केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक बिंदु | सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही (अगस्त 2026) |
| संबंधित मामला | मंगला भीमराव बनाम महाराष्ट्र राज्य (Local Body 2-Child Policy Challenge) |
| माननीय पीठ | जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा एवं जस्टिस आलोक अराधे |
| मूल नजीर (Precedent) | जावेद बनाम हरियाणा राज्य (2003) – 3 जजों की पीठ द्वारा वैध ठहराया गया फैसला |
| मुख्य विचारणीय प्रश्न | क्या घटती जनसांख्यिकी/TFR के दौर में स्थानीय चुनावों के लिए दो-बच्चा नीति असंगत है? क्या जावेद फैसले को बड़ी पीठ को भेजा जाना चाहिए? |
| वर्तमान स्थिति | सुनवाई पूरी, आदेश सुरक्षित (Reserved) रखा गया। |
Two-Child Norm: स्थानीय निकायों (पंचायत व नगर पालिकाओं) के चुनाव लड़ने के लिए लागू ‘दो-बच्चा नीति’ (Two-Child Norm) की संवैधानिक वैधता और इस पर दिए गए लैंडमार्क फैसले पर सुप्रीम कोर्ट जल्द ही एक बड़ा फैसला सुना सकता है।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ इस बात पर फैसला सुनाएगी कि क्या 2003 के ऐतिहासिक ‘जावेद बनाम हरियाणा राज्य’ (Javed v. State of Haryana) फैसले पर पुनर्विचार (Reconsideration) की आवश्यकता है या इसे किसी बड़ी पीठ (Larger Bench) को भेजा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत तीन बच्चों के कारण अयोग्य घोषित की गई एक पूर्व सरपंच की याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए अपना निर्णय सुरक्षित (Reserved Judgment) रख लिया है।
याचिका की पृष्ठभूमि (Case Background)
- यह मामला महाराष्ट्र के काकोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।
- अयोग्यता का कारण: 13 सितंबर 2000 को लागू ‘महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959’ की धारा 14(1)(j-1) के तहत तीसरा बच्चा पैदा होने के कारण उन्हें सरपंच पद से अयोग्य ठहराया गया था।
- बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख: 5 अगस्त 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में दोनों माता-पिता के नाम का हवाला देते हुए अयोग्यता के आदेश को सही ठहराया था।
- सुप्रीम कोर्ट का स्टे: सुप्रीम कोर्ट ने 4 नवंबर 2025 को हाई कोर्ट के इस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक (Stay) लगा दी थी।
क्या है ‘जावेद बनाम हरियाणा राज्य (2003)’ निर्णय?
2003 में सुप्रीम कोर्ट की 3-न्यायाधीशों की पीठ ने ‘जावेद बनाम हरियाणा राज्य’ मामले में ‘हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994’ के उस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जो दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को स्थानीय चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराता था।
इसके अलावा, हाल ही में ‘रामजी लाल जाट बनाम राजस्थान राज्य (2024)’ मामले में भी 3-न्यायाधीशों की पीठ ने जावेद फैसले पर भरोसा करते हुए ‘राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989’ के तहत पुलिस कांस्टेबल पद के लिए दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार की अयोग्यता को सही ठहराया था।
देश भर के राज्यों का विश्लेषण (Compilation of State Laws)
मामले में न्याय मित्र (Amicus Curiae) अधिवक्ता रुक्मिणी बोबडे और याचिकाकर्ता के वकील प्रतीक बोंबार्डे ने देश भर के राज्यों में लागू दो-बच्चा नीति का एक संकलन कोर्ट के समक्ष पेश किया।
- समान दृष्टिकोण का अभाव: भारत के विभिन्न राज्यों में दो-बच्चा नीति को लेकर कोई एक समान ढांचा नहीं है।
- नीति वापस लेने वाले राज्य: 7 राज्यों ने अपने कानूनों से दो-बच्चा नियम को पूरी तरह समाप्त (Repealed) कर दिया है।
- नीति न रखने वाले राज्य: 15 राज्यों में कभी भी ऐसी कोई बाध्यकारी नीति लागू नहीं रही।
- नीति जारी रखने वाले राज्य: केवल कुछ ही राज्यों—जैसे महाराष्ट्र, असम, ओडिशा, उत्तराखंड, गुजरात और गोवा—में पंचायत व स्थानीय चुनाव लड़ने के लिए यह नियम अभी भी प्रभावी है।
टीकाकरण व प्रजनन दर (Fertility Rate): पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने ‘द इकोनॉमिस्ट’ (The Economist) पत्रिका के एक लेख का संदर्भ देते हुए भारत में घटती कुल प्रजनन दर (Declining Total Fertility Rate – TFR) पर चिंता व्यक्त की थी और वकीलों को राज्यों की मौजूदा स्थिति का चार्ट तैयार करने का निर्देश दिया था।

