Tuesday, September 29, 2026
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Medallist Railway Employee: 20 वर्षों का लंबा इंतजार…रेलवे एथलीट की पदोन्नति वाली याचिका पर सुप्रीम अदालत का क्या रहेगा रुख, केस पढ़िए

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
याचिकाकर्तारजनी रानी (राष्ट्रीय स्तर की एथलीट, ग्रुप-डी रेलवे कर्मचारी)
संबंधित संस्थाभारतीय रेलवे (रेल मंत्रालय)
मूल विवादआउट-ऑफ-टर्न स्पोर्ट्स कोटे के तहत ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में पदोन्नति रोकना
माननीय अदालतसर्वोच्च न्यायालय (पीठ प्रमुख: CJI सूर्य कांत)
अगली सुनवाई21 अगस्त 2026

Medallist Railway Employee: राष्ट्रीय स्तर की एक एथलीट, जो 2003 से रेलवे में ‘सफाईवाला’ (ग्रुप-डी कर्मचारी) के पद पर कार्यरत हैं, पिछले दो दशकों से ग्रुप-सी स्तर पर पदोन्नति का इंतजार कर रही हैं।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा 2016 में तकनीकी आधार पर याचिका खारिज किए जाने के बाद, पीड़िता (रजनी रानी) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी अपील पर 21 अगस्त 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी। रेलवे मंत्रालय की नीति के तहत पदक विजेता कर्मचारियों को आउट-ऑफ-टर्न (Out-of-turn) पहली पदोन्नति दिए जाने का प्रावधान है, जिसके लिए वे पूरी तरह पात्र थीं।

🏃‍♀️ खिलाड़ी की उपलब्धियां और विवाद की वजह

  • खेल उपलब्धियां:
    • फरवरी 2005: 52वीं उत्तरी रेलवे एथलेटिक मीट में कांस्य पदक।
    • जुलाई 2004: 44वीं सीनियर नेशनल अंतर-राज्यीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
    • सितंबर 2004: मुंबई में ओपन नेशनल में रेलवे का प्रतिनिधित्व (चतुर्थ स्थान)।
  • पदोन्नति से इनकार का आधार: रेलवे प्रशासन ने 2005 में यह तर्क देकर उनकी पहली पदोन्नति रोक दी कि उनके द्वारा भाग ली गई 4 प्रतियोगिताओं में से एक प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर की नहीं मानी जा सकती। रजनी रानी का कहना है कि रेलवे के नियमों के तहत केवल दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी/पदक ही पदोन्नति के लिए पर्याप्त थे।

⚖️ अदालती लड़ाई का पूरा घटनाक्रम

  1. सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) का रुख (2012-2013):
    • सितंबर 2012 में CAT ने रेलवे को उनके मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन 2013 में रेलवे ने पुनः उनकी पदोन्नति खारिज कर दी।
    • इसके बाद CAT और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट दोनों ने उनकी पुनर्विचार याचिकाओं को तकनीकी आधारों पर खारिज कर दिया।
  2. सर्वोच्च न्यायालय में 10 वर्षों तक पेंडेंसी (Supreme Court Timeline):
    • नवंबर 2016: रजनी रानी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
    • 9 जनवरी 2017: न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति ए.एम. सप्रे की पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को 8 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
    • 15 मई 2018: रजिस्ट्रार कपिल मेहता ने दर्ज किया कि समय सीमा समाप्त होने के बाद भी पक्षों ने दस्तावेज दाखिल नहीं किए हैं।
    • अगस्त 2026: करीब 8 वर्षों तक मामला पेंडिंग रहने के बाद, रजनी रानी के वकील ने CJI सूर्य कांत की पीठ के समक्ष त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया। CJI ने नाराजगी व्यक्त करते हुए रजिस्ट्रार को 21 अगस्त 2026 को सुनवाई सूचीबद्ध (List) करने का आदेश दिया।

मुख्य निष्कर्ष: खेल नीति के तहत दो पदक जीतने के बावजूद और न्याय की गुहार लगाते हुए 20 साल बीत जाने के बाद भी एक राष्ट्रीय खिलाड़ी को क्लर्क/ग्रुप-सी कैडर की पदोन्नति नहीं मिल सकी है। सुप्रीम कोर्ट में अब इस 10 साल से लंबित अपील पर महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है।

यहां जानें स्पोर्ट्स कोटा और आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन

भारत में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें स्पोर्ट्स कोटा (Sports Quota) और आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (Out-of-Turn Promotion) जैसी विशेष नीतियाँ लागू करती हैं।

1. स्पोर्ट्स कोटा के तहत भर्ती (Sports Quota Recruitment)

  • आरक्षण की सीमा: केंद्रीय विभागों (जैसे रेलवे, आयकर, पुलिस/CAPF, डाक विभाग) में ग्रुप C (Group C) पदों की सीधी भर्ती में आमतौर पर 5% तक का कोटा मेधावी खिलाड़ियों के लिए आरक्षित होता है।
  • आयु सीमा में छूट: सामान्य वर्ग के खिलाड़ियों को 5 वर्ष और SC/ST वर्ग के खिलाड़ियों को 10 वर्ष तक की ऊपरी आयु सीमा में छूट मिलती है।
  • योग्यता मानदंड (Eligibility):
    1. अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं (ओलंपिक, विश्व कप, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल) में देश का प्रतिनिधित्व।
    2. सीनियर/जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में राज्य/UT का प्रतिनिधित्व या पदक जीतना।
    3. ऑल इंडिया अंतर-विश्वविद्यालय (Inter-University) प्रतियोगिताओं या ऑल इंडिया स्कूल गेम्स में भागीदारी/उत्कृष्ट प्रदर्शन।
  • प्रक्रिया: उम्मीदवारों को शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट और ट्रायल/फिटनेस टेस्ट पास करना होता है।

2. आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (Out-of-Turn Promotion Rules)

नौकरी में आने के बाद जब कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असाधारण प्रदर्शन करता है, तो उसे बिना नियमित वरिष्ठता/सेवा अवधि के समय से पहले पदोन्नति (Out-of-Turn Promotion) दी जाती है।

  • करियर सीमा: पूरे सेवा काल में एक खिलाड़ी/कोच को अधिकतम 3 आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिए जा सकते हैं।
  • पात्रता मानदंड:
    • अंतरराष्ट्रीय पदक: ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल (CWG), एशियन गेम्स या वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतने पर।
    • राष्ट्रीय रिकॉर्ड: नेशनल गेम्स में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड (Record-Breaking Performance) बनाने पर।
    • टीम खेल (Team Events): खिलाड़ी का कम से कम 50% मैच खेलना अनिवार्य है (रिजर्व खिलाड़ियों को यह लाभ नहीं मिलता)।
  • कोच (Coaches) के लिए नियम: यदि किसी सरकारी कर्मचारी (कोच) का प्रशिक्षित खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय पदक जीतता है, तो कोच भी पदोन्नति का पात्र होता है (करियर में अधिकतम 2 बार)।
  • पद अपग्रेडेशन: इस पदोन्नति के लिए अलग से नया पद नहीं सृजित किया जाता, बल्कि खिलाड़ी के मौजूदा पद को व्यक्तिगत तौर पर (Personal to the officer) अपग्रेड कर दिया जाता है।
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