Monday, October 19, 2026
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Claim Case: मरीज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा…ऐसे में CPR दे रहे डॉक्टरों से ECG रिपोर्ट मांगना चिकित्सीय रूप से बेतुका, पढ़ें केस

Claim Case: बीमा दावों को खारिज करने के लिए तकनीकी बारीकियों और असंभव शर्तों का सहारा लेने वाली कंपनियों को उत्तर दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने बेहद कड़ा संदेश दिया है।

मनिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस की बीमा मुआवजा रिजेक्ट करने का मामला

आयोग के अध्यक्ष दिव्या ज्योति जयपुरियार, सदस्य अश्वनी कुमार मेहता और हरप्रीत कौर चर्या की पीठ ने मनिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस (Manipal Cigna) की क्लेम रिजेक्शन को ‘मनमाना और अनुचित’ करार देते हुए पीड़िता और उसके दो नाबालिग बच्चों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने बीमा कंपनी को ₹14.6 लाख से अधिक का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। कहा, जब एक मरीज अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हो और डॉक्टर उसे बचाने के लिए लगातार सीपीआर (CPR) दे रहे हों, उस वक्त बीमा कंपनी द्वारा विस्तृत ईसीजी (ECG) या ट्रोपोनिन टेस्ट की मांग करना न केवल चिकित्सीय रूप से बेतुका (Medically Absurd) है, बल्कि मानवीय रूप से भी असंभव है। बीमा कंपनियां केवल तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर किसी वास्तविक क्लेम को खारिज नहीं कर सकतीं।

मामला क्या है?: कोविड महामारी, होम लोन और क्लेम रिजेक्शन की दास्तां

यह कानूनी लड़ाई अप्रैल 2021 (कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर) से शुरू हुई थी।

पृष्ठभूमि: पंकज श्रीवास्तव ने जून 2019 में ‘इंडियाबुल्स रूरल फाइनेंस’ से ₹10.57 लाख का होम लोन लिया था। लोन प्रक्रिया के दौरान ही उनसे ₹64,448 का वन-टाइम प्रीमियम लेकर ‘मनिपाल सिग्ना’ की एक ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी जोड़ी गई थी, ताकि अनहोनी की स्थिति में लोन का कर्ज परिवार पर न आए। इस पॉलिसी में ₹7 लाख क्रिटिकल इलनेस, ₹5 लाख बच्चों की शिक्षा और ₹10,000 अंतिम संस्कार के लिए तय थे।

अचानक मौत: 4 अप्रैल 2021 को पंकज को गंभीर सांस फूलने की शिकायत हुई। उन्हें अरुणा आसफ अली सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जब उन्हें कैजुअल्टी (इमरजेंसी) वॉर्ड लाया गया, तो उनकी पल्स और ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहे थे और ऑक्सीजन लेवल गंभीर रूप से गिर चुका था। डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर (CPR) और जीवन रक्षक उपाय शुरू किए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। रात 11:15 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया और डेथ समरी में मौत का कारण “सडन कार्डियक अरेस्ट” (Sudden Cardiac Arrest) दर्ज किया गया।

बीमा कंपनी का अड़ंगा: पंकज की विधवा कनक लता ने जब क्लेम किया, तो मनिपाल सिग्ना ने 18 नवंबर 2021 को इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परिवार ने कोई ईसीजी (ECG), कार्डियक एंजाइम या ट्रोपोनिन टेस्ट रिपोर्ट पेश नहीं की है जिससे साबित हो कि मौत ‘मायोकार्डियल इन्फार्क्शन’ (हार्ट अटैक) से हुई थी। कंपनी ने कुतर्क दिया कि ‘कार्डियक अरेस्ट’ उनकी पॉलिसी के तहत कवर होने वाली क्रिटिकल इलनेस की सूची में नहीं है।

उपभोक्ता फोरम का कड़ा रुख: “बीमा कंपनी की भाषा बेहद असंवेदनशील और विचित्र”

उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के सभी तकनीकी तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

डॉक्टरों से असंभव की उम्मीद नहीं: फोरम ने कहा कि गंभीर स्थिति में डॉक्टरों का पहला काम मरीज की जान बचाना होता है, न कि बीमा कंपनी के क्लेम के लिए ईसीजी मशीनें लगाना। इसके अलावा, प्राकृतिक मौत के हर मामले में पोस्टमॉर्टम अनिवार्य नहीं होता, इसलिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट न होना क्लेम रोकने का आधार नहीं बन सकता।

अस्पष्ट शर्तों का लाभ उपभोक्ता को: सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि पॉलिसी बेचते समय आम उपभोक्ताओं को ‘कार्डियक अरेस्ट’ और ‘हार्ट अटैक’ के बीच का तकनीकी अंतर नहीं समझाया जाता। बीमा अनुबंधों में किसी भी तरह की अस्पष्टता का लाभ हमेशा पॉलिसीधारक को मिलना चाहिए।

खराब व्याकरण और असंवेदनशीलता पर ₹5 लाख का अतिरिक्त जुर्माना: कोर्ट ने मनिपाल सिग्ना के रिजेक्शन लेटर की भाषा पर तीव्र आपत्ति जताई। पत्र में लिखा था— “द इंश्योर्ड मिस्टर पंकज श्रीवास्तव वर अकस्टम्ड टू डेथ” (बीमाधारक मिस्टर पंकज श्रीवास्तव मौत के आदी थे)। आयोग ने इस वाक्य को व्याकरण के लिहाज से विकृत (Grammatically Grotesque), तार्किकता से परे और एक विधवा के प्रति बेहद क्रूर व असंवेदनशील माना। इस घोर लापरवाही के लिए कोर्ट ने कंपनी पर ₹5 लाख का दंडात्मक जुर्माना लगाया, जिसे उपभोक्ता कल्याण कोष (Consumer Welfare Fund) में जमा करने का आदेश दिया गया है।

इंडियाबुल्स फाइनेंस पर भी कार्रवाई: अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस

आयोग ने होम लोन प्रदाता इंडियाबुल्स रूरल फाइनेंस (Indiabulls Rural Finance) को भी दोषी पाया। जब बीमा दावा लंबित था और विधवा महिला मानसिक तनाव से गुजर रही थी, उस दौरान इंडियाबुल्स ने लोन रिकवरी की आक्रामक प्रक्रियाएं शुरू कर दी थीं। कोर्ट ने इसे ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) माना और फाइनेंसर पर भी जुर्माना लगाया।

विधिक ऑर्डर शीट: कनक लता बनाम मनिपाल सिग्ना (उपभोक्ता फोरम – 2026)

राहत की श्रेणियांफोरम द्वारा स्वीकृत मुआवजा और निर्देश
मूल पॉलिसी लाभ (Manipal Cigna)₹12.10 लाख (₹7 लाख मृत्यु + ₹5 लाख शिक्षा फंड + ₹10,000 अंतिम संस्कार)
ब्याज दर18 नवंबर 2021 से भुगतान की तारीख तक 9% वार्षिक साधारण ब्याज
मानसिक उत्पीड़न मुआवजाबीमा कंपनी द्वारा ₹1 लाख और इंडियाबुल्स फाइनेंस द्वारा ₹1 लाख
मुकदमा खर्च (Litigation Cost)बीमा कंपनी द्वारा ₹25,000 और इंडियाबुल्स द्वारा ₹25,000
दंडात्मक जुर्मानाबीमा कंपनी की असंवेदनशील भाषा के लिए ₹5 लाख (कंज्यूमर वेलफेयर फंड में)
अंतिम समायोजन निर्देशबीमा राशि से पहले होम लोन का बकाया चुकाया जाएगा, शेष राशि विधवा को मिलेगी

उपभोक्ता सहायता हेल्पलाइन: यदि आपको या आपके किसी परिचित को बीमा क्लेम, बैंकिंग या किसी भी सेवा में ऐसी विनियामक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, तो आप अपने राज्य की उपभोक्ता हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline – 1915) पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। दिल्ली उपभोक्ता आयोग की हेल्पलाइन 1800-11-4000 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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