Thursday, August 6, 2026
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Vande Mataram Is Sung In Madrasas: अगर मदरसों में वंदे मातरम गाया जाता है तो आसमान नहीं गिर पड़ेगा…यह मौखिक टिप्पणी ने दिया संदेश

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तपाब्रत चक्रवर्ती एवं न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन
मुख्य विषयमदरसों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी छंदों को अनिवार्य रूप से गाने के परिपत्र को चुनौती
अदालत की मुख्य टिप्पणीधार्मिक संस्थाओं/स्कूलों में राष्ट्रगीत या अन्य प्रार्थनाएं गाने से धर्म प्रभावित नहीं होता (“Heavens won’t fall”)।
वर्तमान स्थितिराज्य सरकार से हलफनामे के रूप में रिपोर्ट तलब; मामला स्थगित।

Vande Mataram Is Sung In Madrasas: मदरसों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों (Stanzas) को अनिवार्य रूप से गाए जाने के सरकारी परिपत्र (Notification) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तपाब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य द्वारा प्रस्तुत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि अगर मदरसों में वंदे मातरम गाया जाता है, तो इससे कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा।

अन्य धर्मों की बातें दोहराने से धर्म परिवर्तित नहीं होता: हाई कोर्ट

याचिकाकर्ताओं द्वारा जताई गई चिंताओं और आपत्तियों का जवाब देते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा,

कलकत्ता उच्च न्यायालय की मौखिक टिप्पणी: “आसमान नहीं गिर पड़ेगा… अगर आज मुझसे कोई ऐसा कथन कहने के लिए कहा जाए जो मेरे धर्म में नहीं है, तो क्या होगा? क्या मैं उस धर्म से बाहर का व्यक्ति बन जाऊंगा? ऐसे हजारों क्रिश्चियन स्कूल हैं जहां सभी छात्रों को ईश्वर (Lord) की प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है। तो क्या किसी विशेष समुदाय के छात्र यह पूछते हैं कि उनसे ऐसी बातें क्यों गाने के लिए कहा जा रहा है जो ईसाई धर्म में हैं?”

याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार के तर्क

  • याचिकाकर्ता का पक्ष (वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य)
    • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वंदे मातरम राष्ट्रगीत है, लेकिन इसे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों पर थोपा नहीं जा सकता।
    • उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान (National Anthem) का दर्जा राष्ट्रगीत (National Song) की तुलना में ऊंचा होता है और धार्मिक मान्यताओं के मद्देनजर इसे अनिवार्य करना गलत है।
  • संसद बहस का हवाला (वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी)
    • उन्होंने कोर्ट को बताया कि वंदे मातरम का मुद्दा पिछले साल (जुलाई 2025 में) लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक बहस का विषय रहा था, लेकिन संसद में कोई सर्वसम्मति या प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। जब संसद में प्रस्ताव पास नहीं हो सका, तो अब इसे इस तरह लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • राज्य/केंद्र सरकार का पक्ष (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज कुमार त्रिवेदी)
    • ASG त्रिवेदी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता केवल आशंकाओं (Apprehension) के आधार पर कोर्ट से स्टे/निषेधाज्ञा (Injunction) नहीं मांग सकते। उन्होंने रिपोर्ट के रूप में अपना हलफनामा और निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।

क्या किसी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई हुई है?

सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या मदरसों में इस परिपत्र का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब तक कोई दंडात्मक या आक्रामक कार्रवाई की गई है:

  • कोर्ट का सवाल: “आप एक कार्यकर्ता के रूप में इसे हमारे पास लाए हैं। क्या इस परिपत्र को सख्ती से लागू करने के लिए कोई कार्रवाई की गई है? क्या किसी ने अभी तक इसका नुकसान झेला है?”
  • याचिकाकर्ता का जवाब: “वे अभी तक इसे लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं।”
  • कोर्ट का रुख: “केवल तभी जब कोई दंडात्मक (Punitive) कार्रवाई की जाती है, आप यह तर्क दे सकते हैं कि यह अनिवार्य था और इससे कोई प्रभावित हुआ है।”

आगे की कार्रवाई

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार/प्रतिवादियों को इस मामले में अपना विस्तृत जवाब और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई को अगली तिथि तक के लिए स्थगित कर दिया है।

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