Arbitration Reality: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) क्लॉज में ‘Can’ (कर सकते हैं) शब्द का इस्तेमाल एक अनिवार्य समझौता नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने स्पष्ट किया कि आर्बिट्रेशन एग्रीमेंट तभी लागू होता है जब उसमें पार्टियों की स्पष्ट प्रतिबद्धता (Obligation) दिखे। यदि क्लॉज में ‘Can’ या ‘May’ जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है, तो विवाद होने पर दोनों पार्टियों की नई सहमति (Fresh Consent) अनिवार्य होगी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की भाषा भविष्य में केवल एक ‘संभावना’ को दर्शाती है, न कि एक बाध्यकारी दायित्व को।
विवाद की जड़: Can’ बनाम ‘Shall
- मामला: एल्युमिनियम फॉयल बनाने वाली कंपनी ‘नाग्रीका इंडकॉन’ और ‘कार्गोकेयर लॉजिस्टिक्स’ के बीच माल की डिलीवरी और भुगतान को लेकर विवाद हुआ था।
- विवादित क्लॉज: बिल ऑफ लैडिंग के क्लॉज 25 में लिखा था— “विवादों को भारत में आर्बिट्रेशन द्वारा निपटाया जा सकता है (Can be settled)।”
- कोर्ट का तर्क: कोर्ट ने कहा कि ‘Can’ शब्द केवल एक इच्छा या भविष्य की संभावना को बताता है। यह किसी भी पक्ष को जबरन आर्बिट्रेशन में घसीटने का अधिकार नहीं देता।
अनिवार्य समझौते की शर्तें
- सुप्रीम कोर्ट ने जगदीश चंद्र बनाम रमेश चंद्र (2007) मामले के मिसाल का हवाला देते हुए कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत तय किए।
- अनिवार्यता: आर्बिट्रेशन के लिए पार्टियों के बीच एक स्पष्ट “बाध्यकारी दायित्व” होना चाहिए।
- उपयुक्त शब्द: कमर्शियल एग्रीमेंट में अगर आप आर्बिट्रेशन को अनिवार्य बनाना चाहते हैं, तो ‘Shall’ सबसे उपयुक्त शब्द है, जो एक आदेश या जनादेश (Mandate) का संकेत देता है।
- सिविल कोर्ट का विकल्प: यदि क्लॉज वैकल्पिक है (‘Can’), तो पीड़ित पक्ष के पास सिविल कोर्ट जाने का विकल्प खुला रहता है।
पार्टी ऑटोनॉमी (Party Autonomy) और शब्दों का चयन
- कोर्ट ने अनुबंध की व्याख्या (Contractual Interpretation) पर जोर देते हुए कई चीजों को विस्तार से समझाया।
- लैटिन सिद्धांत: ‘Ex praecedentibus et consequentibus optima fit interpretatio’— यानी किसी भी शब्द की व्याख्या उसके संदर्भ और पूरी संविदा के आधार पर होनी चाहिए।
- लिखित शब्द ही आधार है: पार्टियों ने जो शब्द चुने हैं, वही उनकी असली नीयत का प्रमाण हैं। अगर पार्टियों ने ‘Can’ लिखा है, तो कोर्ट अपनी तरफ से उस पर ‘अनिवार्यता’ नहीं थोप सकता।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| शब्द | कानूनी व्याख्या (SC के अनुसार) | प्रभाव |
| Can / May | विवेकाधीन (Discretionary) | दोनों पक्षों की सहमति के बिना आर्बिट्रेशन बाध्यकारी नहीं। |
| Shall / Must | अनिवार्य (Mandatory) | विवाद होने पर आर्बिट्रेशन में जाना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। |
| अधिकार क्षेत्र | आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल | इसकी शक्ति केवल पार्टियों की ‘आपसी सहमति’ से आती है। |
अनुबंध लिखते समय सावधानी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन सभी व्यवसायों और कानूनी सलाहकारों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो ड्राफ्टिंग में ढीले शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपका विवाद केवल आर्बिट्रेशन से ही सुलझे, तो क्लॉज में ‘Shall’ का उपयोग करें। ‘Can’ लिखने का मतलब है कि आप दूसरे पक्ष को कोर्ट जाने का रास्ता खुला दे रहे हैं।

