केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक श्रेणियां | सर्वोच्च न्यायालय का आदेश (अगस्त 2026) |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय पीठ | जस्टिस बी.वी. नागरत्ना एवं जस्टिस मनमोहन |
| विषय | सैन्य प्रशिक्षण में घायल/विकलांग होकर बाहर हुए कैडेट्स (Outboarded Cadets) का पुनर्वास |
| राज्यों को सिफारिश | ‘पूर्व-सैन्यकर्मी’ (Ex-Military Personnel) कोटे में कैडेट्स को आरक्षण देने पर विचार करें। |
| वित्तीय/स्वास्थ्य राहत | ECHS सुविधा विस्तारित; ex-gratia राशि बढ़ाने हेतु 8वें वेतन आयोग को समीक्षा का निर्देश। |
| कानूनी स्थिति | RPwD Act धारा 34 (4% आरक्षण) का लाभ 40%+ विकलांगता वालों को; अन्य हेतु नई योजना का निर्देश। |
Military Cadets: सैन्य प्रशिक्षण (Military Training) के दौरान लगी चोटों या शारीरिक अक्षमता (Disability) के कारण सशस्त्र बलों से बाहर किए गए (Outboarded) कैडेट्स के कल्याण, पुनर्वास और रोजगार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और संवेदनशील रुख अपनाया है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इस स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसे कैडेट्स के लिए एक उपयुक्त योजना (Welfare Scheme) बनाने का निर्देश दिया है और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (States/UTs) से आग्रह किया है कि वे पूर्व सैनिकों (Ex-Military Personnel Quota) के कोटे में इन कैडेट्स को आरक्षण देने पर विचार करें।
मुख्य आदेश एवं सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश
राज्यों/UTs से पूर्व-सैनिकों के कोटे में आरक्षण पर विचार की अपील
अदालत ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन बाहर किए गए कैडेट्स को “पूर्व सैन्यकर्मी” (Ex-Military Personnel) श्रेणी के आरक्षण कोटे के तहत शामिल करने पर विचार करना चाहिए, ताकि आरक्षित श्रेणी के तहत उनके रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकें। कोर्ट ने उन राज्यों/UTs की सराहना की जिन्होंने पहले ही इस दिशा में कदम उठाए हैं।
RPwD अधिनियम 2016 और विशेष योजना (Special Welfare Scheme)
पीठ ने उल्लेख किया कि विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act) का लाभ शायद उन कैडेट्स को न मिल सके जिनकी बेंचमार्क विकलांगता 40% से कम है।
- 40% से कम विकलांगता वाले कैडेट्स: कोर्ट ने केंद्र से ऐसे कैडेट्स के लिए एक उपयुक्त कल्याणकारी योजना तैयार करने को कहा। अपर सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन ने इस पर निर्देश प्राप्त करने की बात कही।
- 40% या अधिक विकलांगता (Section 34): कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिनकी विकलांगता 40% या उससे अधिक है, वे सरकारी नौकरियों में दिए जाने वाले 4% विकलांगता आरक्षण के हकदार हैं और वे इसके तहत आवेदन कर सकते हैं।
‘पूर्व सैनिक’ (Ex-Servicemen) के दर्जे पर व्यावहारिक रुख
अदालत ने कैडेट्स को सीधे तौर पर ‘पूर्व सैनिक’ का आधिकारिक दर्जा दिए जाने पर व्यावहारिक रुख अपनाने की बात कही।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की टिप्पणी: “यह उम्मीद न करें कि आपको हर उद्देश्य के लिए सीधे पूर्व सैनिक कहा जाएगा। व्यावहारिक रूप से आपको ढीले तौर पर पूर्व सैनिक कहा जा सकता है, लेकिन उन अधिकारियों के बीच कुछ अंतर होना चाहिए जिन्होंने अपना प्रशिक्षण पूरा कर सेवा दी और जो प्रशिक्षण के दौरान ही बाहर हो गए। हमें कैडेट्स को व्यावहारिक लाभ देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) और पूर्व-अनुग्रह राशि (Ex-Gratia)
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी व वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा पल्ली ने प्रशिक्षण के दौरान दी जाने वाली पूर्व-अनुग्रह राशि (Ex-Gratia) में असमानता का मुद्दा उठाया।
- असमानता: एक ऑफिसर ट्रेनी (आर्मी कैडेट) को केवल ₹12,240 प्रति माह (महंगाई भत्ते सहित) मिलते हैं, जबकि एक जवान ट्रेनी/भर्ती को ₹18,000 दिए जाते हैं।
- सरकार का रुख: ASG वेंकटरमन ने कोर्ट को बताया कि आउटबोर्डेड कैडेट्स को ECHS (पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) का लाभ दे दिया गया है और जीवन भर के लिए उनके चिकित्सा खर्चों की जिम्मेदारी ली गई है।
- 8वां वेतन आयोग: केंद्र ने बताया कि गठित 8वां वेतन आयोग इस अनुग्रह राशि में वृद्धि पर विचार करेगा। प्रभावित व्यक्ति वेतन आयोग के समक्ष अपना अभ्यावेदन (Representation) प्रस्तुत कर सकते हैं।
- अदालत की आशा: जस्टिस नागरत्ना ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि चूंकि 8वां वेतन आयोग पूर्व जज (जस्टिस रंजना देसाई) की अध्यक्षता में काम कर रहा है, इसलिए अदालत आयोग से उच्च स्तर की करुणा (Higher Degree of Compassion) की उम्मीद करती है।
सब्रवाल कमेटी रिपोर्ट और हाई कोर्ट याचिकाओं पर आदेश
- सब्रवाल समिति (Sabharwal Committee): सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित रक्षा व वित्त विभागों से सब्रवाल समिति की सिफारिशों पर पुनः विचार करने और कैडेट्स के अनुकूल नीतियां बनाने को कहा है।
- हाई कोर्ट की याचिकाएं: सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस स्वतः संज्ञान मामले की लंबितता किसी भी व्यक्ति द्वारा हाई कोर्ट में दायर याचिका के आड़े नहीं आएगी। यदि इस केस की वजह से किसी की याचिका खारिज हुई थी, तो वे उसे पुनर्जीवित (Revival) कराने के लिए स्वतंत्र हैं।

