Court Room Rules: देश की सबसे बड़ी अदालत के भीतर एक याचिकाकर्ता द्वारा जजों के सामने किए गए अभद्र व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है।
बार एसोसिएशन ने कोर्ट रूम में हुई घटना की निंदा की
बार एसोसिएशन ने इस घटना की घोर निंदा करते हुए इसे “अपमानजनक और अमर्यादित” करार दिया। इसके साथ ही, SCBA ने कोर्ट रूम की लाइव कार्यवाही के वीडियो, उनकी क्लिपिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया पर सर्कुलेशन (प्रसार) को रोकने के लिए एक कठोर राष्ट्रीय गाइडलाइन (Guidelines) बनाने की पुरजोर मांग उठाई है। सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और संप्रभुता सर्वोपरि है और हर परिस्थिति में इसका सम्मान किया जाना चाहिए। न्यायिक कार्यवाही के दौरान जजों को अपशब्द कहना, कागज फेंकना या हंगामा करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। यह सीधे तौर पर न्याय प्रशासन की नींव पर प्रहार है। ऐसे आचरण से कानून के मुताबिक सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
मामला क्या है?: कोर्ट रूम में हाई-वोल्टेज ड्रामा और जजों पर कागज फेंके
यह हैरान करने वाली घटना सुप्रीम कोर्ट के एक कोर्ट रूम में नियमित सुनवाई के दौरान घटी।
जजों के सामने हंगामा: एक मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अचानक आपा खो दिया और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ (Bench) के सामने हंगामा शुरू कर दिया।
गाली-गलौज और बदसलूकी: चश्मदीदों के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने न केवल जजों के साथ तीखी बहस की, बल्कि उसने कोर्ट रूम के भीतर अभद्र भाषा और गालियों का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, उसने जजों की तरफ कानूनी कागजात और फाइलें भी उछालीं, जिससे कार्यवाही में भारी बाधा उत्पन्न हुई।
अदालत का मानवीय दृष्टिकोण: इस गंभीर अभद्र व्यवहार के बावजूद, देश की शीर्ष अदालत ने एक बेहद संवेदनशील और मानवीय रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मानसिक और शारीरिक स्थिति (Condition) को देखते हुए उसके खिलाफ कोई भी अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया और मामले को शांत किया।
कोर्ट रूम वीडियो के दुरुपयोग पर SCBA की चिंता: ‘रील्स और मीम्स’ पर रोक की मांग
यद्यपि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उसकी स्थिति के कारण माफ कर दिया, लेकिन वकीलों की शीर्ष संस्था SCBA ने इस घटना के बाद डिजिटल मीडिया पर होने वाले इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
भ्रामक क्लिपिंग्स और एडिटिंग पर अंकुश
SCBA ने चिंता जताई कि आजकल कोर्ट रूम की लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) या रिकॉर्डिंग के छोटे-छोटे हिस्सों को काटकर, उन्हें गलत संदर्भ (Context) में एडिट करके सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाता है। इससे जजों, वकीलों और पूरी न्याय व्यवस्था की छवि धूमिल होती है।
केंद्र सरकार से विधिक उपायों की मांग
बार एसोसिएशन ने केवल अदालत से ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार (Union Government) से भी अपील की है कि वह सोशल मीडिया और इंटरनेट पर न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले वीडियो के प्रसार को रोकने के लिए उचित प्रशासनिक और कानूनी उपाय (Executive and Legal Measures) तलाशे। “एसोसिएशन का मानना है कि ऐसी गाइडलाइंस बेहद जरूरी हैं ताकि कोर्ट रूम रिकॉर्डिंग्स के दुरुपयोग को रोका जा सके और न्यायपालिका के प्रति आम जनता के भरोसे (Public Confidence) को कमजोर होने से बचाया जा सके।”
केस शीट: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) आधिकारिक मांग (2026)
| प्रशासनिक और विधिक श्रेणियां | बार एसोसिएशन का रुख और विवरण |
| संबंधित विधिक संस्था | सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) |
| संबद्ध माननीय न्यायाधीश | जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे |
| घटना का मुख्य कारण | याचिकाकर्ता द्वारा जजों पर कागज फेंकना और गाली-गलौज करना। |
| न्यायालय का आदेश | याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए अवमानना (Contempt) की कार्यवाही से इनकार। |
| SCBA की मुख्य मांग | कोर्ट रूम वीडियो की रिकॉर्डिंग, क्लिपिंग, एडिटिंग और सर्कुलेशन पर सख्त गाइडलाइंस बनें। |

