Sunday, August 23, 2026
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Journalism Embarrassed:महिला अधिकारी से रंगदारी मांगने वाले कथित पत्रकार से क्यों कहा…पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त नहीं

Journalism Embarrassed: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक कथित पत्रकार द्वारा जीएसटी (GST) विभाग की महिला असिस्टेंट कमिश्नर को ब्लैकमेल करने और उनसे 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

बदनाम करने की धमकी देना और करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगना बेहद गंभीर अपराध

हाईकोर्ट के जस्टिस रत्नेश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Application) को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने टिप्पणी में कहा, “पत्रकारिता जैसे सम्मानित पेशे का इस्तेमाल किसी लोक सेवक (Public Servant) को डराने-धमकाने, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने और सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाकर अवैध वसूली (Extortion) करने के लिए एक हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता। एक महिला अधिकारी को उसके शासकीय दायित्वों का पालन करने पर बदनाम करने की धमकी देना और करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगना बेहद गंभीर अपराध है।

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मामला क्या है?: GST रजिस्ट्रेशन रिजेक्ट होने पर शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल

यह पूरा मामला शिवपुरी जिले में तैनात जीएसटी (GST) विभाग की एक महिला असिस्टेंट कमिश्नर (Assistant Commissioner) की लिखित शिकायत पर दर्ज हुआ था। अभियोजन (Prosecution) के अनुसार, घटनाक्रम इस प्रकार है।

अधूरे दस्तावेजों के कारण आवेदन रद्द: आरोपी ने शिवपुरी जीएसटी कार्यालय में एक नया जीएसटी रजिस्ट्रेशन पाने के लिए आवेदन किया था। चूंकि आवेदन के साथ वैध पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज संलग्न नहीं थे, इसलिए नियमानुसार असिस्टेंट कमिश्नर ने 18 जुलाई 2025 को उसका आवेदन निरस्त (Reject) कर दिया।

ऑफिस में धौंस और ₹20 लाख की मांग: आवेदन रद्द होने के बाद आरोपी ने खुद को एक बड़ा ‘पत्रकार’ बताते हुए महिला अधिकारी के दफ्तर में बार-बार आना शुरू किया। उसने नियमों को ताक पर रखकर जबरन रजिस्ट्रेशन जारी करने का दबाव बनाया। जब अधिकारी नहीं मानीं, तो उसने दावा किया कि रिजेक्शन के कारण उसे भारी वित्तीय नुकसान हुआ है और इसकी भरपाई के लिए उसने अधिकारी से 20 लाख रुपये की मांग की। ऐसा न करने पर उसने सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी।

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फेसबुक पर फर्जी खबरें और ₹1 करोड़ की रंगदारी

महिला अधिकारी के पैसे देने से इनकार करने पर तथाकथित पत्रकार आरोपी प्रदीप कुमार जाटव ने अपनी धमकियों को अमलीजामा पहनाना शुरू किया।

फेसबुक पोस्ट: आरोपी ने 11 दिसंबर 2025 को अपने फेसबुक अकाउंट पर महिला अधिकारी के खिलाफ मनगढ़ंत और अपमानजनक आरोपों वाली एक खबर पोस्ट की। इसके बाद 13 दिसंबर 2025 को उसने अधिकारी के निजी आवास का वीडियो/तस्वीर पोस्ट करते हुए झूठ फैलाया कि वहां ‘आर्थिक अपराध शाखा’ (EOW) ने छापा मारा है और हड़कंप मचा हुआ है।

रंगदारी की रकम बढ़ी: जब महिला अधिकारी ने इन फर्जी खबरों का विरोध किया, तो आरोपी ने ब्लैकमेलिंग का दायरा बढ़ाते हुए 1 करोड़ रुपये की मांग ठोक दी और कहा कि रकम न मिलने तक वह ऐसी ही मानहानिकारक सामग्री पोस्ट करता रहेगा।

SC/ST एक्ट में फंसाने की धमकी: जब पीड़िता ने तंग आकर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही, तो आरोपी ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के एक झूठे मामले में फंसाने की धमकी दे डाली।

हाई कोर्ट का रुख: व्हाट्सऐप चैट और केस डायरी ने खोली पोल

अदालत के समक्ष आरोपी के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल एक पत्रकार है जो केवल अधिकारी के कथित ‘गैर-कानूनी कामों’ का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रहा था और उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308 (जबरन वसूली/रंगदारी) के तहत मामला दर्ज था।

राज्य सरकार के वकील ने अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध करते हुए केस डायरी और सबूत अदालत के सामने रखे। सबूतों का अवलोकन करने के बाद जस्टिस रत्नेश कुमार गुप्ता ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, आवेदक के खिलाफ लगे आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। अभियोजन पक्ष के मामले से साफ है कि आवेदक ने न केवल अधूरे दस्तावेजों के आधार पर अपना काम जबरन करवाने की कोशिश की, बल्कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अवांछित खबरें पोस्ट करके एक लोक सेवक की गरिमा को धूमिल कर उन्हें डराने का भी प्रयास किया।

केस डायरी के अवलोकन से मिले कुछ व्हाट्सऐप चैट्स स्पष्ट रूप से शिकायतकर्ता को धमकी देने और अवैध लाभ (Unlawful Gain) कमाने के तत्वों की ओर इशारा करते हैं। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और लोक सेवकों के लिए बिना किसी डर के काम करना असंभव हो जाएगा। नतीजतन, कोर्ट ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया।

केस शीट: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट आदेश (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस रत्नेश कुमार गुप्ता (एकल पीठ)
संबंधित मामला कानूनप्रदीप कुमार जाटव बनाम मध्य प्रदेश सरकार
आरोपी पर धाराएंभारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308 (रंगदारी/extortion)
मुख्य डिजिटल साक्ष्यफेसबुक पोस्ट, वीडियो और धमकी भरे व्हाट्सऐप चैट्स (Whatsapp Chats)
अदालत का अंतिम निर्णयअग्रिम जमानत याचिका खारिज
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