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Bankey Bihari Temple Case: अमीर लोगों के लिए भगवान को एक सेकंड भी आराम नहीं करने देते…विशेष पूजा पर यह टिप्पणी सभी भक्तों के लिए

Bankey Bihari Temple Case: सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के धार्मिक रीति-रिवाजों और वर्तमान व्यवस्था में किसी भी तरह के “संरचनात्मक बदलाव” (Structural Changes) से फिलहाल इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमालिया बागची की बेंच ने मंदिर की प्रबंधन समिति और सेवायत (पुजारी) गोस्वामी समाज की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है ताकि सभी पक्ष ‘स्टेटस रिपोर्ट’ पर अपना जवाब दे सकें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं और प्रबंधन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

विवाद का मुख्य कारण (The Core Conflict)

  • HPC बनाम परंपरा: इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज अशोक कुमार की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने कुछ ऐसे प्रशासनिक फैसले लिए हैं, जिन्हें सेवायतों ने मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप माना है।
  • अध्यादेश पर रोक: यूपी सरकार ने मंदिर का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए ‘श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025’ जारी किया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है।

सेवायतों की प्रमुख आपत्तियां

  • याचिकाकर्ताओं (सेवायत गोस्वामी समाज) ने HPC के इन फैसलों को चुनौती दी है।
  • दर्शन का समय: मंदिर में दशकों से मौसम (सर्दी-गर्मी) के अनुसार भगवान के जागने और सोने का समय तय है। हालिया बदलावों से इन रीतियों में खलल पड़ा है।
  • देहरी पूजन (Dehri Puja): यह सदियों पुरानी परंपरा है जिसे केवल गोस्वामी समाज द्वारा किया जाता है। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के नाम पर इसे बंद करने का आदेश दिया था, जिसे सेवायतों ने ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ का अपमान बताया।
  • पूल बंगला शुल्क: सेवायतों द्वारा दी जाने वाली ‘फूल बंगला’ सेवा पर भारी शुल्क लगाने का भी विरोध किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का ‘बैलेंस्ड’ रुख

  • दिसंबर 2025 में कोर्ट ने एक बहुत ही मानवीय और धार्मिक टिप्पणी की थी, जिसका जिक्र इस सुनवाई में भी हुआ।
  • भगवान का विश्राम: चीफ जस्टिस ने कहा था कि मंदिर दोपहर 12 बजे बंद होने के बाद भी पैसे लेकर ‘विशेष पूजा’ कराना गलत है। अमीर लोगों के लिए भगवान को एक सेकंड भी आराम नहीं करने दिया जाता, यह उनका शोषण है।”
  • संवैधानिक मर्यादा: कोर्ट ने मंदिर के प्रशासनिक नियंत्रण (State Control) और धार्मिक स्वायत्तता (Religious Autonomy) के बीच संतुलन बनाने के लिए HPC का गठन किया था।

सुनवाई के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
कोर्ट का आदेशवर्तमान धार्मिक और संरचनात्मक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा।
अगली सुनवाईदो सप्ताह बाद (पक्षकारों को स्टेटस रिपोर्ट पर जवाब देने का समय)।
HPC का रुखकमेटी ने कहा कि वे केवल कोर्ट के निर्देशों का पालन करना चाहते हैं, उनका रवैया विरोधपूर्ण (Adversarial) नहीं है।
मुख्य मुद्दादर्शन के समय में बदलाव और ‘देहरी पूजन’ को फिर से शुरू करना।

परंपरा और प्रशासन का तालमेल

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि वह मंदिर के प्रबंधन में पारदर्शिता और भीड़ प्रबंधन तो चाहता है, लेकिन वह ‘ठाकुर जी’ की सेवा पद्धति और प्राचीन रीति-रिवाजों को प्रशासनिक आदेशों के जरिए बदलने के पक्ष में नहीं है। अब सबकी नजरें दो हफ्ते बाद होने वाली सुनवाई पर हैं, जहाँ HPC की स्टेटस रिपोर्ट पर चर्चा होगी।

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