Tuesday, October 27, 2026
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Gyanesh Kumar-I: फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं हुआ; अत्यावश्यक मामलों में चुनाव आयुक्तों की मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक रूप से ली जाती है, जिसे बाद में फाइल पर दर्ज किया जाता है

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निर्वाचन आयोग (ECI) के हलफनामे के मुख्य बिंदु

1. “सभी तीन SIR आदेश सर्वसम्मत थे”:

  • आयोग ने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के तीनों SIR आदेश तीनों सदस्यों (CEC ज्ञानेश कुमार, EC सुखबीर सिंह संधू और EC विवेक जोशी) के सर्वसम्मत निर्णयों पर आधारित थे।
  • ECI ने कहा कि फाइलों की आवाजाही के दौरान किसी चुनाव आयुक्त द्वारा दर्ज की गई सुझाव, टिप्पणी या प्रश्न अपने आप में ‘मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 18 के तहत आयोग का अंतिम फैसला नहीं होता।

2. फॉर्म 6 और ऑनलाइन पोर्टल का स्पष्टीकरण:

  • ECI ने कहा कि ‘निर्वाचकों का पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत फॉर्म में संशोधन का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है।
  • आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म 6 के साथ घोषणा पत्र (Declaration Form) को इस प्रकार प्रदर्शित किया गया था जिससे संशोधन का भ्रम पैदा हो सकता था। ऐसा आवेदकों की सुविधा (एकल OTP और ई-साइन) के लिए किया गया था। 21 अक्टूबर 2026 के फैसले के तहत अब इसे भौतिक फॉर्म की तरह दो अलग भागों में प्रदर्शित किया जाएगा।

3. “अखबार की रिपोर्ट कानूनी साक्ष्य नहीं”:

  • आयोग ने याचिका की पोषणीयता (Maintainability) पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह याचिका पूरी तरह से केवल एक समाचार पत्र की रिपोर्ट (‘द इंडियन एक्सप्रेस’) पर आधारित है, जिसका कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया है। कानून की नज़र में समाचार पत्र की रिपोर्ट तथ्यों का साक्ष्य नहीं होती।

4. CEC को हटाने की मांग का विरोध:

  • CEC ज्ञानेश कुमार को काम करने से रोकने की मांग का विरोध करते हुए ECI ने अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया, जिसके तहत CEC को केवल उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जिससे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।

नई दिल्ली: भारत का संविधान के अनुच्छेद 324 (भारत निर्वाचन आयोग की संरचना व कार्य संचालन), अनुच्छेद 324(5) (मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान महाभियोग द्वारा ही हटाने की संवैधानिक सुरक्षा), मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 (सर्वसम्मति अथवा बहुमत से निर्णय लेने की सांविधिक प्रक्रिया), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत ‘फॉर्म 6’ (Form 6) का विधिक ढांचा, तथा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सर्वोच्च न्यायालय में अपना प्रारंभिक हलफनामा प्रस्तुत किया है।

उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरी (Bhanu Prakash Yeturu) द्वारा दायर इस संक्षिप्त हलफनामे को ECI के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की सर्वसम्मति (Unanimously Approved) से अनुमोदित किया गया है।

आयोग ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खोजी रिपोर्ट को विधिक रूप से अपुष्ट बताते हुए खारिज कर दिया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर 14 एकतरफा आदेश पारित किए। ECI ने स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित तीनों मूल आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे, फाइलों पर आयुक्तों की टिप्पणियां अंतिम निर्णय नहीं होतीं, और अत्यावश्यक परिस्थितियों में आयुक्तों की मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों (Electronically) से ली जाती है जिसे बाद में प्रशासनिक फाइलों पर दर्ज किया जाता है।

ECI के जवाबी हलफनामे के मुख्य कानूनी आधार एवं विधिक स्पष्टीकरण

1. तीनों SIR आदेशों पर सर्वसम्मति और प्रशासनिक फाइल संचालन की प्रक्रिया

  • तीनों आदेशों की वैधता: ECI ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े तीनों बुनियादी नीतिगत आदेश—दिनांक 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025, और 14 मई 2026—तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति और सर्वसम्मति (Unanimous Decisions) से जारी किए गए थे।
  • फाइल संचालन (Movement of Files): आयोग ने प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट करते हुए कहा कि एक सामान्य प्रक्रिया के तहत कोई भी फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त के पास जाती है, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त के पास और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के पास अनुमोदन हेतु पहुंचती है।
  • नोटिंग्स ‘निर्णय’ नहीं होतीं: इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी चुनाव आयुक्त द्वारा दर्ज किया गया कोई विचार, प्रश्न, सुझाव या अवलोकन 2023 के अधिनियम की धारा 18 के तहत ‘आयोग का अंतिम निर्णय’ नहीं माना जा सकता; वह केवल आंतरिक विमर्श का हिस्सा होता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक मंजूरी (Electronic Approval): अत्यावश्यक परिस्थितियों में, जहां समय का अभाव हो, चुनाव आयुक्तों की मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक संचार (ईमेल/मैसेजिंग) के माध्यम से प्राप्त की जाती है, और औपचारिक प्रक्रिया के तहत उस अनुमोदन को बाद में भौतिक फाइल पर दर्ज कर दिया जाता है। सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना आदेश जारी करने वाले किसी भी अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
  • 28 जुलाई 2026 का अप्रभावी आदेश: प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव द्वारा 28 जुलाई 2026 को जारी कार्य-आवंटन आदेश पर दोनों आयुक्तों के 30 जुलाई के संयुक्त निर्देश के बाद उसे कभी लागू ही नहीं किया गया।

2. फॉर्म 6 पर स्थिति: “कोई संशोधन नहीं हुआ”, किंतु ऑनलाइन प्रक्रिया को विभाजित किया गया

  • केंद्र सरकार का सांविधिक प्राधिकार: आयोग ने दोहराया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत विहित प्रपत्रों में संशोधन करने का विधिक अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। ECI ने फॉर्म 6 में कोई वैधानिक बदलाव नहीं किया है।
  • घोषणापत्र (Declaration) की तकनीकी मैपिंग: SIR घोषणापत्र—जिसमें आवेदक से यह पूछा जाता है कि क्या उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम किसी पूर्ववर्ती SIR मतदाता सूची में दर्ज था—एक अलग दस्तावेज था। ऑनलाइन पोर्टल पर दोनों को एक साथ इसलिए प्रस्तुत किया गया ताकि आवेदक को केवल एकल ओटीपी (Single OTP) और ई-साइन (e-sign) की आवश्यकता पड़े।
  • 21 अक्टूबर 2026 का सुधारात्मक निर्णय: अदालत में उपजे भ्रम और आपत्तियों को देखते हुए, ECI के निर्वाचक नामावली प्रभाग (Electoral Roll Division) ने 21 अक्टूबर 2026 को निर्णय लिया कि ऑनलाइन पोर्टल पर भी आवेदन को दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर दिया जाएगा, जैसा कि भौतिक (Physical) फॉर्म में होता है।

3. ‘समाचार पत्र की रिपोर्ट साक्ष्य नहीं है’ (Maintainability पर आपत्ति)

  • ECI ने याचिका की पोषणीयता पर कड़ा आक्षेप करते हुए कहा कि पूरी याचिका केवल ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक अखबार रिपोर्ट पर टिकी है, जिसका याचिकाकर्ताओं ने कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया है:“कानून की नजर में, किसी समाचार पत्र की रिपोर्ट को उसमें वर्णित तथ्यों का स्वतः सिद्ध विधिक साक्ष्य (Evidence of facts) नहीं माना जा सकता।”
  • आयोग ने स्पष्ट किया कि उसने कभी भी कोई आंतरिक फाइल या गोपनीय नोटिंग्स मीडिया को जारी नहीं की हैं और संवैधानिक संस्था की साख पर प्रश्नचिह्न लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

4. ECINet की सुरक्षा, घर-घर सत्यापन और अन्य राज्यों की स्थिति

  • ECINet की शुचिता: आयोग ने कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के औपचारिक वैधानिक आदेश के बिना ECINet प्लेटफॉर्म पर कोई भी नाम न तो जोड़ा जा सकता है, न हटाया जा सकता है और न ही संशोधित किया जा सकता है।
  • विशेषज्ञ तकनीकी समिति: ECINet के कानूनी और तकनीकी अनुपालन की जांच के लिए 14 अक्टूबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (IISc Bengaluru) के विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।
  • घर पर सत्यापन (26 सितंबर 2026 का आदेश): गैर-मैप किए गए मतदाताओं के दस्तावेजों को बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उनके घर जाकर एकत्र करेंगे; ऐसे मतदाताओं को ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई हेतु बुलाने की आवश्यकता नहीं है।
  • गोवा और पश्चिम बंगाल के तथ्य: गोवा में चिह्नित 97 मामलों में से 88 ने फॉर्म 6 भरा था और उन्हें स्वीकार किया गया, 6 विदेश में थे और 3 विदेशी/पुर्तगाली पासपोर्ट धारक थे। पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख अपीलें ECI द्वारा नहीं, बल्कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन में दायर की गई थीं।

5. अनुच्छेद 324(5): मुख्य चुनाव आयुक्त को कार्य करने से नहीं रोका जा सकता

  • याचिकाकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार को उनके पद से निलंबित करने या कार्य करने से रोकने का अंतरिम निर्देश मांगा था।
  • ECI ने इसका विरोध करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों (संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से महाभियोग) पर हटाया जा सकता है, जैसे उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है। अतः जनहित याचिका में उन्हें न्यायिक आदेश से कार्य करने से रोकने की प्रार्थना पूरी तरह गैर-पोषणीय (Not Maintainable) है।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2025–2026)

चरण / संदर्भतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे
मूल वादराकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह बनाम भारत संघ व अन्य [W.P.(C) No. 1246/2026] — अधिकार-पृच्छा (Writ of Quo Warranto) याचिका।
याचिकाकर्ताओं के आरोपमुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा दो अन्य चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों को नजरअंदाज कर निर्णय लेना, 2023 अधिनियम की धारा 18 की अवहेलना, एजेंडा व कार्यवृत्त में हेरफेर, तथा मतदाता पंजीकरण में मनमाने बदलाव।
ECI का आधिकारिक जवाबउप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरी के माध्यम से दाखिल हलफनामा; सभी तीनों आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदित।
आगामी प्रक्रियात्मक चरणदशहरा अवकाश का हवाला देते हुए आयोग ने विस्तृत पैरा-वाइज उत्तर दाखिल करने की स्वतंत्रता मांगी; सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिन में प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करने का निर्देश दिया; मामला 17 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध।

विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘अधिनियम की धारा 18 और अनुच्छेद 324’

  • मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18:
    • धारा 18 के अनुसार, आयोग के सभी कार्य यथासंभव सर्वसम्मति (Unanimity) से निपटाए जाएंगे। यदि किसी बिंदु पर मतभेद हो, तो निर्णय बहुमत (Majority) के आधार पर होगा।
    • ECI के हलफनामे का मुख्य तर्क यह है कि फाइल संचालन के दौरान चुनाव आयुक्तों द्वारा व्यक्त किए गए प्रारंभिक विचार या आपत्तियां ‘मतभेद’ नहीं बल्कि आंतरिक प्रशासनिक विमर्श हैं, और जब तक अंतिम आदेश बहुमत या सर्वसम्मति से पारित होता है (चाहे वह डिजिटल सहमति से ही क्यों न हो), धारा 18 का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
  • अखबार की रिपोर्ट की साक्ष्यिक सीमाएं (Evidentiary Value of Newspaper Reports):
    • सर्वोच्च न्यायालय ने लक्ष्मी राज शेट्टी बनाम तमिलनाडु राज्य [(1988) 3 SCC 319] और रोहित चौधरी बनाम विपिन बिहारी गुप्ता [(2024) 4 SCC 606] में निरंतर यह दोहराया है कि किसी समाचार पत्र में प्रकाशित खबर को बिना मूल अभिलेखों या संवाददाता के शपथपत्र के दीवानी या संवैधानिक मुकदमों में अकाट्य साक्ष्य (Conclusive Evidence) के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ECI ने इसी विधिक सिद्धांत को ढाल बनाया है।

विधिक विवरण एवं संबद्ध पक्षकार

  • न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (संवैधानिक मूल रिट क्षेत्राधिकार)
  • केस संदर्भ: राकेश कुमार सिंह बनाम भारत संघ व अन्य [W.P.(C) No. 1246/2026] (संबद्ध याचिकाएं: शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राहुल गांधी, डोला सेन व अन्य)
  • पीठ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना
  • हलफनामा प्रस्तुति तिथि: 26 अक्टूबर 2026
  • आगामी निर्णायक सुनवाई: 17 नवंबर 2026

प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:

  • भारत का संविधान — अनुच्छेद 324 (निर्वाचन आयोग की शक्तियां), अनुच्छेद 324(5) (CEC की पदमुक्ति की प्रक्रिया), एवं अनुच्छेद 32
  • मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 — धारा 18 (कार्य संचालन, सर्वसम्मति व बहुमत प्रक्रिया)
  • निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 — फॉर्म 6 (मतदाता सूची में नाम जोड़ने का वैधानिक प्रपत्र)
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 — धारा 21 (विशेष गहन पुनरीक्षण – SIR)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • संवैधानिक संस्थाओं में निर्णय-प्रक्रिया और न्यायिक समीक्षा का विधिक मानक: ‘संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के विरुद्ध अधिकार-पृच्छा या निलंबन की मांग केवल समाचार पत्रों की अपुष्ट रिपोर्टों के आधार पर स्वीकार नहीं की जा सकती; चुनाव आयोग के निर्णयों में सर्वसम्मति या बहुमत की वैधानिक अनिवार्यता का परीक्षण वास्तविक प्रशासनिक अभिलेखों और फाइलों के आधार पर ही किया जाएगा; यदि किसी निर्णय में वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है, तो न्यायालय उस निर्णय को रद्द करने का पूर्ण क्षेत्राधिकार रखता है।’
  • वर्तमान स्थिति: निर्वाचन आयोग का प्रारंभिक हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया जा चुका है; सर्वोच्च न्यायालय ने सभी याचिकाकर्ताओं को ECI के जवाब पर 10 दिनों में अपना औपचारिक प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करने का निर्देश दिया है; पूरे विवाद पर 17 नवंबर 2026 को विस्तृत सुनवाई होगी।

Gyanesh Kumar-I: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठमुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना
मामला/साइटेशनराकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह बनाम भारत संघ व अन्य (Rakesh Kumar Singh v. Union of India)
हलफनामा प्रस्तुतकर्तानिर्वाचन आयोग (उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु के माध्यम से)
याचिकाकर्ता पक्षराकेश कुमार सिंह, शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राहुल गांधी, डोला सेन आदि (प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह, डॉ. मेनका गुरुस्वामी, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी)
मुख्य बिंदु1. SIR के तीनों आदेश (24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025, 14 मई 2026) सर्वसम्मति से पारित।
2. फॉर्म 6 में कोई कानूनी संशोधन नहीं; ऑनलाइन पोर्टल पर इसे अलग किया जा रहा है।
3. CEC को हटाने की प्रक्रिया केवल सुप्रीम कोर्ट जज की तर्ज पर संभव (अनुच्छेद 324(5))।
अदालत का फैसला10 दिन का समय: याचिकाकर्ताओं को रीजॉइंडर दाखिल करने हेतु समय देकर अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 तय।
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