LADCS In Punjab: पंजाब में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के मौजूदा ढांचे के खिलाफ वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने वकील अरविंद सेठ द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने आशा व्यक्त की है कि इस मामले में “समझदार और अनुभवी लोग” (Wiser Heads) बीच का रास्ता निकालेंगे ताकि आम जनता को न्याय मिलने में बाधा न आए।
विवाद क्या है?: NALSA का LADCS मॉडल बनाम पारंपरिक लीगल एड सिस्टम
LADCS क्या है?: राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा शुरू किया गया LADCS एक ऐसा सिस्टम है जिसके तहत आपराधिक मामलों में गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के लिए स्थायी और वेतनभोगी (Salaried) वकीलों की नियुक्ति की जाती है।
बार काउंसिल का विरोध: पंजाब एंड हरियाणा की बार काउंसिल और राज्य की विभिन्न बार एसोसिएशन इस नए मॉडल का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि दशकों से ‘लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट’ के तहत पैनल वकीलों (Panel Advocates) के जरिए कानूनी सहायता दी जा रही थी, जिससे सभी वकीलों के बीच काम का समान बंटवारा होता था।
हड़ताल का प्रभाव: हड़ताल के कारण पंजाब की विभिन्न अदालतों में अदालती कामकाज प्रभावित हुआ है और मुकदमों की पैरवी अटक गई है।
हाई कोर्ट का रुख और बार एसोसिएशन का पक्ष
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: “हम उम्मीद और विश्वास करते हैं कि समझदार और अनुभवी वर्ग इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभाएगा और इस अदालत को न्यायिक स्तर पर इस मुद्दे से निपटने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।”
याचिकाकर्ता का तर्क: एडवोकेट अरविंद सेठ ने अदालत के सामने तर्क दिया कि अपनी मांगों के लिए विरोध प्रदर्शन करना एक लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन किसी को भी न्याय प्रशासन (Administration of Justice) में बाधा डालने या वादियों (Litigants) को न्याय से वंचित करने का अधिकार नहीं है।
बार एसोसिएशन का रुख: हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सूद और बार काउंसिल के सदस्यों ने पीठ से कहा कि इस मुद्दे को बार के स्तर पर ही सौहार्दपूर्ण ढंग से (Amicably) सुलझा लिया जाना चाहिए।
अगली सुनवाई: अदालत ने मामले को 23 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
केंद्रीय कानून मंत्री से मुलाकात और रोलबैक की मांग
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के बार नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात कर LADCS के मौजूदा स्वरूप की समीक्षा करने और इसे वापस लेने की मांग की है। बार काउंसिल का कहना है कि वेतनभोगी वकीलों की नियुक्ति से स्वतंत्र बार (Independent Bar) के अस्तित्व पर असर पड़ता है, जबकि कानूनी सहायता ऐसी होनी चाहिए जो वकीलों को मजबूत करे, न कि उनके अवसर छीने।
केस मैट्रिक्स: पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट
| कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलू | मामला और अदालत का रुख |
| मामले का नाम | अरविंद सेठ बनाम पंजाब राज्य व अन्य (Arvind Seth v. State of Punjab and Others) |
| संबंधित अदालत | पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय |
| माननीय न्यायाधीश | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर |
| मुख्य मुद्दा | LADCS व्यवस्था के खिलाफ वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और अदालती कामकाज में बाधा। |
| अदालत का फैसला | मामले का हल आपसी बातचीत से निकालने की उम्मीद; अगली सुनवाई 23 जुलाई को। |

