केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| मामले का नाम | कुलदीप कुमार व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य |
| माननीय पीठ | CJI सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना |
| विवादित सर्कुलर | BCI का 19 जुलाई 2026 का परिपत्र (30% महिला कोटे के लिए सीटें बढ़ाना) |
| मुख्य कानूनी मुद्दा | क्या BCI बिना संसदीय संशोधन के कानून द्वारा निर्धारित बार कौंसिल की सीटों की संख्या बढ़ा सकती है? |
| अदालत का अंतरिम आदेश | केंद्र सरकार और BCI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। |
Women Advocate: राज्य बार कौंसिलों (State Bar Councils) में महिलाओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। उत्तराखंड बार कौंसिल के 10 निर्वाचित सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए BCI के जुलाई 2026 के प्रस्ताव और परिपत्र (Circular) को चुनौती दी है।
BCI का विवादित फार्मूला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा योगमाया एम.जी. बनाम केंद्र सरकार मामले में दिए गए निर्देश के तहत राज्य बार कौंसिलों में 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य किया गया है।
इसे लागू करने के लिए BCI ने 19 जुलाई 2026 को एक परिपत्र जारी किया था। अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) के तहत मतदाताओं की संख्या के आधार पर राज्य बार कौंसिलों में निर्वाचित सदस्यों की वैधानिक संख्या 15, 20 या 25 निर्धारित है। BCI ने इस संख्या को बढ़ाए बिना महिला कोटा पूरा न होने की स्थिति में अतिरिक्त सीटें (Additional Seats) जोड़ने का फार्मूला प्रस्तावित किया:
- 25 सदस्यों वाली कौंसिल में: न्यूनतम 7 महिला सदस्य अनिवार्य। (यदि चुनाव में एक भी महिला नहीं जीतती, तो कौंसिल की कुल संख्या बढ़ाकर 32 कर दी जाएगी और 7 अतिरिक्त महिलाओं को शामिल किया जाएगा)।
- 20 सदस्यों वाली कौंसिल में: न्यूनतम 6 महिला सदस्य अनिवार्य।
- 15 सदस्यों वाली कौंसिल में: न्यूनतम 4 महिला सदस्य अनिवार्य।
याचिकाकर्ताओं के मुख्य तर्क (Key Legal Arguments)
उत्तराखंड बार कौंसिल के 10 निर्वाचित सदस्यों (मुख्य याचिकाकर्ता कुलदीप कुमार व अन्य) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ध्रुव जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए:
- विधायी शक्ति का अतिक्रमण (Legislative Usurpation): याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बार कौंसिल की वैधानिक संरचना (Statutory Composition) में बदलाव केवल संसद द्वारा अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन के माध्यम से ही किया जा सकता है। BCI के पास सीटें बढ़ाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए 20% चुनाव के माध्यम से और 10% को-ऑप्शन (Co-option) के माध्यम से तय करने का फॉर्मूला सुझाया था। BCI का सीटें बढ़ाना अदालत के इस निर्देश का मनमाना उल्लंघन है।
- चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश: BCI का यह कदम फरवरी 2026 में संपन्न हुए उत्तराखंड बार कौंसिल के चुनावों के परिणामों में अवैध रूप से संशोधन करने जैसा है।
सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ताओं की मांगें
- BCI सर्कुलर को रद्द करना: 19 जुलाई के BCI परिपत्र को असंवैधानिक घोषित कर खारिज किया जाए।
- उत्तराखंड बार कौंसिल के नतीजों पर रोक: BCI को उत्तराखंड बार कौंसिल के चुनाव परिणामों को संशोधित करने या अतिरिक्त सीटें जोड़ने से रोका जाए।
- 25 से अधिक सदस्यों पर रोक: स्पष्ट किया जाए कि संसद के संशोधन या शीर्ष अदालत के विशिष्ट आदेश के बिना उत्तराखंड बार कौंसिल में 25 से अधिक निर्वाचित सदस्यों की अनुमति न दी जाए।

