Monday, August 17, 2026
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Madras High Court: जजों के 17 पर्सनल असिस्टेंट्स की नियुक्ति क्यों हुई रद्द; टेस्ट फेल करने वालों को ग्रेस पीरियड देकर पास करा दिया, पढ़ें मामला

Madras High Court: मद्रास हाईकोर्ट ने अपनी ही प्रशासनिक व्यवस्था को तगड़ा झटका देते हुए जजों के 17 पर्सनल असिस्टेंट्स (PAs) की नियुक्ति को पूरी तरह अवैध घोषित कर निरस्त कर दिया है।

टेस्ट फेल करने वाले या शून्य अंक पाने वाले उम्मीदवारों की भी नियुक्ति

हाईकोर्ट जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान रिट याचिका बनाम रजिस्ट्रार जनरल, मद्रास हाई कोर्ट व अन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि 7 जून, 2023 के सर्कुलर के तहत की गई यह पूरी भर्ती प्रक्रिया मनमानी, पक्षपातपूर्ण और मद्रास हाई कोर्ट सर्विस रूल्स के नियम 14A का खुला उल्लंघन थी। कहा, यह पूरी तरह से बेतुका (Absurd) है कि जिस भर्ती प्रक्रिया का मुख्य आधार ही स्किल टेस्ट पास करना हो, उसमें टेस्ट फेल करने वाले या शून्य अंक पाने वाले उम्मीदवारों को भी नियुक्त कर दिया गया और उन्हें टेस्ट पास करने के लिए ग्रेस पीरियड (अतिरिक्त समय) दे दिया गया। यह कदम मेरिट के आधार पर चयन करने के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देता है।

मामला क्या है?: सर्कुलर के जरिए बदले नियम और ‘जीरो’ वालों को भी दी नौकरी

यह मामला हाई कोर्ट द्वारा खुद ही शुरू की गई एक स्वतः संज्ञान (Suo-motu) याचिका का नतीजा था, जिसमें 2023 की भर्ती प्रक्रिया में हुई गंभीर विधिक गड़बड़ियों की जांच की गई।

अनिवार्य योग्यता की अनदेखी: मद्रास हाई कोर्ट सर्विस रूल्स के नियम 14A के मुताबिक, पर्सनल असिस्टेंट पद के लिए उम्मीदवारों के पास अंग्रेजी शॉर्टहैंड (Shorthand) और टाइपराइटिंग में ‘हायर ग्रेड’ (Higher Grade) की योग्यता होनी अनिवार्य है।

सर्कुलर का अवैध खेल: भर्ती के लिए जारी सर्कुलर में नियमों को अवैध रूप से शिथिल (Relax) कर दिया गया। इसमें कहा गया कि जिनके पास ‘लोअर ग्रेड’ (कम योग्यता) है, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे नियुक्ति के दो साल के भीतर अपनी अनिवार्य योग्यता हासिल कर लें।

ओपन मार्केट के युवाओं के साथ धोखा: कोर्ट ने पाया कि इस अवैध ढील के कारण केवल ‘इन-सर्विस’ (पहले से कार्यरत) उम्मीदवारों को ही अनुचित लाभ मिला, जबकि खुले बाजार (Open Market) के उन योग्य उम्मीदवारों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर कर दिया गया, जो नियम 14A के तहत भाग लेने के पात्र थे।

स्किल टेस्ट का मजाक: कोर्ट के सामने आए आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चला कि मदुरै खंडपीठ में हुए स्किल टेस्ट में गंभीर अनियमितताएं थीं। कुछ ऐसे उम्मीदवारों को भी चुन लिया गया जिन्होंने ट्रांसक्रिप्शन (अनुलेखन) टेस्ट में शून्य (0) अंक प्राप्त किए थे, और उन्हें नौकरी पर रखने के बाद स्किल टेस्ट पास करने के लिए एक साल का समय दे दिया गया।

हाई कोर्ट का रुख: यह समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) पर सीधा प्रहार है

खंडपीठ ने चयन प्रक्रिया पर बेहद तीखी टिप्पणियां करते हुए साफ किया कि नियमों से ऊपर कोई सर्कुलर नहीं हो सकता।

नियमों में मनमानी ढील देना असंवैधानिक

अदालत ने कहा कि वैधानिक सेवा नियमों (Statutory Rules) में ऐसी किसी ढील की अनुमति नहीं थी। कोर्ट ने टिप्पणी की, नियुक्ति से पहले ही एक सर्कुलर के जरिए स्थापित नियमों को शिथिल कर देना देश के युवाओं को गलत संदेश देता है। यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है और इसमें साफ तौर पर मनमानापन झलकता है।

बाद में योग्यता हासिल करना मान्य नहीं

दलीलों के दौरान यह भी कहा गया कि कुछ उम्मीदवारों ने केस पेंडिंग रहने के दौरान अब वह अनिवार्य शॉर्टहैंड टेस्ट पास कर लिया है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यदि इन्हें पद पर बने रहने की अनुमति दी गई, तो यह उन अन्य योग्य युवाओं के साथ घोर अन्याय होगा जो इस बीच पात्र हो चुके थे लेकिन उन्हें आवेदन का मौका ही नहीं मिला।

अदालत का अंतिम आदेश

मद्रास उच्च न्यायालय ने साल 2023 की भर्ती के तहत नियुक्त हुए सभी 17 पर्सनल असिस्टेंट्स की नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द (Quash) कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने हाई कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह सेवा नियमों और मेरिट के सिद्धांतों का कड़ाई से पालन करते हुए पारदर्शी तरीके से नए सिरे से चयन प्रक्रिया (Fresh Selection Process) शुरू करे।

केस मैट्रिक्स: मद्रास हाई कोर्ट का आदेश (जुलाई 2026)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांमद्रास उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय, चेन्नई
माननीय न्यायाधीशजस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार (खंडपीठ)
केस संदर्भस्वतः संज्ञान रिट याचिका बनाम रजिस्ट्रार जनरल, मद्रास हाई कोर्ट
उल्लंघन का मुख्य नियममद्रास हाई कोर्ट सर्विस रूल्स का नियम 14A और संविधान का अनुच्छेद 14
गड़बड़ी की प्रकृतिअयोग्य उम्मीदवारों को शामिल करना, स्किल टेस्ट में फेल होने और ‘0’ अंक लाने वालों को भी ग्रेस पीरियड देकर नियुक्त करना।
रजिस्ट्रार जनरल के वकीलएडवोकेट बी. विजय
प्रतिवादियों के वकीलसीनियर एडवोकेट पी.एस. रमन, एडवोकेट सी. विग्नेस्वरन और पी. वसंतकुमार
अदालत का अंतिम निर्णयसभी 17 नियुक्तियां रद्द। रजिस्ट्री को नियमों के तहत नए सिरे से भर्ती करने की अनुमति।
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