केस मैट्रिक्स: Kerala High Court Judgment on Railways OTP Authentication
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| माननीय पीठ | मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन एवं जस्टिस श्याम कुमार वी. एम. |
| याचिकाकर्ता | बहादुर शाह अनाक्कोट नासिरअली (Bahadur Shah Anakkot Nasirali) |
| प्रतिवादी | भारतीय रेलवे और IRCTC (Indian Railways & IRCTC) |
| मुख्य कानूनी मुद्दा | क्या ऑनलाइन तत्काल बुकिंग के लिए पहचान सत्यापन निजता के अधिकार का उल्लंघन है? |
| अदालत का निर्णय | नहीं; धोखाधड़ी और दलाली रोकने के लिए यह कदम वैध है। PAN को वैकल्पिक विकल्प बनाने की सिफारिश की गई। |
Railways OTP Authentication: भारतीय रेलवे और IRCTC द्वारा ऑनलाइन तत्काल (Tatkal) टिकट बुकिंग के लिए लागू किए गए आधार-आधारित OTP प्रमाणीकरण (Aadhaar-based OTP Authentication) के नियम को केरल हाईकोर्ट ने पूरी तरह वैध ठहराया है।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी. एम. की खंडपीठ ने IRCTC को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि वह आधार के साथ-साथ PAN कार्ड को भी एक वैकल्पिक सत्यापन (Alternative Option) के रूप में शामिल करने पर विचार करे। अदालत ने निजता के अधिकार (Right to Privacy) के हनन का हवाला देने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए कहा कि दलालों और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी और बल्क बुकिंग को रोकने के लिए यह कदम बिल्कुल तर्कसंगत है।
मामला क्या था?: रेलवे के नोटिफिकेशन को चुनौती
- विवादित आदेश: रेल मंत्रालय ने जून 2025 में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत IRCTC वेबसाइट और ऐप के जरिए तत्काल टिकट बुक करने के लिए यूजर का आधार OTP से लिंक/सत्यापित होना अनिवार्य किया गया था।
- याचिकाकर्ता की दलील: त्रिशूर निवासी बहादुर शाह अनाक्कोट नासिरअली ने इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के वकील एस. प्रसाद ने दलील दी कि यह नियम नागरिकों की निजता के अधिकार और सूचनात्मक स्वायत्तता (Informational Autonomy) का उल्लंघन करता है, तथा तत्काल प्रणाली की वास्तविक तकनीकी खामियों को सुधारने में विफल रहता है।
- रेलवे और IRCTC का पक्ष: भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) पी. श्रीकुमार ने पक्ष रखते हुए कहा कि यह व्यवस्था वास्तविक यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई है। फर्जी अकाउंट्स, सिंडिकेट्स और ‘बॉट’ (Automated Software) के जरिए होने वाली बल्क बुकिंग को रोकने के लिए यह ‘डिमांड-रेगुलेटिंग मैकेनिज्म’ के रूप में काम करता है।
केरल हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं
धोखाधड़ी और बल्क बुकिंग रोकने के लिए नियम न्यायसंगत
अदालत ने माना कि रेलवे का यह कदम ‘समानुपातिकता के सिद्धांत’ (Proportionality Test) पर पूरी तरह खरा उतरता है।
केरल हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: “IRCTC वेबसाइट के माध्यम से आधार प्रमाणीकरण पर जोर देने का एक ठोस औचित्य है और यह अतीत में हुए छल, हेराफेरी और बल्क बुकिंग के अनुभवों पर आधारित है। समानुपातिकता के सिद्धांत को लागू करने के बाद भी ऐसे फैसले की बुद्धिमत्ता को अनुचित नहीं ठहराया जा सकता।”
निजता का हनन नहीं और डेटा सुरक्षा
IRCTC ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि
- यह सत्यापन पूरी तरह से यूजर की सहमति से और एन्क्रिप्टेड माध्यम से होता है।
- IRCTC या रेलवे द्वारा कोई भी पहचान संख्या सहेजी (Store) नहीं जाती; सिस्टम केवल
Yes/Noकी पुष्टि प्राप्त करता है। - यह प्रक्रिया केवल एक बार (One-time exercise) करनी होती है। इसके अलावा, जो लोग ऑनलाइन सत्यापन नहीं करना चाहते, वे ऑफलाइन काउंटर से तत्काल टिकट ले सकते हैं।
PAN कार्ड को विकल्प बनाने का सुझाव
पीठ ने याचिकाकर्ता के इस सुझाव में दम पाया कि PAN कार्ड के जरिए भी वही परिणाम हासिल किया जा सकता है, क्योंकि PAN-आधारित लेनदेन में भी OTP सत्यापन शामिल होता है। इसलिए कोर्ट ने IRCTC से कहा कि वह उपयोगकर्ताओं को सत्यापन के लिए आधार या PAN में से किसी एक को चुनने का विकल्प देने पर विचार करे।
हाई कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
- याचिका खारिज: कोर्ट ने तत्काल टिकट बुकिंग में OTP प्रमाणीकरण की रेलवे की नीति को पूरी तरह सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
- IRCTC को सिफारिश: IRCTC को सुझाव दिया गया कि भविष्य में आम जनता की सुविधा के लिए PAN कार्ड को भी एक वैकल्पिक पहचान माध्यम के रूप में जोड़ा जा सकता है।

