केस मैट्रिक्स: Delhi High Court Ruling on OpenAI Copyright Dispute
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस अमित बंसल (Justice Amit Bansal) |
| याचिकाकर्ता | ANI Media Pvt Ltd |
| प्रतिवादी | OpenAI Inc. & OpenAI OpCo LLC |
| कानूनी प्रावधान | कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 52(1)(a) [Fair Dealing] |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए सार्वजनिक डेटा का उपयोग ‘फेयर डीलिंग’ है, कॉपीराइट उल्लंघन नहीं। |
OpenAI Copyright Dispute: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट कानून के चौराहे पर देश का पहला ऐतिहासिक न्यायिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने OpenAI (ChatGPT) के पक्ष में एक बड़ा अंतरिम आदेश दिया है।
समाचार एजेंसी ANI Media Pvt Ltd द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस अमित बंसल की एकल पीठ ने OpenAI के खिलाफ अंतरिम रोक (Interim Injunction) लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अपने लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट वाली सामग्री का उपयोग करना भारतीय कॉपीराइट अधिनियम के तहत ‘फेयर डीलिंग’ (Fair Dealing) के दायरे में आता है और यह कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं है।
मामला क्या था?: ANI बनाम OpenAI विवाद
- याचिकाकर्ता का दावा: न्यूज एजेंसी ANI ने 2024 में OpenAI Inc. और OpenAI OpCo LLC के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। ANI का आरोप था कि ChatGPT बिना अनुमति के उसकी कॉपीराइट खबरों और डेटा से अपने AI मॉडल को ट्रेन कर रहा है, हूबहू टेक्स्ट (Verbatim Replication) जनरेट कर रहा है, और कभी-कभी गलत खबरों (Hallucination) का स्रोत ANI को बता रहा है।
- OpenAI का पक्ष: OpenAI ने तर्क दिया कि जैसे कोई व्यक्ति किताब पढ़कर ज्ञान लेता है, वैसे ही AI का डेटा से सीखना कॉपीराइट उल्लंघन नहीं है। प्री-ट्रेनिंग डेटा भारत से बाहर विदेशी सर्वरों पर प्रोसेस होता है, और मॉडल के पास ट्रेनिंग कट-ऑफ डेट के बाद ओरिजिनल डेटा तक सीधी पहुंच नहीं होती। इसके अलावा, OpenAI ने ANI के डोमेन को पहले ही ब्लॉकलिस्ट (Exclude) कर दिया था।
- शामिल अन्य संस्थाएं: इस मामले में ‘डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन’, ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स’ और ‘इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री’ जैसी कई बड़ी मीडिया संस्थाएं भी पक्षकार थीं।
दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं
धारा 52(1)(a) के तहत ‘Fair Dealing’ का संरक्षण
भारतीय संवैधानिक इतिहास में पहली बार किसी हाई कोर्ट ने Generative AI पर ‘फेयर डीलिंग’ के सिद्धांत को लागू करते हुए जस्टिस अमित बंसल की मुख्य टिप्पणी, प्रथम दृष्टया मेरा यह मानना है कि ChatGPT के LLM को प्रशिक्षित करने के लिए ANI की मूल सामग्री को सहेजने और उसका उपयोग करने का OpenAI का कार्य कॉपीराइट अधिनियम की धारा 52(1)(a) (Fair Dealing) के अंतर्गत आता है। इसलिए, यह कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
RAG तकनीक और Outputs में अंतर
अदालत ने माना कि ChatGPT द्वारा Retrieval-Augmented Generation (RAG) तकनीक का उपयोग करके जो जवाब (Outputs) जनरेट किए जाते हैं, वे ANI की मूल सामग्री (Inputs) के समान या हूबहू नहीं हैं।
- ANI यह साबित करने में विफल रहा कि ChatGPT के रिस्पॉन्स में उसके ओरिजिनल वर्क की कोई हूबहू नकल (Memorisation or Regurgitation) हो रही है।
जनहित (Public Interest) और सुविधानुसार संतुलन (Balance of Convenience)
कोर्ट ने माना कि यदि इस स्तर पर AI कंपनी के खिलाफ कोई अंतरिम रोक लगाई जाती है, तो इससे न केवल OpenAI को, बल्कि पूरे आम जनता और वैज्ञानिक प्रगति (Public at Large) को अपूरणीय क्षति (Irreparable Injury) होगी।
हाई कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
- अंतरिम रोक खारिज: अदालत ने ANI की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें ChatGPT द्वारा उसकी खबरों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।
- ऐतिहासिक नजीर: यह फैसला भारत में जनरेटिव AI कंपनियों (जैसे Google Gemini, OpenAI, Claude आदि) के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि इससे AI अनुसंधान और ट्रेनिंग को कानूनी सुरक्षा मिली है।

