Thursday, October 1, 2026
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DHCBA News: दिल्ली हाई कोर्ट ने राजीव खोसला और 3 अन्य वकीलों के निलंबन पर लगाई रोक…बार काउंसिल ऑफ दिल्ली का क्या था आदेश यहां पढ़ें

DHCBA News: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला और तीन अन्य अधिवक्ताओं को बड़ी राहत दी है।

चुनाव अधिकारियों और पूर्व न्यायाधीश के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार का आरोप

हाईकोर्ट जस्टिस अमित बंसल की एकल पीठ ने राजीव खोसला, आरती त्यागी, अंजू दीक्षित और शाहीन मंसूरी द्वारा दायर याचिका पर यह निर्देश जारी किया।अदालत ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के उस आदेश पर रोक (Stay) लगा दी है, जिसके तहत चुनाव अधिकारियों और पूर्व न्यायाधीश के साथ कथित तौर पर “अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और गाली-गलौज” करने के आरोप में इन वकीलों को निलंबित कर दिया गया था। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने इन वकीलों के दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश करने पर लगी रोक को भी हटा दिया है।

विवाद की पृष्ठभूमि: बार काउंसिल चुनाव और ‘एस-ब्लॉक’ का हंगामा

यह पूरा विवाद दिल्ली हाई कोर्ट बार काउंसिल के हालिया चुनावों की मतगणना के दौरान हुई एक घटना से जुड़ा है।

25 अप्रैल 2026 की घटना: दिल्ली हाई कोर्ट के एस-ब्लॉक (S-Block) में बीसीडी चुनावों की मतगणना चल रही थी। आरोप है कि इस दौरान राजीव खोसला और अन्य वकीलों ने चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस तलवंत सिंह (सेवानिवृत्त न्यायाधीश), अन्य सदस्यों और मतगणना स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार किया। उन पर संसदीय मर्यादा के खिलाफ भाषा का इस्तेमाल करने और अधिकारियों को धमकाने का आरोप लगा था।

समिति का इस्तीफा और असुरक्षा: इस घटना के बाद, जस्टिस तलवंत सिंह और चुनाव समिति के अन्य सदस्यों (जो ज्यादातर सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं) ने बीसीडी को सूचित किया कि वे इस घटना से बेहद अपमानित और डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पुख्ता सुरक्षा के वे आगे वोटों की गिनती नहीं कर पाएंगे।

बीसीडी की त्वरित कार्रवाई: इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) ने 26 अप्रैल को एक कड़ा आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि इन वकीलों के “उग्र, हिंसक और अपमानजनक व्यवहार” ने हाई कोर्ट परिसर की गरिमा को ठेस पहुँचाई है, और उन्हें तुरंत प्रभाव से वकालत से निलंबित कर दिया गया।

हाई कोर्ट का रुख: ‘आजीविका के अधिकार’ की दलील

राजीव खोसला और अन्य वकीलों ने बीसीडी के इस निलंबन आदेश को तुरंत हाई कोर्ट में चुनौती दी।

प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: वकीलों ने तर्क दिया कि बार काउंसिल ने उनका पक्ष सुने बिना (Without a hearing) ही उन्हें सीधे निलंबित कर दिया, जो कि स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के पूरी तरह खिलाफ है।

आजीविका के अधिकार पर चोट: याचिका में कहा गया कि बिना किसी निष्पक्ष जांच या सुनवाई के वकालत करने पर रोक लगाना उनके संविधान प्रदत्त आजीविका के मौलिक अधिकार (Right to Livelihood) पर सीधा हमला है।

जस्टिस अमित बंसल ने दलीलों को सुनने के बाद बीसीडी के निलंबन और परिसर में प्रवेश की रोक वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। हालांकि, अदालत ने इस मामले को पूरी तरह खत्म नहीं किया है और विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख अक्टूबर 2026 तय की है।

25 अप्रैल 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट के एस-ब्लॉक का घटनाक्रम

दिल्ली हाई कोर्ट के एस-ब्लॉक (S-Block) में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनाव 2026 की मतगणना के दौरान 25 अप्रैल 2026 को भारी हंगामा और गतिरोध देखने को मिला। पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) अध्यक्ष व उम्मीदवार राजीव खोसला और उनके साथी वकीलों पर मतगणना प्रक्रिया में बाधा डालने और अधिकारियों के साथ बदसलूकी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजीव खोसला सहित कई वकीलों को अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है।

घटना का मुख्य विवरण

25 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के एस-ब्लॉक (S-Block) भवन में बीसीडी चुनाव के वोटों की गिनती की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान राजीव खोसला और उनके समर्थक वकीलों ने वहां पहुंचकर कथित रूप से हंगामा शुरू कर दिया।

गेट बंद कर स्टाफ को रोका: आरोपी वकीलों ने एस-ब्लॉक के मुख्य प्रवेश द्वार को ब्लॉक कर दिया, जिससे काउंटिंग स्टाफ (मतगणना कर्मियों) को इमारत के भीतर जाने से रोक दिया गया।

अधिकारियों से बदसलूकी और धमकी: चुनाव समिति के सदस्यों और रिटर्निंग ऑफिसर के साथ दुर्व्यवहार किया गया। आरोपों के मुताबिक, बीसीडी के मानद सचिव और चुनाव समिति के सदस्यों के रास्ते में बाधा उत्पन्न की गई, उन पर झूठे आरोप लगाए गए और उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।

मतगणना में रुकावट: इस हंगामे और अधिकारियों व स्टाफ को डराने-धमकाने के कारण मतगणना की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से बाधित हो गई।

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) की कार्रवाई

इस घटना को ‘विनाशकारी और बेहद गंभीर’ मानते हुए बार काउंसिल ऑफ दिल्ली की विशेष समिति ने 25 अप्रैल 2026 को ही आदेश पारित किया। इसके बाद 27 अप्रैल 2026 को बीसीडी के सचिव कर्नल अरुण शर्मा (सेवानिवृत्त) द्वारा एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई।

इस कार्रवाई के तहत राजीव कुमार खोसला सहित कुल 10 वकीलों/उम्मीदवारों को बार काउंसिल की रोल सूची से अंतरिम रूप से निलंबित (Interim Suspension) कर दिया गया। साथ ही, चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित होने तक उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट परिसर में प्रवेश करने से भी रोक दिया गया।

यह थे बीसीडी ओर से निलंबित मुख्य नाम

श्री राजीव कुमार खोसला (Rajiv Kumar Khosla), सुश्री शैली (Shaily Tarar), सुश्री आरती त्यागी (Aarti Tyagi), सुश्री संगीता मल्होत्रा (Sangita Malhotra), श्री रमेश चंद्र सिंह (Ramesh Chandra Singh)। इसके अलावा अंजू दीक्षित, वैभव जैन, जोनाली बिस्वास, प्रकाश चंद्र द्विवेदी और शाहीन मंसूरी जैसे वकीलों पर भी यह कार्रवाई की गई है।

केस मैट्रिक्स: दिल्ली हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांदिल्ली उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति (2026)
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली
माननीय न्यायाधीशजस्टिस अमित बंसल (एकल पीठ)
मुख्य याचिकाकर्ताएडवोकेट राजीव खोसला (पूर्व अध्यक्ष, DHCBA) व अन्य
प्रतिवादी संस्थाबार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD)
कथित पीड़ित पक्षजस्टिस तलवंत सिंह (सेवानिवृत्त) एवं चुनाव समिति
अदालत का अंतरिम निर्णयवकीलों का निलंबन और कोर्ट परिसर में प्रवेश पर लगी रोक तत्काल स्थगित (Stayed)। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।
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