IAS K Biju: केरल हाईकोर्ट ने केरल के बहुचर्चित काजू विकास निगम (KSCDC) घोटाला मामले में अदालती आदेशों की अवहेलना को लेकर नौकरशाही के रवैये पर बेहद तीखी और गंभीर टिप्पणी की है।
राज्य के उद्योग विभाग के सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के खिलाफ सुनवाई
हाईकोर्ट के जस्टिस ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ ने राज्य के उद्योग विभाग के सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के. बीजू (IAS K Biju) द्वारा दाखिल माफीनामे (Apology Affidavit) को ‘अधूरा और सशर्त’ मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने उन्हें साफ शब्दों में चेतावनी दी कि कोई भी सरकार उन्हें अदालतों के खिलाफ खड़े होने पर बचा नहीं पाएगी। अदालत ने कहा, आपका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए देश के नागरिकों की सेवा करने के लिए हुआ है, न कि सरकार के इशारे पर गैर-कानूनी काम करने के लिए। चाहे राजनीतिक आकाओं का कितना भी दबाव हो या प्रभावशाली हलकों से धमकियां मिलें, आपको निष्पक्ष रहना चाहिए। जैसा नेपोलियन ने कहा था-कायर अपनी मौत से पहले कई बार मरते हैं, लेकिन बहादुर सिर्फ एक बार।
मामला क्या है?: 2015 का काजू घोटाला और कोर्ट की अवहेलना
यह पूरा कानूनी विवाद केरल राज्य काजू विकास निगम (KSCDC) द्वारा कच्चे काजू की खरीद में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा है:
CBI जांच (2015): हाई कोर्ट के आदेश पर साल 2015 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस घोटाले की जांच शुरू की थी। सीबीआई ने निगम के पूर्व अध्यक्ष आर. चंद्रशेखरन और पूर्व प्रबंध निदेशक के.ए. रतीश समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) मांगी थी।
सरकार का बार-बार इनकार: राज्य सरकार ने तीन बार इस स्वीकृति को देने से इनकार कर दिया, जिसे हाई कोर्ट ने हर बार खारिज करते हुए आदेश पर पुनर्विचार करने को कहा।
विरोधाभासी आदेश (Contradictory Orders): 8 जुलाई को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि आईएएस अधिकारी के. बीजू ने इस मामले में दो विरोधाभासी आदेश पारित किए थे। पहले आदेश में उन्होंने मुकदमा चलाने की मंजूरी तो दी, लेकिन साथ में यह लिख दिया कि “यह मंजूरी हाई कोर्ट के आदेश पर दी जा रही है और आरोपियों के पास अपील का अधिकार सुरक्षित है।” जब कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, तो एक संशोधित आदेश जारी कर इन टिप्पणियों को हटाया गया।
जस्टिस बदरुद्दीन ने पिछली सुनवाई में कहा था कि पहला आदेश न्यायपालिका को बदनाम करने, उसका मजाक उड़ाने और उस पर हमला करने के इरादे से तैयार किया गया प्रतीत होता है, जिसके बाद अधिकारी को 10 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।
हाई कोर्ट का कड़ा रुख: अदालतें लाचार नहीं हैं
आज (10 जुलाई, 2026) जब आईएएस अधिकारी के. बीजू कोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और अपना माफीनामा दिया, तो जस्टिस बदरुद्दीन ने उनके हलफनामे की भाषा पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। “क्या आप इसे बिना शर्त माफी (Unconditional Apology) कहते हैं? आपको सावधान रहना चाहिए। यदि आपको अदालतों के खिलाफ आंदोलन करने के लिए सशक्त किया जा रहा है, तो कोई भी सरकार आपको बचा नहीं पाएगी। कोर्ट अच्छे से जानता है कि ऐसी स्थितियों से कैसे निपटना है। यह मत सोचिए कि अदालतें लाचार या शक्तिहीन हैं।”
नया हलफनामा दाखिल करने के निर्देश
अदालत ने आईएएस अधिकारी बीजू को एक नया और स्पष्ट हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि उन्हें न केवल माफी मांगनी होगी, बल्कि हलफनामे के चौथे पैराग्राफ में यह भी स्पष्ट लिखना होगा कि: “दूसरा आदेश जारी करते समय मैंने अभियोजन के रिकॉर्ड को ध्यान से देखा, अपने विवेक का इस्तेमाल (Application of mind) किया और पाया कि प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं, इसलिए यह मंजूरी जारी की गई थी।”
अन्य अधिकारियों पर भी कसता शिकंजा
इस अवमानना मामले की आंच उद्योग विभाग के प्रधान सचिव (Principal Secretary) मोहम्मद हनीश (IAS Mohammed Hanish) तक भी पहुंच गई है।स्वतंत्र रूप से काम करने की चेतावनी: कोर्ट ने आज मोहम्मद हनीश से भी उनकी भूमिका पर तीखे सवाल पूछे और पूछा कि क्या उन्होंने ही के. बीजू को ऐसे विरोधाभासी आदेश पारित करने की सलाह दी थी? कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को सचेत किया कि वे स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए बाध्य हैं, न कि सरकार की गैर-कानूनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए।
अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही: जज ने स्पष्ट किया कि वे सरकार को दोष नहीं दे रहे हैं, बल्कि उन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जिन्होंने आरोपियों के पक्ष में रुख अपनाया और उनकी मदद करने की कोशिश की।
केस शीट: केरल उच्च न्यायालय समीक्षा (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और रुख |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय, कोच्चि |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस ए. बदरुद्दीन (एकल पीठ) |
| अवमानना का सामना कर रहे अधिकारी | के. बीजू (सचिव, उद्योग विभाग) और मोहम्मद हनीश (प्रधान सचिव) |
| मूल मामला | 2015 का KSCDC काजू खरीद भ्रष्टाचार मामला (CBI जांच) |
| अदालत का मुख्य संदेश | आईएएस अधिकारियों को राजनीतिक कार्यपालिका के दबाव के आगे घुटने टेकने के बजाय लोकसेवक के रूप में स्वतंत्र कार्य करना चाहिए। |
| अंतिम निर्देश | पुराना माफीनामा खारिज; विवेक का इस्तेमाल करने की बात शामिल करते हुए नया हलफनामा दाखिल करने का आदेश। |

