Wednesday, November 4, 2026
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Elevator Safety: लिफ्ट में सुरक्षा एक मौलिक आश्वासन…2003 के लिफ्ट हादसे में मारे गए RAW अधिकारी के परिवार को कितना मिला मुआवजा, पढ़िए

केस मैट्रिक्स: Supreme Court Verdict on Elevator Safety & Compensation

पहलूविवरण
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठजस्टिस पी. एस. नरसिम्हा एवं जस्टिस आलोक अराधे
अपीलकर्ताओटिस एलीवेटर कंपनी (इंडिया) लिमिटेड (Otis Elevator Company)
पीड़ित/मुआवजा प्राप्तकर्तास्वर्गीय विपिन हांडा (निदेशक, RAW) का परिवार
कुल मुआवजा राशि₹3,01,00000/- से अधिक (₹3.01 Crore+)
देयता का बंटवाराOTIS: 70% | MES: 25% | RAW: 5%
कानूनी सिद्धांतलिफ्ट को ‘कॉमन कैरियर’ माना जाएगा; रखरखावकर्ता पर Heightened Duty of Care लागू होगी।

Elevator Safety: शहरी जीवन में लिफ्ट और एलीवेटर्स (Elevators) की अनिवार्य भूमिका और उनमें यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा संदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के एक दुखद हादसे में मारे गए रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के निदेशक विपिन हांडा के परिजनों को ₹3.01 करोड़ से अधिक का मुआवजा देने के फैसले को बरकरार रखा है।

जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा (Justice P S Narasimha) और जस्टिस आलोक अराधे (Justice Alok Aradhe) की पीठ ने लिफ्ट निर्माता कंपनी ओटिस एलीवेटर कंपनी (इंडिया) लिमिटेड (Otis Elevator Company) की अपील को खारिज करते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा) की मुख्य व संवेदनशील टिप्पणियां

अदालत ने आधुनिक शहरीकरण में एलीवेटर्स को ‘सामान्य वाहक’ (Common Carrier) मानते हुए सुरक्षा के ऊंचे मानकों पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण वक्तव्य: अजनबी लोग एक छोटे से लोहे के डिब्बे में कदम रखते हैं, दरवाजे बंद होते हैं, और कुछ पलों के लिए वे अपनी सुरक्षा पूरी तरह से एक यांत्रिक प्रणाली के हाथों में सौंप देते हैं जिस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता… लिफ्ट में मामूली सा झटका, अचानक रुकना या कोई असामान्य आवाज असहजता को डर में बदल सकती है। यह हमें याद दिलाती है कि सुरक्षा केवल एक उम्मीद नहीं, बल्कि एक मौलिक आश्वासन (Fundamental Assurance) है जो हर लिफ्ट को प्रदान करना ही चाहिए।

जो पक्ष किसी मशीन के व्यापक रखरखाव का जिम्मा लेता है, उसका अपने उपयोगकर्ताओं के प्रति उच्च स्तर का कर्तव्य (Heightened Duty of Care) बनता है। ओटिस उस तकनीकी खराबी से अनजान नहीं था जिसके कारण हादसा हुआ। समस्या को जानने और समाधान का सुझाव देने के बावजूद उसे लागू कराने में विफल रहना सेवा में गंभीर कमी (Deficiency of Service) है।

मामला क्या था?: 2003 का हादसा और मानवीय भूल

  1. घटनाक्रम: 20 मार्च 2003 को रॉ (RAW) कार्यालय, लोधी रोड (दिल्ली) में एक बैठक समाप्त होने के बाद 46 वर्षीय निदेशक विपिन हांडा अन्य 12 अधिकारियों के साथ लिफ्ट में सवार हुए। लिफ्ट छठी और सातवीं मंजिल के बीच अटक गई।
  2. हादसे का कारण: तकनीकी समिति की जांच में पाया गया कि लिफ्ट वोल्टेज में उतार-चढ़ाव (Voltage Fluctuation) के कारण रुकी थी। बचाव कार्य के दौरान 11वीं मंजिल के मशीन रूम में किसी व्यक्ति ने ‘ब्रेक रिलीज की’ (Brake Release Key) से लिफ्ट के ब्रेक खोल दिए, जिससे लिफ्ट तेजी से नीचे गिरी और विपिन हांडा की मौत हो गई।
  3. मुआवजे के लिए याचिका: 2005 में मृतक की पत्नी रश्मि हांडा और उनके बच्चों (सृष्टि और क्षितिज) ने NCDRC का रुख किया था।

देयता और मुआवजे का बंटवारा (Responsibility Apportionment)

सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC द्वारा तय किए गए लापरवाही के प्रतिशत और जवाबदेही के बंटवारे में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

  • 70% देयता – OTIS (ओटिस): लिफ्ट को बिना स्टेबलाइजर के स्थापित करने और रखरखाव में विफलता के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया।
  • 25% देयता – MES (मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज): रखरखाव और निगरानी में चूक के लिए।
  • 5% देयता – RAW (रॉ): परिसर के अंतिम उपयोगकर्ता और पर्यवेक्षण (Oversight) में विफलता के लिए (क्योंकि तकनीकी विशेषज्ञता ओटिस के पास थी, रॉ के पास नहीं)।

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