Tuesday, September 22, 2026
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सफेद कोट में भेड़िया: यौन उत्पीड़न के आरोपी मेडिकल प्रोफेसर की बहाली रद्द की…हाईकोर्ट की टिप्पणी-यदि दोषी पाया तो उसका मेडिकल लाइसेंस रद्द करें

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
संस्थान एवं आरोपीशिवमोग्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SIMS); डॉ. अश्विन हेब्बार
माननीय पीठन्यायमूर्ति डी. के. सिंह एवं न्यायमूर्ति टी. एम. नदाफ
अदालत का फैसलाप्रोफेसर की बहाली रद्द; अनुशासनात्मक जांच पूरी होने तक निलंबन बरकरार रखने का आदेश।
अन्य कड़े निर्देशNMC को दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने और आरोपी को बचाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों (निदेशक व प्रधान सचिव) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश।

सफेद कोट में भेड़िया: कर्नाटक हाईकोर्ट ने शिवमोग्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SIMS) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अश्विन हेब्बार की बहाली (Reinstatement) के प्रशासनिक आदेश को रद्द करते हुए उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति डी. के. सिंह और न्यायमूर्ति टी. एम. नदाफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान आरोपी प्रोफेसर को “सफेद कोट में भेड़िया” (A wolf in a white coat) करार दिया। डॉ. हेब्बार पर अपनी ही महिला मेडिकल छात्रों के साथ यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप हैं।

हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश और सख्त टिप्पणियां

  1. तत्काल निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई: अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी प्रोफेसर जांच प्रक्रिया पूरी होने तक निलंबित रहेगा। पीठ ने राज्य सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को त्वरित अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का निर्देश देते हुए कहा:“यदि वह दोषी पाया जाता है, तो उसका मेडिकल लाइसेंस रद्द कर दिया जाना चाहिए।”
  2. अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश: हाई कोर्ट ने आरोपी प्रोफेसर को बचाने और उसकी बहाली में मदद करने के आरोप में SIMS के निदेशक डॉ. विरुपक्ष वी. और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद मोहसिन के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
    • अदालत की टिप्पणी: “दोनों अधिकारियों ने आरोपी को बचाकर और पीड़ित छात्राओं के सम्मान व गरिमा के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन रवैया अपनाकर घोर दुराचार (Gross Misconduct) किया है।”
  3. कबीर दास के दोहे का उल्लेख: शिक्षक-छात्र संबंध के क्षरण पर दुख व्यक्त करते हुए कोर्ट ने संत कबीर दास के दोहे का जिक्र किया (जो गुरु को सर्वोच्च दर्जा देता है) और कहा:“इस मामले में शामिल गुरु जैसे लोग दोहे के पूरे अर्थ को ही उलट देते हैं। इस दौर में एक प्रोफेशनल कॉलेज में डॉ. अश्विन हेब्बार का यह दुराचार रीढ़ में सिहरन पैदा करने वाला है।”

शिकायतों और राजनीतिक प्रभाव का घटनाक्रम

  • पहली शिकायत (2022): एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने 12 अगस्त 2022 को यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, ICC के समक्ष शिकायत वापस लिए जाने के कारण हाई कोर्ट ने 19 जून 2024 को उनका शुरुआती निलंबन रद्द कर दिया था।
  • दूसरी शिकायत (2025): 19 जून 2025 को एक स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल छात्रा ने दूसरी शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद POSH (पॉश) समिति की सिफारिश पर उन्हें फिर से निलंबित कर दिया गया और गिरफ्तार भी किया गया (बाद में जमानत मिली)।
  • राजनीतिक पहुंच और बहाली: कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने राजनीतिक हस्तियों और गैर-सरकारी संगठनों के पत्रों का इस्तेमाल कर अपनी बहाली के लिए दबाव बनाया। निदेशक ने 6 अक्टूबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में आरोपी के दुराचार को छुपाते हुए उसे संस्थान के लिए “अपरिहार्य” (Indispensable) बताया।
  • गलत बहाली का आदेश: 17 नवंबर 2025 को केवल साढ़े चार महीने के निलंबन के बाद प्रधान सचिव ने बहाली का आदेश जारी कर उन्हें हावेरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में स्थानांतरित कर दिया था, जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

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