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मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- एमडी एवं सीईओ का इस्तीफा (जून 2025):कर्नाटक बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक (MD) और सीईओ श्रीकृष्णन हरिहर शर्मा ने 29 जून 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वित्त वर्ष 2024-25 के ऑडिट में पाया गया था कि शर्मा ने अपने अधिकारों से परे जाकर परामर्श (Consultants) पर ₹1.16 करोड़ का खर्च किया था, जिसे बैंक बोर्ड ने वापस वसूलने की सिफारिश की थी। यह जानकारी 14 मई 2025 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी गई थी।
- चैनल द्वारा सनसनीखेज प्रसारण:BTV News ने इस इस्तीफे को लेकर बिना किसी विश्वसनीय स्रोत या बैंक प्रबंधन से पुष्टि किए बिना रिपोर्टिंग की। चैनल ने दावा किया कि बैंक की वित्तीय स्थिति डगमगा गई है, ग्राहकों की जमा पूंजी खतरे में है और उनका पैसा डूब सकता है। चैनल ने निवेशकों और जमाकर्ताओं को बैंक में खाता खोलने से बचने की हिदायत तक दे डाली।
- बैंक की प्रतिष्ठा और शेयरों को नुकसान:इन भ्रामक खबरों के चलते बैंक के शेयर मूल्य (जो 26 जून 2025 को ₹207 पर थे) में भारी गिरावट आई और ग्राहकों व निवेशकों में दहशत फैल गई। इसके बाद बैंक ने 30 जून 2025 को चैनल के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर किया। BTV News समन तामील होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते एकतरफा कार्यवाही (Ex-parte) चलाई गई।
अदालत के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
1. “पत्रकारिता के मानदंडों की अनदेखी”:
अदालत ने भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) द्वारा जारी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा: “प्रतिवादी (चैनल) ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पत्रकारिता आचरण के मानदंडों का पालन नहीं किया है। बैंक के खिलाफ समाचार प्रकाशित करते समय पत्रकारिता के सिद्धांतों और नैतिकता को पूरी तरह दरकिनार किया गया।”
2. प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति:
- कोर्ट ने बैंक के मुख्य व्यवसाय अधिकारी चंद्रशेखरा की गवाही, वित्तीय विवरणों, इस्तीफे के पत्र और टीवी प्रसारण की सीडी/तस्वीरों का परीक्षण करने के बाद माना कि बिना जांच-परख के किए गए इस प्रसारण से बैंक के व्यावसायिक हितों और साख को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
बेंगलुरु: अपकृत्य विधि (Law of Torts) के अंतर्गत दीवानी मानहानि (Civil Defamation), भारतीय प्रेस परिषद (PCI) द्वारा निर्धारित पत्रकारिता आचरण के मानक (Norms of Journalistic Conduct), वित्तीय और बैंकिंग संस्थानों की साख की सुरक्षा, वाणिज्यिक प्रतिष्ठा की क्षति (Loss of Commercial Goodwill), तथा विशिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 (Specific Relief Act, 1963) की धारा 38 के तहत स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) पर बेंगलुरु की दीवानी अदालत ने मीडिया प्रसारण और रिपोर्टिंग की सीमाओं को रेखांकित करते हुए एक महत्वपूर्ण विधिक निर्णय सुनाया है।
अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश आर.वाई. शशिधर (Additional City Civil and Sessions Judge RY Shashidhara) ने 1 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए अपने फैसले में कर्नाटक बैंक लिमिटेड (Karnataka Bank Limited) द्वारा दायर दीवानी वाद को स्वीकार करते हुए कन्नड़ समाचार चैनल ‘BTV News’ के खिलाफ एकपक्षीय डिक्री (Ex-parte Decree) पारित की है।
अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि प्रतिवादी चैनल ने बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के इस्तीफे की पृष्ठभूमि का प्रबंधन या विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापन किए बिना वित्तीय अनियमितताओं और जमाकर्ताओं के पैसे डूबने के सनसनीखेज व मनगढ़ंत दावे प्रसारित किए। न्यायालय ने BTV News को बैंक को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) क्षतिपूर्ति अदा करने, ऑन-एयर सार्वजनिक माफी (Broadcast an Apology) प्रसारित करने, तथा भविष्य में बैंक व उसके अधिकारियों के विरुद्ध इस विवाद से संबंधित मानहानिकारक बयान देने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित (Permanently Restrained) करने का आदेश दिया।
अदालत के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था
1. ‘भारतीय प्रेस परिषद के आचार संहिता मानकों का घोर उल्लंघन’
अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश आर.वाई. शशिधर ने मीडिया रिपोर्टिंग की विधिक सीमाओं पर विचार करते हुए अपने निर्णय में दर्ज किया: “प्रतिवादी (समाचार चैनल) ने भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India – PCI) द्वारा जारी पत्रकारिता आचरण के मानदंडों का पालन नहीं किया है। प्रतिवादी ने वादी बैंक के विरुद्ध बयान और सामग्री प्रसारित करते समय पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों और नैतिक मानकों (Principles and Ethics) का सर्वथा उल्लंघन किया है।”
2. विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापन के बिना सनसनीखेज प्रसारण:
- अदालत ने साक्ष्यों की जांच के बाद पाया कि चैनल ने बैंक प्रबंधन से संपर्क किए बिना या प्रामाणिक दस्तावेजों की पुष्टि किए बिना सीधे तौर पर ऐसे दावे किए जिनसे बैंक की आंतरिक स्थिरता और कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न हुआ।
- अदालत ने माना कि यह कृत्य ‘उचित सावधानी’ (Due Diligence) और ‘सत्यनिष्ठा’ के बिना केवल सनसनी फैलाने के उद्देश्य से किया गया था, जिससे बैंक की साख, कारोबारी हितों और बाजार मूल्य को सीधी क्षति पहुंची।
3. स्थायी निषेधाज्ञा और सार्वजनिक माफी का आदेश:
- अदालत ने विशिष्ट अनुतोष अधिनियम के सिद्धांतों के तहत BTV News को इस विवाद से संबंधित बैंक या उसके निदेशकों/अधिकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार के मानहानिकारक, भ्रामक या निराधार समाचार प्रसारित करने से स्थायी रूप से रोक दिया।
- इसके साथ ही, दर्शकों के मन में पैदा किए गए भय और भ्रम को दूर करने के लिए चैनल को अपने प्रसारण पर बैंक से औपचारिक माफी मांगने का निर्देश दिया।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2025–2026)
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| वादी (संस्थान) | कर्नाटक बैंक लिमिटेड — एक प्रतिष्ठित वाणिज्यिक अनुसूचित बैंक। |
| प्रतिवादी पक्ष | BTV News (कन्नड़ समाचार चैनल)। |
| मूल आंतरिक विवाद (मई 2025) | बैंक के आंतरिक वित्तीय ऑडिट (FY 2024-25) में पाया गया कि तत्कालीन MD एवं CEO श्रीकृष्णा हरि हर शर्मा ने सलाहकारों और अन्य राजस्व मदों में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ₹1.16 करोड़ का व्यय किया था। बैंक बोर्ड ने 14 मई 2025 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को इसकी विधिवत सूचना दी और वसूली की सिफारिश की। |
| इस्तीफा (29 जून 2025) | एमडी एवं सीईओ श्रीकृष्णा हरि हर शर्मा ने व्यक्तिगत कारणों और मुंबई में बसने की इच्छा का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। |
| विवादित प्रसारण | BTV News ने इस्तीफे के तुरंत बाद प्रसारण शुरू किया कि कर्नाटक बैंक की वित्तीय स्थिति चरमरा गई है, जमाकर्ताओं का पैसा निकाला (Siphoned off) जा सकता है, ग्राहक नया खाता खोलने से बचें, और बैंक के निदेशकों के बीच गंभीर वित्तीय विवाद चल रहा है। |
| बैंक को नुकसान | बैंक ने वाद में बताया कि 26 जून 2025 को शेयर मूल्य लगभग ₹207 था, जो इस भ्रामक प्रसारण के बाद तेजी से गिरा; जमाकर्ताओं और निवेशकों में दहशत फैल गई जिससे बैंक अधिकारियों को लगातार स्पष्टीकरण देने पड़े। |
| न्यायालयीन कार्यवाही | बैंक ने 30 जून 2025 को दीवानी वाद दायर किया। समन की तामील के बावजूद BTV News अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद अदालत ने मामले को एकपक्षीय (Ex-parte) रूप से आगे बढ़ाया। |
| साक्ष्य मूल्यांकन | अदालत ने बैंक के मुख्य व्यवसाय अधिकारी (CBO) चंद्रशेखर की गवाही, ऑडिट रिपोर्ट, इस्तीफा पत्र, टीवी प्रसारण के फोटोग्राफ्स और सीडी (CD) का गहराई से परीक्षण किया। |
| अदालत का अंतिम आदेश | वाद व्यय सहित डिक्री; ₹1 लाख का हर्जाना, सार्वजनिक माफी और स्थायी रोक का आदेश। |
विधिक एवं वाणिज्यिक विश्लेषण: ‘प्रेस की स्वतंत्रता बनाम वित्तीय संस्थानों की प्रतिष्ठा’
- बैंकिंग क्षेत्र में साख (Goodwill) का महत्व:
- किसी भी बैंकिंग और वित्तीय संस्थान का सम्पूर्ण अस्तित्व “जन-विश्वास” (Public Trust) पर टिका होता है।
- किसी सामान्य कंपनी और बैंक में यह बुनियादी अंतर है कि बैंक के खिलाफ ‘पैसा डूबने’ या ‘खाता न खोलने’ जैसी झूठी और असत्यापित चेतावनियां जनता में भगदड़ (Bank Run) जैसी स्थिति पैदा कर सकती हैं, जिससे न केवल बैंक का शेयर मूल्य गिरता है, बल्कि जमाकर्ताओं की बचत पर भी मनोवैज्ञानिक संकट आ जाता है।
- भारतीय प्रेस परिषद (PCI) के मार्गदर्शक सिद्धांत:
- पीसीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी संस्थान या व्यक्ति के विरुद्ध कोई आरोप या वित्तीय विसंगति प्रकाशित/प्रसारित करने से पूर्व संबंधित संस्थान का आधिकारिक पक्ष (Version) लेना अनिवार्य है।
- BTV News द्वारा बैंक का पक्ष लिए बिना एकपक्षीय चेतावनियां जारी करना निष्पक्ष पत्रकारिता (Fair Reporting) के सिद्धांतों का प्रत्यक्ष उल्लंघन था।
विधिक विवरण
- न्यायालय: अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायालय, बेंगलुरु (सिटी सिविल कोर्ट)
- केस संदर्भ: कर्नाटक बैंक लिमिटेड बनाम BTV [मूल वाद (OS) संख्या]
- पीठासीन अधिकारी: आर.वाई. शशिधर (अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश)
- निर्णय की तिथि: 1 अक्टूबर 2026
- कार्यवाही की प्रकृति: एकपक्षीय दीवानी मानहानि वाद (Ex-parte Decree with Costs)
- अधिनिर्णीत अनुतोष:
- ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति (हर्जाना) मय वाद व्यय।
- BTV News द्वारा कर्नाटक बैंक से ऑन-एयर औपचारिक सार्वजनिक माफी (Broadcast an Apology)।
- संबंधित विषय पर बैंक और उसके अधिकारियों के विरुद्ध मानहानिकारक प्रसारण पर स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction)।
प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- अपकृत्य विधि (Law of Torts) — दीवानी मानहानि एवं व्यावसायिक साख की हानि (Injury to Commercial Reputation)
- विशिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 (Specific Relief Act, 1963) — धारा 38 एवं 39 (स्थायी और अनिवार्य व्यादेश / Permanent & Mandatory Injunction)
- प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 — भारतीय प्रेस परिषद (PCI) द्वारा जारी पत्रकारिता आचार संहिता मानक
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 19(2) (मानहानि के संदर्भ में युक्तियुक्त निर्बंधन)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- वित्तीय संस्थागत मानहानि का विधिक मानक: ‘समाचार चैनलों को किसी वाणिज्यिक बैंक की वित्तीय स्थिरता या जमा सुरक्षा के बारे में असत्यापित और सनसनीखेज आरोप लगाने का कोई विधिक विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है; आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि किए बिना दी गई झूठी चेतावनियां दीवानी मानहानि का गठन करती हैं, जिसके लिए चैनल क्षतिपूर्ति और सार्वजनिक माफी के लिए उत्तरदायी है।’
BTV News:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायालय, बेंगलुरु (Addl. City Civil & Sessions Judge) |
| न्यायाधीश | न्यायाधीश आर. वाई. शशीधरा (R Y Shashidhara) |
| वादी (Plaintiff) | कर्नाटक बैंक लिमिटेड (Karnataka Bank Limited) |
| प्रतिवादी (Defendant) | कन्नड़ समाचार चैनल – BTV News (Eagles Sight Media Pvt. Ltd.) |
| मामला/दावा | ₹1 लाख का मानहानि का दीवानी मुकदमा, सार्वजनिक माफी और स्थायी रोक की मांग। |
| मूल घटनाक्रम | जून 2025 में बैंक के एमडी और सीईओ श्रीकृष्णन हरिहर शर्मा के इस्तीफे पर बिना सत्यापन के सनसनीखेज खबरें प्रसारित करना। |
| अदालत का निर्णय | मुकदमा मंजूर; चैनल पर ₹1 लाख का हर्जाना, सार्वजनिक माफी और मानहानिकारक बयानों पर स्थायी प्रतिबंध। |

