिक ट्रस्टों के प्रशासनिक और चुनावी विवादों की सीमा रेखा तय करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

सहायक चैरिटी कमिश्नर की दी गई शक्तियां विशुद्ध रूप से प्रशासनिक प्रकृति की: अदालत

हाईकोर्ट जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस राज डी. वाकोडे की खंडपीठ ने कहा, महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1950 की धारा 41A के तहत सहायक चैरिटी कमिश्नर (Assistant Charity Commissioner) को दी गई शक्तियां विशुद्ध रूप से प्रशासनिक (Administrative) प्रकृति की हैं। एक बार जब किसी सार्वजनिक ट्रस्ट की चुनावी प्रक्रिया (Election Process) शुरू हो जाती है, तो धारा 41A के तहत उसमें हस्तक्षेप करने या चुनावी नोटिस को रद्द करने का कोई विधिक अधिकार चैरिटी कमिश्नर के पास नहीं है। अदालत ने सहायक चैरिटी कमिश्नर-II, नागपुर के उस आदेश को पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया, जिसके तहत एक सार्वजनिक ट्रस्ट के चुनाव नोटिस को अवैध घोषित कर दिया गया था।

मामला क्या है?: नागपुर के श्री दुर्गा मंदिर ट्रस्ट का चुनावी विवाद

यह पूरा कानूनी विवाद नागपुर के प्रसिद्ध सार्वजनिक ट्रस्ट ‘श्री दुर्गा मंदिर सार्वजनिक देवस्थान विश्वस्त मंडल’ के प्रबंधकीय नियंत्रण से जुड़ा है।

चुनावी नोटिस: ट्रस्ट के अध्यक्ष श्याम वसंत काले और सचिव विजय जनार्दन भट (याचिकाकर्ता) ने 29 मार्च 2026 को एक चुनावी नोटिस जारी किया, जिसके तहत प्रबंध समिति (Managing Committee) के चुनाव 24 अप्रैल 2026 को होने तय हुए थे।

चैरिटी कमिश्नर के समक्ष चुनौती: विपक्षी गुट (प्रतिवादी रामचंद्र केलापुरे और स्वाति साठे) ने इस नोटिस के खिलाफ सहायक चैरिटी कमिश्नर-II के समक्ष अधिनियम की धारा 41A के तहत एक आवेदन दायर किया। उनका आरोप था कि मौजूदा प्रबंध समिति के पास चुनाव कराने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और यह नोटिस ट्रस्ट की स्वीकृत योजना (Approved Scheme) के नियमों के खिलाफ है।

कमिशनर का विवादित आदेश: सहायक चैरिटी कमिश्नर ने चुनाव के तय दिन, यानी 24 अप्रैल 2026 को ही आदेश पारित करते हुए चुनाव नोटिस को रद्द कर दिया। साथ ही, उन्होंने 90 दिनों के भीतर नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया और तब तक मौजूदा समिति को केवल ‘केयरटेकर’ (Caretaker) के रूप में काम करने को कहा। इस आदेश के खिलाफ ट्रस्ट पदाधिकारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाई कोर्ट का रुख: प्रशासनिक शक्तियों (Section 41A) और चुनावी जांच (Section 22) में बड़ा अंतर

जस्टिस अनिल एस. किलोर ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सही ठहराते हुए चैरिटी कमिश्नर के आदेश को उनके क्षेत्राधिकार का खुला उल्लंघन माना।

‘उचित प्रशासन’ (Properly Administered) का असली दायरा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 41A के तहत “उचित प्रशासन” शब्द का अर्थ ट्रस्ट के दैनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाना है—जैसे रिकॉर्ड बनाए रखना, संपत्तियों की सुरक्षा, बैंक खातों का प्रबंधन, बजट तैयार करना, वेतन देना और वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करना। वित्तीय अनियमितता या संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए तो निर्देश जारी किए जा सकते हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रियाओं को रोकना इसके दायरे में नहीं आता।

चुनावी विवादों के लिए धारा 22 (Change Report) ही एकमात्र जरिया: खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि चुनाव वैध हैं या नहीं, मतदाता सूची सही है या नहीं, या प्रबंध समिति को चुनाव कराने का अधिकार है या नहीं—इन सभी विवादों को केवल अधिनियम की धारा 22 के तहत ‘चेंज रिपोर्ट’ (Change Report) की जांच के दौरान ही चुनौती दी जा सकती है। धारा 41A का दायरा बढ़ाकर इसे चुनावी न्यायाधिकरण (Election Tribunal) नहीं बनाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की नजीर और आदेश का अंतर्विरोध: हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले [एन. पी. पन्नूस्वामी बनाम रिटर्निंग ऑफिसर (1952)] का हवाला देते हुए दोहराया कि जब कोई विशेष कानून किसी अधिकार को लागू करने के लिए एक विशेष मंच (Special Remedy) प्रदान करता है, तो केवल उसी मंच का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कोर्ट ने कमिशनर के आदेश में अंतर्विरोध भी पकड़ा: एक तरफ कमिशनर ने मौजूदा समिति को अवैध कहा, और दूसरी तरफ उसी समिति को नए सिरे से चुनाव कराने की जिम्मेदारी भी सौंप दी।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए सहायक चैरिटी कमिश्नर-II, नागपुर के 24 अप्रैल 2026 के आदेश को पूरी तरह से निरस्त (Quashed and Set Aside) कर दिया।

केस मैट्रिक्स: बॉम्बे हाई कोर्ट (नागपुर पीठ) का फैसला (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांबॉम्बे उच्च न्यायालय (नागपुर पीठ) की विधिक व्यवस्था
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (नागपुर पीठ)
माननीय खंडपीठजस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस राज डी. वाकोडे
संबंधित ट्रस्टश्री दुर्गा मंदिर सार्वजनिक देवस्थान विश्वस्त मंडल, नागपुर
प्रासंगिक कानूनमहाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1950 की धारा 41A और धारा 22
मूल कानूनी प्रश्नक्या धारा 41A के तहत प्रशासनिक शक्तियों का उपयोग करके अर्ध-न्यायिक रूप से चुनाव प्रक्रिया को रोका जा सकता है?
अदालत का अंतिम निर्णयनहीं। चुनावी अधिसूचना जारी होने के बाद धारा 41A के तहत हस्तक्षेप गैर-कानूनी है; इसके लिए धारा 22 ही उचित मंच है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
74 %
2.1kmh
100 %
Sun
31 °
Mon
35 °
Tue
33 °
Wed
34 °
Thu
35 °