वर्तमान बनाम नया कानून (Comparison Matrix)
| पहलू | पुराना नियम (2011 अधिनियम) | नया विधेयक (2026) |
| देरी पर दैनिक जुर्माना | ₹10 प्रति दिन | ₹250 प्रति दिन |
| अधिकतम जुर्माना सीमा | सीमित प्रभाव | ₹5,000 तक |
| निगरानी प्रणाली | आंशिक मैन्युअल/विभाग आधारित | एंड-टू-एंड डिजिटल और ऑटो-एस्केलेशन |
| निवारण तंत्र | विभागीय स्तर पर सीमित | दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन |
Ease of Delivery of Services: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की अध्यक्षता में दिल्ली मंत्रिमंडल ने दिल्ली (Right of Citizen to Time Bound and Ease of Delivery of Services) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी है।
यह नया कानून पुराने दिल्ली (Right of Citizen to Time Bound Delivery of Services) अधिनियम, 2011 का स्थान लेगा। इस विधेयक का उद्देश्य सरकारी सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी को नागरिकों का कानूनी अधिकार (Legal Right) बनाना है।
प्रमुख बदलाव एवं महत्वपूर्ण प्रावधान
सेवा वितरण में नए कानूनी प्रावधान
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अधिकारियों की वित्तीय जवाबदेही डिजिटल प्रणाली एवं आयोग
• अकारण देरी पर ₹250/दिन का जुर्माना • आवेदन का एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण।
(अधिकतम ₹5,000)। • 'दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन' की स्थापना।
अधिकारियों पर व्यक्तिगत और वित्तीय जुर्माना (Financial Accountability)
- 25 गुना जुर्माना बढ़ोतरी: 2011 के कानून में देरी पर ₹10 प्रतिदिन का जुर्माना था। नए विधेयक में इसे बढ़ाकर ₹250 प्रति दिन (अधिकतम ₹5,000) कर दिया गया है।
- अकारण अस्वीकृति (Unjustified Rejection): यदि कोई अधिकारी बिना पर्याप्त औचित्य के आवेदन खारिज करता है, तो उस पर ₹250 से ₹5,000 तक का एकमुश्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
- प्राकृतिक न्याय (Natural Justice): जुर्माना लगाने से पहले संबंधित अधिकारी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
पूर्ण डिजिटल डिलीवरी और ट्रैकिंग
- नागरिकों के लिए आवेदन करने से लेकर स्थिति (Status) ट्रैक करने तक की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल होगी।
- इसमें स्वचालित वृद्धि तंत्र (Automatic Escalation Mechanism) लागू होगा, ताकि तय समयसीमा से अधिक समय लगने पर मामला स्वतः वरिष्ठ अधिकारियों/प्राधिकरणों को स्थानांतरित हो जाए।
‘दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन’ का गठन
- शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक स्वतंत्र दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन (Delhi Right to Service Commission) तथा प्रत्येक सरकारी विभाग में शिकायत निवारण अधिकारियों (Grievance Redressal Authorities) की नियुक्ति की जाएगी।
आगामी कदम
वर्तमान में लगभग 560 से अधिक सरकारी सेवाएं समयबद्ध वितरण प्रणाली के अंतर्गत आती हैं। इस विधेयक को दिल्ली विधानसभा के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) में औपचारिक मंजूरी के लिए पेश किए जाने की संभावना है।

