Wednesday, November 4, 2026
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Film Mahaprabhu Jagannath: कला और रचनात्मकता पर हम फैसला नहीं सुना सकते…एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज पर फैसला सुनें

केस मैट्रिक्स: Supreme Court Decision on Film ‘Mahaprabhu Jagannath’

पहलूविवरण
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठजस्टिस बी. वी. नागरत्ना एवं जस्टिस आर. महादेवन
याचिकाकर्ताओडिशा सरकार एवं श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन
फिल्म का नाम‘महाप्रभु जगन्नाथ’ (Mahaprabhu Jagannath – Animated Film)
निर्माताओं के वकीलवरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत
मुख्य निर्णययाचिकाएं खारिज; फिल्म की रिलीज पर कोई रोक नहीं। कला व रचनात्मक स्वतंत्रता सर्वोपरि है।

Film Mahaprabhu Jagannath: सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ (Mahaprabhu Jagannath) की देशव्यापी रिलीज की अनुमति देने वाले अपने पिछले आदेश में संशोधन करने से साफ इनकार कर दिया है।

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना (Justice BV Nagarathna) और जस्टिस आर. महादेवन (Justice R Mahadevan) की पीठ ने 17 जुलाई के अपने उस आदेश में कोई भी संशोधन करने से मना कर दिया, जिसमें जगन्नाथ रथ यात्रा के समापन के बाद 28 जुलाई से फिल्म को देशभर में प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई थी। ओडिशा सरकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (Shree Jagannath Temple Administration) की आपत्तियों को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर अदालतें इस तरह की धार्मिक संवेदनाओं पर रोक लगाने लगेंगी, तो हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी तमाम कला और साहित्य पर प्रतिबंध लगाने की नौबत आ जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस बी. वी. नागरत्ना) की मुख्य और तीखी टिप्पणियां

ओडिशा के महाधिवक्ता (AG) पीतांबर आचार्य द्वारा फिल्म की काल्पनिक पटकथा और धार्मिक भावनाओं का हवाला दिए जाने पर जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने कड़ा रुख अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण वक्तव्य: यदि आप चाहते हैं तो हम एक चरम आदेश (Extreme Order) पारित कर देते हैं… हम कहेंगे कि देश में कोई रचनात्मकता नहीं होगी, कोई साहित्य नहीं होगा! अगर हम दो-तीन लोगों की रिट याचिकाओं पर ऐसी संवेदनाओं पर विचार करने लगे, तो हमें हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी हर कला और साहित्य पर प्रतिबंध लगाना पड़ेगा। रामायण और महाभारत जैसी कथाओं के हर स्थान पर अपने-अपने पुनर्कथन (Retelling) हैं और यह एनिमेटेड फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई है… हम कला पर फैसला सुनाकर नहीं बैठ सकते (We cannot sit in judgment over art)।

मामला क्या था?: फिल्म की कहानी और मंदिर प्रशासन का विरोध

  1. ओडिशा सरकार और मंदिर समिति का पक्ष: ओडिशा के महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि मंदिर प्रशासन ने फिल्म में काल्पनिक तत्वों को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के समक्ष विरोध दर्ज कराया है और राज्य सरकार ने भी केंद्र को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि एनिमेटेड फिल्म में भगवान जगन्नाथ का चित्रण श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है।
  2. फिल्म निर्माताओं का रुख: निर्माताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने स्पष्ट किया कि फिल्म में भगवान का कोई अनादर या अपमानजनक चित्रण नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “यह फिल्म एक ऐसे बच्चे की कहानी है जो भगवान से प्रार्थना करता है। यदि इसमें भगवान का अपमान होता, तो मैं इसका पक्ष लेने वाला अंतिम व्यक्ति होता।”
  3. सुप्रीम कोर्ट का सुझाव: हालांकि कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज कर दिया, लेकिन जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस महादेवन ने निर्माताओं से कहा कि यदि वे अपनी स्वेच्छा से कोई रचनात्मक बदलाव या संपादन करना चाहते हैं, तो कर सकते हैं, लेकिन अदालत इसके लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं थोपेगी।

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