Wednesday, November 4, 2026
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Faith & Well-being: मंदिर सभी को मानसिक शांति देता है…फिर इसे हटा क्यूं रहे हैं, याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख की पेनाल्टी लगी, जानें

Faith & Well-being: मद्रास हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें एक पार्क और खेल के मैदान के लिए आरक्षित जमीन से मंदिर हटाने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णन रामासामी की बेंच ने थिरुवेरकाडु (Veeraraghavapuram) के एक लेआउट में बने मंदिर के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक कल्याण है, और मंदिर इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। कोर्ट ने न केवल इस याचिका को “दुर्भावनापूर्ण” (Malafide) बताया, बल्कि याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख का भारी जुर्माना भी लगाया।

कोर्ट का तर्क: मंदिर = मानसिक स्वास्थ्य

  • अदालत ने ‘पार्क’ और ‘मंदिर’ के बीच एक गहरा संबंध स्थापित किया।
  • विश्राम का साधन: कोर्ट ने कहा कि जिस तरह पार्क शारीरिक आराम और मनोरंजन के लिए है, उसी तरह मंदिर में पूजा करना और देवता की आराधना करना मानसिक शांति (Mental Well-being) का एक जरिया है।
  • पार्क का अटूट हिस्सा: जस्टिस रामासामी ने कहा, “किसी भी कीमत पर, मंदिर को पार्क का एक अभिन्न हिस्सा (Part and parcel) माना जाना चाहिए, क्योंकि यह लोगों के मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है।”

50 साल पुराना अस्तित्व और जनहित

  • याचिकाकर्ता का दावा था कि पार्क की जमीन पर मंदिर का निर्माण एक ‘अतिक्रमण’ है। इस पर कोर्ट ने गौर किया।
  • देरी का सवाल: यह मंदिर पिछले 5 दशकों (50 साल) से अधिक समय से वहां मौजूद है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय तक कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई गई?
  • बहुमत की इच्छा: मंदिर का निर्माण लेआउट के अधिकांश निवासियों की इच्छा से किया गया था। कोर्ट ने कहा कि केवल ‘अतिक्रमण’ के आरोप में आम जनता की आस्था और विश्वास को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती।
  • पर्याप्त जगह: अधिकारियों ने बताया कि मंदिर केवल जमीन के एक छोटे हिस्से पर है, बाकी हिस्से को अब भी पार्क और खेल के मैदान के रूप में विकसित किया जा सकता है।

याचिका के पीछे “मदद की जगह मकसद” पर सवाल

  • अदालत ने याचिकाकर्ता की नीयत पर सख्त टिप्पणी की।
  • सांप्रदायिक दंगों की आशंका: कोर्ट ने पाया कि यह याचिका सांप्रदायिक अशांति पैदा करने के इरादे से और ‘प्रेरित’ (Motivated) होकर दाखिल की गई प्रतीत होती है।
  • भारी जुर्माना: अदालत का समय बर्बाद करने और दुर्भावनापूर्ण याचिका के लिए याचिकाकर्ता को 4 सप्ताह के भीतर ‘तमिलनाडु कानूनी सेवा प्राधिकरण’ को ₹1,00,000 भुगतान करने का आदेश दिया गया।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
क्षेत्रवीरराघवनपुरम, थिरुवेरकाडु (तमिलनाडु)।
विवादपार्क/प्लेग्राउंड के लिए आरक्षित जमीन पर मंदिर का होना।
कोर्ट का आदेशमंदिर को पार्क का ही हिस्सा माना गया; याचिका खारिज।
जुर्माना₹1,00,000 (समय पर न देने पर वसूली की कार्यवाही होगी)।

आस्था और शहरी नियोजन का संतुलन

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि शहरी नियोजन (Urban Planning) के नियमों को कठोरता से लागू करते समय सामाजिक वास्तविकता और जन-आस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ‘मानसिक स्वास्थ्य’ को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखते हुए मंदिर को केवल एक ‘ढांचा’ नहीं, बल्कि समुदाय के कल्याण का केंद्र माना है।

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