Sunday, November 8, 2026
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Integrated Law Course: पांच वर्षीय लॉ कोर्स की मंजूरी में देरी…क्योंकि निरीक्षण टीम के दौरे का शेड्यूल तय नहीं, BCI मनमाना प्रतिबंध लगाने से बचे

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
मामलाDr. Hari Shanker Mishra Law College v. Bar Council of India & Ors.
माननीय पीठन्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी (इलाहाबाद उच्च न्यायालय)
संबद्ध विश्वविद्यालयलखनऊ विश्वविद्यालय
मुख्य मुद्दाBCI द्वारा 5-वर्षीय कानून पाठ्यक्रम की अनुमति के लिए निरीक्षण में अनावश्यक प्रशासनिक देरी
अदालत का आदेशBCI को 3 महीने के भीतर निरीक्षण समिति गठित कर सत्र 2027-28 के लिए आवेदन का निस्तारण करने का निर्देश।

Integrated Law Course: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधि शिक्षा नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा लॉ कॉलेजों के आवेदनों को लंबे समय तक लंबित रखने और निरीक्षण में अनावश्यक देरी करने पर कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की एकल पीठ ने [डॉ. हरि शंकर मिश्रा लॉ कॉलेज बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया व 3 अन्य] मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि कानूनी शिक्षा के मानकों की निगरानी करने की BCI की शक्तियों का मतलब प्रशासनिक ढिलाई के कारण संस्थानों के विस्तार पर मनमाना प्रतिबंध (Embargo) लगाना नहीं है।

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उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणियां और कानूनी तर्क

  1. प्रशासनिक ढिलाई से एक पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होना ‘मनमाना’: अदालत ने BCI के इस व्यवहार को कड़ा संदेश देते हुए कहा:हाई कोर्ट की टिप्पणी: “केवल इसलिए कि एक निरीक्षण टीम किसी भी कारण से दौरे का शेड्यूल तय नहीं कर सकी, एक चल रहे कॉलेज को बहु-वर्षीय पाठ्यक्रम विस्तार के लिए पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद करने के लिए मजबूर करना, नियामक परिषद (BCI) की ओर से स्पष्ट मनमानापन (Manifest Arbitrariness) है।”
  2. 1,250 आवेदनों का बहाना खारिज: BCI ने तर्क दिया था कि 5-वर्षीय एकीकृत लॉ कोर्स (Integrated Law Course) शुरू करने के लिए लगभग 1,250 कॉलेजों ने आवेदन किया है, जिससे प्रक्रिया में समय लग रहा है। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि BCI कानूनी रूप से उचित समय सीमा के भीतर आवेदनों पर निर्णय लेने के लिए बाध्य है।
  3. 3-वर्षीय कोर्स पहले से जारी, तो इतनी देरी क्यों? कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि कॉलेज में 2012 से BCI द्वारा अनुमोदित 3-वर्षीय एलएलबी कोर्स पहले से चल रहा है और यूनिवर्सिटी ने निरीक्षण के बाद संबद्धता (Affiliation) दे रखी है। ऐसे में BCI फरवरी 2026 में जमा किए गए आवेदन पर अब तक निरीक्षण टीम गठित करने में भी नाकाम क्यों रही।

मामला क्या था?

  • याचिकाकर्ता: लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध ‘डॉ. हरि शंकर मिश्रा लॉ कॉलेज’।
  • पृष्ठभूमि: कॉलेज 2012 से 3-वर्षीय LL.B. पाठ्यक्रम चला रहा है। विश्वविद्यालय ने 2021 में NOC और जनवरी 2026 में 5-वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम के लिए संबद्धता प्रदान की।
  • विवाद: कॉलेज ने सत्र 2026-27 से 5-वर्षीय लॉ कोर्स शुरू करने के लिए फरवरी 2026 में BCI के पास आवेदन किया। बुनियादी ढांचा और सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद BCI ने महीनों तक भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) नहीं कराया, जिससे जुलाई में शुरू हुआ सत्र 2026-27 कॉलेज के हाथ से निकल गया।

उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश

  1. सत्र 2027-28 के लिए प्रक्रिया का निर्देश: चूंकि सत्र 2026-27 जुलाई में शुरू हो चुका है, इसलिए कोर्ट ने BCI को निर्देश दिया कि वह अगले शैक्षणिक सत्र 2027-2028 के लिए कॉलेज के आवेदन पर विचार करे।
  2. 3 महीने में निरीक्षण पूरा करने का आदेश: हाई कोर्ट ने BCI को आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से 3 महीने के भीतर निरीक्षण समिति (Inspection Committee) का गठन करने और पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से निपटाने का निर्देश दिया।

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