Day in a Chamber: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने अब तक का सबसे सख्त एक्शन लिया है।
BCI का 17 जुलाई 2026 को जारी ऐतिहासिक 37 पन्नों के सर्कुलर
17 जुलाई 2026 को जारी अपने ऐतिहासिक 37 पन्नों के सर्कुलर में BCI ने लॉ स्टूडेंट्स और इंटर्न्स के लिए एक विशेष डिजिटल कोड ऑफ कंडक्ट निर्धारित किया है, जिसके तहत अब हर इंटर्नशिप से पहले छात्रों को एक लिखित विधिक हलफनामा (Undertaking) देना अनिवार्य होगा। कानून के छात्रों और इंटर्न्स द्वारा इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अदालती कार्यवाही और सीनियर वकीलों के चैंबर के अनुभवों को सनसनीखेज बनाकर पेश करने के बढ़ते चलन पर यह एक बड़ी सख्ती है।
बीसीआई के नियम के माध्यम से तल्खी
बीसीआई के अनुसार, अदालतों में इंटर्नशिप केवल अनुशासन, शालीनता, कानूनी रिसर्च और पेशेवर नैतिकता सीखने का माध्यम है, न कि सोशल मीडिया पर दृश्यता (Visibility) या रील्स बनाने का स्टूडियो। इंटर्न्स द्वारा ‘डे इन ए चैंबर’ (Day in a Chamber) या ‘लॉयर लाइफ’ (Lawyer Life) जैसे वीडियो पोस्ट कर अदालती कामकाज और व्यावसायिक गोपनीयता को एक ‘तमाशा’ बना दिया गया है, जिसे अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों की इंटर्नशिप तुरंत रद्द होगी और उनके कॉलेज को भी रिपोर्ट किया जाएगा।
मामला क्या है?: क्यों पड़ी इंटर्न्स पर लगाम लगाने की जरूरत?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पाया कि पिछले कुछ समय से लॉ इंटर्न्स के बीच सोशल मीडिया पर अपनी इंटर्नशिप को ‘ग्लेमराइज’ (Glamourised) करने की होड़ मची है।
‘लॉयर लाइफ’ रील्स का चलन: छात्र अदालतों के गलियारों, सीनियर के चैंबर और कोर्ट रूम के भीतर से वीडियो, रील्स और ब्लॉग्स बनाकर पोस्ट कर रहे हैं, जिससे कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
गोपनीयता का गंभीर हनन: कई मामलों में इंटर्न्स अनजाने में या व्यूज बटोरने के चक्कर में केस की फाइलों, मुवक्किलों के गोपनीय दस्तावेजों, चैंबर की रणनीतियों और कानूनी चर्चाओं की तस्वीरें या वीडियो साझा कर देते हैं।
विधिक संदर्भ (BSA, 2023): सुप्रीम कोर्ट के 2025 के एक फैसले का हवाला देते हुए BCI ने स्पष्ट किया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 132 के तहत वकील और मुवक्किल के बीच की बातचीत को पूर्ण विधिक गोपनीयता (Absolute Confidentiality) प्राप्त है। जब जांच एजेंसियां भी इस विशेषाधिकार प्राप्त बातचीत को उजागर करने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं, तो कोई भी इंटर्न, जूनियर या स्टाफ इसे सोशल मीडिया पर ड्रामा बनाकर कतई पोस्ट नहीं कर सकता।
लॉ इंटर्न्स के लिए क्या है ‘कड़ी मनाही’ (Don’ts for Law Interns)
BCI ने देश के सभी कानूनी शिक्षा केंद्रों (Centres of Legal Education) को निर्देश जारी किया है कि वे अपने छात्रों को तुरंत संवेदनशील बनाएं कि वे निम्नलिखित गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें।
‘ट्रेंडिंग’ रील्स और व्लॉग्स पर पूर्ण रोक: सोशल मीडिया पर “डे इन कोर्ट” (Day in Court), “डे इन चैंबर” (Day in Chamber), “इंटरर्नशिप रिवील” (Internship Reveal), “केस फाइल” (Case File) या “कोर्टरूम ड्रामा” जैसे शीर्षकों के साथ ऐसी कोई भी सामग्री पोस्ट नहीं की जाएगी जो अदालती कामकाज को तुच्छ (Trivialise) बनाती हो।
परिसर और गाउन का दुरुपयोग: कोर्ट रूम, कॉरिडोर, जजों के चैंबर या लॉ फर्मों के भीतर रील्स या वीडियो बनाना सख्त मना है। पेशेवर मर्यादा के विपरीत जाकर कोर्ट भवनों या वकीलों की पोशाक (Robes/Bands) में तस्वीरें या वीडियो पोस्ट नहीं किए जा सकेंगे।
सीनियर या जज के नाम का इस्तेमाल: छात्र किसी अधिवक्ता, जज, ट्रिब्यूनल, लॉ ऑफिसर या सीनियर एडवोकेट के अधीन की जा रही इंटर्नशिप का उपयोग सोशल मीडिया पर अपनी पर्सनल ब्रांडिंग या रसूख दिखाने के लिए नहीं कर सकते।
एआई और डीपफेक पर पाबंदी: इंटर्न्स द्वारा जजों, वकीलों, गवाहों या अदालती कार्यवाही को दर्शाने वाली कोई भी एआई-जनरेटेड इमेज, डीपफेक वीडियो या वॉइस क्लोन बनाना और उसे प्रसारित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
एडमिशन और इंटर्नशिप के समय ‘लिखित हलफनामा’ (Undertaking) अनिवार्य
BCI ने इस विधिक अनुशासन को सुनिश्चित करने के लिए दोहरे हलफनामे की व्यवस्था लागू की है।
एडमिशन के समय: LL.B., LL.M., Ph.D. या किसी भी डिप्लोमा लॉ कोर्स में दाखिला लेते समय छात्र को एक स्टैंडअलोन (अलग से) लिखित हलफनामा देना होगा। यह कॉलेज के सामान्य फॉर्म में छिपा हुआ नहीं होना चाहिए।
प्रत्येक इंटर्नशिप से पहले: जब भी कोई छात्र किसी कोर्ट, जज, लॉ फर्म, एडवोकेट, कॉर्पोरेट लीगल डिपार्टमेंट या कानूनी सहायता निकाय (Legal Aid Body) में इंटर्नशिप शुरू करेगा, उसे अपने कॉलेज से सिफारिश पत्र लेने से पहले एक अलग से अंडरटेकिंग देनी होगी, जो उसके विधिक अकादमिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनेगी।
लॉ कॉलेजों और सीनियर वकीलों को विधिक निर्देश
डिजिटल एथिक्स मॉड्यूल: सभी लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम में “डिजिटल एथिक्स, कोर्ट डेकोरम, कॉन्फिडेंशियलिटी एंड प्रोफेशनल रिस्पॉन्सिबिलिटी” पर एक अनिवार्य शैक्षणिक मॉड्यूल शामिल करना होगा।
रजिस्टर का रखरखाव: सभी संस्थानों को छात्रों द्वारा हस्ताक्षरित इन हलफनामों का एक आधिकारिक रजिस्टर बनाए रखना होगा।
सीनियर वकीलों की जिम्मेदारी: बार एसोसिएशनों, लॉ फर्मों और एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने चैंबर के लिए एक आंतरिक प्रोटोकॉल तैयार करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके इंटर्न्स या क्लर्क बिना स्पष्ट लिखित अनुमति के चैंबर की कोई भी गतिविधि रिकॉर्ड न कर सकें।
विधिक केस शीट: BCI लॉ इंटर्न्स सोशल मीडिया डिजिटल कोड (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की विधिक स्थिति और कड़े निर्देश |
| नियामक प्राधिकारी | बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), नई दिल्ली |
| जारी करने की तिथि | 17 जुलाई 2026 |
| मुख्य लक्षित समूह | LL.B., LL.M. और लॉ डिप्लोमा के छात्र व इंटर्न्स |
| प्रतिबंधित रील्स/व्लॉग्स | ‘Day in a Chamber’, ‘Lawyer Life’, ‘Internship Reveal’ आदि |
| संबंधित गोपनीयता कानून | भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 132 (विशेषाधिकार प्राप्त संचार) |
| उल्लंघन के परिणाम | इंटर्नशिप के अवसरों की तत्काल वापसी, कॉलेज को रिपोर्ट और विधिक अनुशासनात्मक कार्रवाई |
BCI ने एडमिशन और हर इंटर्नशिप से पहले लिखित हलफनामा अनिवार्य करके और उल्लंघन पर इंटर्नशिप वापस लेने जैसी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान कर भावी वकीलों को पहले दिन से ही पेशेवर मर्यादा का पाठ पढ़ा दिया है। अब देश के लॉ इंटर्न्स को यह समझना होगा कि उनकी असली योग्यता रील्स के व्यूज से नहीं, बल्कि कोर्ट रूम में उनके विधिक शोध (Research) और ड्राफ्टिंग की धार से आंकी जाएगी।

